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Ranchi : मंगलवार की शाम रांची के धुर्वा स्थित JSCA इंटरनेशनल स्टेडियम में क्रिकेट का रोमांच देखने पहुंचे हजारों फैंस के लिए रात का मंजर किसी डरावने सपने जैसा साबित हुआ। मैदान के अंदर भले ही छोटानागपुर रॉयल्स ने जमशेदपुर स्टीलर्स को 7 विकेट से हराकर झारखंड प्रीमियर लीग 2026 की ट्रॉफी अपने नाम कर ली, लेकिन मैदान के बाहर जो गदर मचा, उसने पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया। फ्री एंट्री और सोशल मीडिया पर उड़ी एक अफवाह के चक्कर में स्टेडियम के गेट पर ऐसी भगदड़ मची कि 22 से ज्यादा क्रिकेट प्रेमी बेतरह जख्मी हो गए। इनमें से 7 से 8 लोगों को गंभीर चोटें लगी।
‘धोनी आ रहे हैं’ की अफवाह और मुफ्त एंट्री ने लगाया पलीता
झारखंड टी-20 लीग का यह पहला ही सीजन था, इसलिए फाइनल को लेकर क्रिकेट प्रेमियों में जबरदस्त क्रेज था। इसी बीच आग में घी डालने का काम किया सोशल मीडिया पर व्यूज बटोरने के लिए फैलाई गई एक अफवाह ने। इंटरनेट पर यह बात हवा की तरह फैल गई कि फाइनल मैच देखने के लिए खुद महेंद्र सिंह धोनी स्टेडियम आ रहे हैं। बस फिर क्या था, धोनी की एक झलक पाने और मैच में फ्री एंट्री होने की वजह से रांची और आसपास के इलाकों से हजारों फैंस स्टेडियम पहुंच गए। आयोजकों को इस बात का दूर-दूर तक अंदाजा नहीं था कि इतनी अप्रत्याशित भीड़ वहां पहुंच जाएगी।
चार गेट होने के बावजूद खोला सिर्फ एक रास्ता, भड़क उठे फैंस
स्टेडियम में एंट्री के लिए वैसे तो चार बड़े गेट हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर शुरुआत में सिर्फ नॉर्थ गेट को ही खोला गया था। जब नॉर्थ गेट पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची और दबाव बढ़ने लगा, तो वहां तैनात स्टाफ ने अचानक लोगों को साउथ गेट की तरफ जाने को कह दिया। इस अचानक हुए बदलाव से लोग हड़बड़ा गए और गेट के बाहर धक्का-मुक्की शुरू हो गई। देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए और लोग एक-दूसरे को रौंदते हुए आगे बढ़ने लगे। जब भीड़ संभली नहीं, तो आयोजकों ने सारे गेट बंद कर दिए। इसके बाद तो बाहर फंसे हजारों फैंस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह धड़ाम
इस महा-आयोजन के लिए सुरक्षा के जो इंतजाम किए गए थे, वे पूरी तरह से धड़ाम हो गये। प्रत्यक्षदर्शियों का इल्जाम है कि हजारों की इस बेकाबू भीड़ को संभालने के लिए न तो पर्याप्त मात्रा में प्राइवेट बाउंसर तैनात थे और न ही स्थानीय पुलिस-प्रशासन के साथ आयोजकों का कोई तालमेल था। नॉर्थ, वेस्ट और साउथ तीनों ही मुख्य द्वारों पर स्थिति पूरी तरह कंट्रोल से बाहर हो गया। भगदर मची तो स्टेडियम के बाहर का इलाका लोगों की चीख-चित्कार से दहल उठा। इस दौरान कई जगहों पर लोहे की भारी-भरकम बैरिकेडिंग भी टूट गयी और वेस्ट गेट को भी डैमेज हो गया। कई क्रिकेट प्रेमी तो अपनी जान जोखिम में डालकर स्टेडियम की ऊंची-ऊंची दीवारों को फांदकर अंदर घुसते नजर आए।
रणक्षेत्र बना स्टेडियम के बाहर, चारों तरफ बिखरे मिले जूते-चप्पल
भगदड़ के बाद स्टेडियम के बाहर का नजारा किसी रणक्षेत्र जैसा दिख रहा था। चारों तरफ लोगों के जूते और चप्पल बिखरे पड़े थे। भीड़ के रेले में कई गाड़ियां और बाइक भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। भगदड़ की चपेट में आने से बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग बुरी तरह चोटिल हुए। घटना की गंभीरता को देखते हुए रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने आनन-फानन में देर रात तक लगातार 108 एंबुलेंस की गाड़ियां स्टेडियम भेजीं। मेडिकल पार्टनर राज अस्पताल की टीम ने कई मामूली रूप से घायलों का इलाज स्टेडियम परिसर में ही किया। वहीं, 5 गंभीर घायलों को राज अस्पताल, 2 को सदर अस्पताल और 1 को पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक सभी घायल खतरे से बाहर हैं, लेकिन एक लड़की के पेट में गहरी चोट आने की वजह से उसे निगरानी में रखा गया है।
क्या बोले जेएससीए अध्यक्ष और आयोजक
इस पूरे बवाल पर जेएससीए के अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव ने कहा कि 10 जून से लीग के मैच चल रहे थे, लेकिन पहले कभी इतने दर्शक नहीं आए थे। फाइनल में अचानक उमड़ी अप्रत्याशित भीड़ के कारण यह स्थिति पैदा हुई। वहीं आयोजन समिति के सदस्य कमल ने कहा कि कुछ समय के लिए स्थिति असामान्य हुई थी, लेकिन बाद में सभी को कतार में लगाकर अंदर प्रवेश दे दिया गया और मैच बिना किसी बाधा के पूरा हुआ।
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