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Home » “जब हर इंसान को मिलेगा सम्मान, तभी बनेगा समृद्ध भारत”
झारखंड

“जब हर इंसान को मिलेगा सम्मान, तभी बनेगा समृद्ध भारत”

June 29, 2026No Comments4 Mins Read
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Ranchi : अगर विकास का फायदा सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित रह जाए तो उसे वास्तविक विकास नहीं कहा जा सकता। विकास तब मायने रखता है, जब समाज के आखिरी व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंचे, हर नागरिक को सम्मान मिले और किसी के साथ भेदभाव न हो। यही संदेश सोमवार को रांची के ओयना गांव स्थित डायमंड सिटी सभागार से पूरे देश के लिए दिया गया, जहां ईस्टर्न इंडिया डेवलपमेंट फोरम की ओर से “मानव अधिकार और समावेशी विकास” विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया।

देश के अलग-अलग राज्यों से आए सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों और बुद्धिजीवियों ने एक मंच पर बैठकर इस बात पर चर्चा की कि बदलते समय में मानवाधिकारों की रक्षा कैसे की जाए और विकास को समाज के हर वर्ग तक कैसे पहुंचाया जाए। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य एवं पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विद्युत रंजन सारंगी, आयकर आयुक्त निशा उरांव, ईस्टर्न इंडिया डेवलपमेंट फोरम के अध्यक्ष संजीव कुमार, दिया सेवा संगठन की सचिव डॉ. सीता कुमारी, समाजसेवी मनोज जैना और कार्यक्रम संयोजक अर्णव झा ने दीप प्रज्ज्वलित कर की।

‘वसुधैव कुटुंबकम्’ सिर्फ श्लोक नहीं, भारत की जीवनशैली है

मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति विद्युत रंजन सारंगी ने अपने संबोधन में कहा कि हर व्यक्ति को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। यही मानवाधिकार का सबसे बड़ा आधार है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति हमेशा से सबको साथ लेकर चलने की रही है। “वसुधैव कुटुंबकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” जैसे विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सदियों पहले थे। उन्होंने कहा कि अगर समाज का कोई एक वर्ग भी विकास से पीछे छूट जाता है तो देश आगे नहीं बढ़ सकता। इसलिए जरूरत इस बात की है कि विकास की योजनाएं गांव, गरीब, आदिवासी, महिला, युवा और समाज के कमजोर वर्ग तक समान रूप से पहुंचें। उन्होंने यह भी कहा कि मानवाधिकार केवल अदालतों या कानून का विषय नहीं है। यह समाज की सोच और संवेदनशीलता से जुड़ा मुद्दा है। जब लोग एक-दूसरे के अधिकारों का सम्मान करेंगे, तभी लोकतंत्र मजबूत होगा।

विकास की असली पहचान समान अवसर, सम्मान और भागीदारी

आयकर आयुक्त निशा उरांव ने कहा कि किसी भी राज्य या देश की प्रगति केवल आर्थिक आंकड़ों से नहीं आंकी जा सकती। असली विकास तब होता है, जब हर वर्ग को बराबर का अवसर मिले और कोई भी खुद को उपेक्षित महसूस न करे। उन्होंने आदिवासी और मूलवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत को देश की बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि इसे बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। अगर हमारी सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहेगी, तभी सामाजिक संतुलन भी बना रहेगा।

ईस्टर्न इंडिया डेवलपमेंट फोरम के अध्यक्ष संजीव कुमार ने कहा कि संस्था पूर्वी भारत में शिक्षा, उद्योग, रोजगार और सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। उनका कहना था कि सरकार और समाज के बीच बेहतर समन्वय बनाकर ही समावेशी विकास का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

दिया सेवा संगठन की सचिव डॉ. सीता कुमारी ने कहा कि सरकारी योजनाओं की सबसे ज्यादा जरूरत उन लोगों को होती है जो गांवों और दूरदराज के इलाकों में रहते हैं। इसलिए जरूरी है कि अधिकारों और योजनाओं की जानकारी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। जागरूकता बढ़ेगी तो लोग अपने अधिकारों का इस्तेमाल भी बेहतर तरीके से कर पाएंगे।

समाजसेवी मनोज जैना ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की ओर से वर्ष 1948 में मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के बाद दुनिया में अधिकारों को लेकर नई सोच विकसित हुई। भारत में 1993 में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम लागू हुआ, लेकिन आज भी कई जगह मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि केवल कानून बना देने से काम नहीं चलेगा। समाज में संवेदनशीलता और जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है।

कार्यक्रम के दौरान समाज, खेल, पत्रकारिता और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई लोगों को सम्मानित भी किया गया। इनमें राष्ट्रीय खिलाड़ी अनीता कुमारी, आयकर आयुक्त निशा उरांव, नरेंद्र कुमार, वरिष्ठ पत्रकार कविलाश कुमार बैठा, नेवरी के मुखिया साधो उरांव, मनीष वर्मा, ए.के. राय, पी.पी. सरफराज अली, मंटू महांती, श्रीपार्थो सहित कई अन्य विशिष्ट व्यक्तित्व शामिल रहे।

कार्यक्रम का समापन अर्णव सिन्हा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। पूरे सेमिनार का सार यही रहा कि मानवाधिकार और समावेशी विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। जब हर नागरिक को समान अवसर, सम्मान और न्याय मिलेगा, तभी “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना सही मायने में साकार होगी और भारत समृद्ध तथा सशक्त राष्ट्र बनने की दिशा में और मजबूती से आगे बढ़ेगा।

इसे भी पढ़ें : अधिवक्ता बाप-बेटा म’र्डर केस के गवाह को सरेराह टपका डाला

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