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Home » काम नहीं तो घर बैठे भत्ता, देरी हुई तो जुर्माना : ‘VB-G RAM G’ से बदलेगी बिहार के मजदूरों की किस्मत
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काम नहीं तो घर बैठे भत्ता, देरी हुई तो जुर्माना : ‘VB-G RAM G’ से बदलेगी बिहार के मजदूरों की किस्मत

July 2, 2026No Comments5 Mins Read
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Patna : दोपहर के करीब तीन बज रहे थे। पटना का अधिवेशन भवन खचाखच भरा हुआ था। मंच पर जीविका दीदियां बैठी थीं, सामने विभाग के बड़े अफसरान थे और माइक पर राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार। माहौल में एक अजीब सी हलचल थी, क्योंकि आज बिहार के ग्रामीण इलाकों के लिए एक बहुत बड़ा एलान हुआ था। मंत्री श्रवण कुमार ने माइक संभालते हुए कहा “मनरेगा ने 20 साल का लंबा सफर तय किया, लेकिन अब वक्त बदलने का है। आज से हम एक नई यात्रा शुरू कर रहे हैं… ‘वीबी-जी राम जी’!”

सुनने में यह नाम भले ही किसी धार्मिक नारे जैसा लगे, लेकिन असल में यह बिहार के करोड़ों अकुशल मजदूरों की किस्मत से जुड़ी एक नई सरकारी योजना है। पूरा नाम है… विकसित भारत-ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका गारंटी अधिनियम, 2025 (वीबी-जी राम जी)।

100 दिन का दौर बीता, अब मिलेंगे पूरे 125 दिन

अब तक गांवों में रोजगार का सबसे बड़ा सहारा मनरेगा को माना जाता था, जहां साल में 100 दिन के काम की गारंटी मिलती थी। लेकिन महंगाई और बदलती जरूरतों को देखते हुए इस नई योजना में काम के दिनों को बढ़ा दिया गया है। अब मजदूरों को साल में कम से कम 125 दिन का रोजगार मिलेगा। यानी सीधे-सीधे 25 दिन की कमाई का इजाफा।

काम नहीं मिला, तो घर बैठे मिलेगा बेरोजगारी भत्ता

इस योजना की जो सबसे बड़ी और कड़क शर्त है, वह है काम देने की समय-सीमा। अगर किसी मजदूर ने काम के लिए आवेदन किया, तो सरकार को हर हाल में 15 दिन के भीतर उसे काम देना ही होगा। अगर अफसर 15 दिन में काम नहीं दे पाए? तो फिर जेब से पैसे देने के लिए तैयार रहें। योजना के मुताबिक शुरुआती 30 दिन: अगर काम नहीं मिला, तो तय मजदूरी की एक-चौथाई (25%) राशि बेरोजगारी भत्ते के रूप में घर बैठे मिलेगी। अगर इसके बाद भी काम नहीं मिलता, तो आधी (50%) मजदूरी भत्ते के तौर पर दी जाएगी।

इसमें दिलचस्प बात यह है कि इस बेरोजगारी भत्ते का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी। लेकिन सरकार यह पैसा अपनी जेब से नहीं भरेगी, बल्कि उस लापरवाह अधिकारी या एजेंसी की सैलरी और फंड से 30 दिन के भीतर वसूल करेगी, जिसकी वजह से मजदूर को काम नहीं मिला।

देरी हुई… तो मीटर चालू

अक्सर गांवों से शिकायत आती है कि “साहब, काम तो कर लिया, लेकिन मजदूरी का पैसा तीन महीने से नहीं आया।” इस नई योजना ने इसका भी पक्का इलाज ढूंढ लिया है। अकुशल मजदूरों का मास्टर रोल बंद होने के बाद अगर 15 दिनों के भीतर उनके बैंक खाते में पैसे नहीं पहुंचे, तो सरकार पर जुर्माना लगेगा। यह जुर्माना 0.05 फीसदी प्रतिदिन के हिसाब से स्वतः मजदूर के खाते में मुआवजे के तौर पर जुड़ जाएगा। यानी जितनी देरी, उतना ज्यादा पैसा।

अब दिल्ली के भरोसे नहीं, पहले से तय होगा बजट

मंत्री श्रवण कुमार ने एक बहुत बारीक लेकिन जरूरी अंतर समझाया। उन्होंने बताया कि मनरेगा में केंद्र सरकार ‘मांग के आधार पर’ पैसा भेजती थी… यानी जब राज्य काम मांगता था, तब पैसा आता था। इसमें कई बार देरी होती थी। लेकिन ‘वीबी-जी राम जी’ योजना में ऐसा नहीं होगा। अब साल की शुरुआत में ही बिहार की जनसंख्या, यहां की प्रति व्यक्ति आय और पिछड़ेपन को देखकर एक फिक्स बजट दे दिया जाएगा।

इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने तिजोरी भी खोल दी है। अगले 9 महीनों के लिए केंद्र सरकार ने अपने हिस्से के 6,715 करोड़ 83 लाख रुपये आवंटित कर दिए हैं। वहीं, बिहार सरकार ने भी इसमें 40 फीसदी की हिस्सेदारी निभाते हुए अपने कोटे से 4,477 करोड़ 22 लाख रुपये का प्रावधान कर दिया है।

ए, बी, सी श्रेणियों में बंटेंगे गांव

हर गांव की समस्या एक जैसी नहीं होती। किसी गांव में पानी की दिक्कत है, तो किसी में सड़क की। इसीलिए इस योजना के तहत ग्राम पंचायतों को उनकी स्थानीय जरूरतों, संसाधनों और विकास के इंडेक्स के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है… ‘ए’, ‘बी’ और ‘सी’। जिस श्रेणी का गांव होगा, वहां उसी हिसाब से विकास कार्य तय किए जाएंगे। मकसद साफ है कि साल 2047 के ‘विकसित भारत’ के सपने में गांवों की हिस्सेदारी सिर्फ कागजी न रहे।

हरियाली से खुशहाली का रास्ता

इस मौके पर मंत्री श्रवण कुमार ने राज्य की एक और बड़ी कामयाबी का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ‘जल जीवन हरियाली मिशन’ के तहत बिहार में अब तक 20 करोड़ से ज्यादा पौधे गाड़े जा चुके हैं। इसका असर यह हुआ कि जो बिहार कभी सिर्फ 9 फीसदी ग्रीन कवर पर सिमटा था, वह आज बढ़कर 16 फीसदी हो चुका है। इस साल भी सवा करोड़ पौधे लगाने का टारगेट है, ताकि जल्द से जल्द 33 फीसदी के जादुई आंकड़े को छुआ जा सके।

मजदूरों के कंधे पर राष्ट्र निर्माण का जिम्मा

कार्यक्रम के आखिर में ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने सबका आभार जताते हुए एक बड़ी बात कही। उन्होंने कहा, “इस नई योजना में सिर्फ और सिर्फ विकास की परिकल्पना है और इसमें पारदर्शिता को सबसे ऊपर रखा गया है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि देश और राज्य के निर्माण में अब हमारे मजदूर भाई सबसे बड़े भागीदार बनेंगे।

इसे भी पढ़ें : बिहार के इस रेल मंडल की कई ट्रेनें रद्द, कई के बदले रूट

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