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Patna : बिहार के सीएम सम्राट चौधरी ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब सरकारी अस्पतालों से मरीजों को बिना किसी ठोस कारण के बड़े अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों में रेफर नहीं किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि आगामी 15 अगस्त 2026 से अनुमंडलीय और जिला अस्पतालों में यह नई व्यवस्था सख्ती से लागू हो जाएगी। गुरुवार को पटना के ‘संकल्प’ सभागार में स्वास्थ्य विभाग की एक हाई लेवल मीटिंग के दौरान सीएम सम्राट ने ये निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को पारदर्शी, असरदार और जनता के प्रति संवेदनशील बनाना सरकार की प्राथमिकता है।
बेवजह रेफर करने के खेल पर लगेगा अंकुश
सीएम सम्राट चौधरी ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिला और अनुमंडल अस्पतालों से मरीजों को सीधे मेडिकल कॉलेज भेजने की आदत पर रोक लगाई जाए। इसके लिए एक प्रभावी नीति बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त से इस व्यवस्था को लागू कर दिया जाए ताकि मरीजों को अपने ही जिले में सही इलाज मिल सके और बड़े अस्पतालों पर बेवजह का दबाव कम हो।

बड़े अधिकारियों को रात में करना होगा अस्पतालों का दौरा
अस्पतालों की हकीकत जानने के लिए अब बड़े अधिकारियों को खुद जमीन पर उतरना होगा। सीएम सम्राट चौधरी ने आदेश दिया है कि प्रमंडलीय आयुक्त, डीएम और अन्य सीनियर अफसर नियमित रूप से सरकारी अस्पतालों का रात के समय औचक निरीक्षण करेंगे। इससे रात के वक्त मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और डॉक्टरों की मौजूदगी की सही जानकारी मिल सकेगी।
जांच सुविधाओं और ट्रॉमा सेंटरों का होगा विस्तार
मरीजों को आधुनिक इलाज देने के लिए अस्पतालों में सुविधाओं को और बेहतर किया जाएगा। सीएम सम्राट ने पैथोलॉजी सेवाओं के साथ-साथ एनेस्थीसिया, एमआरआई और मैमोग्राफी जैसी आधुनिक जांच सुविधाओं को बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, सड़क हादसों और गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए हड्डी रोग और न्यूरो से जुड़े इलाज हेतु ट्रॉमा सेंटरों को मजबूत और पूरी तरह एक्टिव करने पर खास ध्यान दिया जाएगा।

आयुष्मान कार्ड और आभा आईडी बनाने में आएगी तेजी
गरीबों को मुफ्त इलाज का लाभ समय पर मिले, इसके लिए मुख्यमंत्री ने आयुष्मान भारत योजना की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आयुष्मान कार्ड और आभा (ABHA) आईडी बनाने के काम में तेजी लाई जाए, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति इस सुविधा से वंचित न रहे।
अस्पतालों में लगेंगे डिजिटल बोर्ड, डीएम करेंगे निगरानी
अब मरीजों को अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। सभी सरकारी अस्पतालों में डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे, जिन पर इमरजेंसी सेवाओं और एम्बुलेंस की उपलब्धता जैसी जरूरी जानकारियां दिखेंगी। इसके अलावा, मेडिकल कॉलेजों की लगातार मॉनिटरिंग के लिए हर जिले में एक कमेटी बनेगी, जिसके अध्यक्ष वहां के डीएम होंगे। रोगी कल्याण समितियों का भी दोबारा गठन करके उन्हें सक्रिय किया जाएगा।
नर्सों को गृह जिलों में तैनात करने पर विचार
अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मियों की कमी दूर करने और व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए नर्सों की तैनाती पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्सों को यथासंभव उनके गृह जिलों (होम डिस्ट्रिक्ट) में ही तैनात करने पर विचार किया जाए, जिससे वे बेहतर ढंग से अपनी सेवाएं दे सकें। साथ ही, नए मेडिकल कॉलेजों को चलाने के लिए पीपीपी (PPP) मॉडल अपनाने की संभावनाओं पर भी काम करने को कहा गया है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में स्वास्थ्य मंत्री निशांत, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि समेत विभाग के तमाम सीनियर अधिकारी मौजूद थे।
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