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patna : ड्यूटी से 137 दिनों तक बिना किसी सूचना के अनुपस्थित रहने के कारण नौकरी से बर्खास्त किए गए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवान नवनीत कुमार यादव को पटना हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने सीआईएसएफ द्वारा जारी बर्खास्तगी के सभी आदेशों को रद्द करते हुए जवान को दो महीने के भीतर दोबारा सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि जिस अवधि में वह ड्यूटी पर नहीं थे, उस समय का वेतन उन्हें नहीं मिलेगा। उस अवधि को उनके उपलब्ध अवकाश (लीव) में समायोजित किया जाएगा।पटना हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति हरीश कुमार की एकलपीठ ने नवनीत कुमार यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों, मेडिकल रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तार से विचार किया। इसके बाद कोर्ट ने माना कि इस मामले में बर्खास्तगी का आदेश उचित नहीं था और उसे निरस्त किया जाना चाहिए।नवनीत कुमार यादव की नियुक्ति 21 मार्च 2017 को सीआईएसएफ में सिपाही के पद पर हुई थी। नियुक्ति के बाद उन्होंने 4 मई 2017 से ओडिशा के मुंडाली स्थित रीजनल ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण शुरू किया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उनकी पोस्टिंग भिलाई स्थित आरटीसी में कर दी गई।
छुट्टी खत्म हुई, लेकिन ड्यूटी पर नहीं लौटे
रिकॉर्ड के अनुसार नवनीत यादव 18 अक्टूबर से 24 अक्टूबर 2018 तक स्वीकृत अवकाश पर थे। छुट्टी पूरी होने के बाद भी वह ड्यूटी पर वापस नहीं पहुंचे। लगातार 137 दिनों तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहने पर सीआईएसएफ ने उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की। जांच में उन्हें दोषी मानते हुए विभाग ने सेवा से बर्खास्त कर दिया था।बर्खास्तगी के खिलाफ नवनीत कुमार यादव ने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अदालत को बताया कि वह गंभीर रूप से बीमार हो गए थे और इसी कारण समय पर ड्यूटी पर नहीं लौट सके। अपने दावे के समर्थन में उन्होंने दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) और एक सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल दस्तावेज भी पेश किए। उन्होंने यह भी बताया कि बीमारी के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। इसी दौरान उन्हें विभागीय जांच से जुड़ा नोटिस भी मिला था।
कोर्ट ने दिया बहाली का निर्देश
मेडिकल दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने सीआईएसएफ की बर्खास्तगी संबंधी कार्रवाई को रद्द कर दिया। अदालत ने आदेश दिया कि नवनीत कुमार यादव को दो महीने के भीतर दोबारा सेवा में बहाल किया जाए। साथ ही यह भी कहा कि अनुपस्थिति की पूरी अवधि का वेतन नहीं दिया जाएगा और उस समय को उनके उपलब्ध अवकाश में समायोजित किया जाएगा। इस फैसले के साथ नवनीत कुमार यादव की नौकरी तो बच गई, लेकिन अनुपस्थिति की अवधि का आर्थिक लाभ उन्हें नहीं मिलेगा।
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