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Ranchi : झारखंड में मैनपावर आउटसोर्सिंगकी व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। झारखंड कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रविवार को रांची के एक निजी होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एसोसिएशन ने कहा कि सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग के नाम पर जमकर धांधली और भ्रष्टाचार हो रहा है। एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद कुमार ने कहा कि झारखंड के लोकल और छोटे ठेकेदार आज अपनी ही जमीन पर उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने राज्य के आंदोलनकारी नेता स्वर्गीय गुरुजी (शिबू सोरेन) को पद्मभूषण सम्मान मिलने पर उनके परिवार को बधाई दी। साथ ही याद दिलाया कि गुरुजी के आंदोलन का असली मकसद स्थानीय लोगों को उनके अधिकार दिलाना था, लेकिन आज की व्यवस्था में छोटे ठेकेदारों को लगातार किनारे किया जा रहा है।
टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल, नियमों की अनदेखी
प्रमोद कुमार ने सीधा आरोप लगाया कि सरकारी विभागों में मैनपावर आउटसोर्सिंग के टेंडर पारदर्शी तरीके से नहीं निकाले जा रहे हैं। कुछ चुनिंदा कंपनियों और एजेंसियों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया गया है। उन्होंने कहा कि शिकायत करने के बाद भी अधिकारी कोई एक्शन नहीं लेते। विभाग GeM पोर्टल के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और अपने पसंदीदा लोगों पर सरकारी पैसा लुटा रहे हैं।
इन विभागों में गड़बड़ी का दावा
एसोसिएशन ने मुख्य रूप से तीन विभागों की टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और जांच की मांग की है।
- स्वास्थ्य विभाग : अध्यक्ष का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग प्रतिबंधित (डिबार) की गई एजेंसियों को भी काम देने से नहीं हिचक रहा है। यहां सिर्फ पैसों के बल पर मैनपावर के टेंडर बांटे जा रहे हैं।
- खाद्य आपूर्ति और शिक्षा विभाग : इन विभागों पर आरोप है कि वे अपने पसंदीदा लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए हाईकोर्ट के आदेशों की भी अनदेखी कर रहे हैं। टेंडर में ऐसी शर्तें जोड़ दी जाती हैं जिससे सिर्फ चुनिंदा एजेंसियों को ही फायदा हो।
वेतन में देरी से कर्मचारी परेशान, एक की मौत का दावा
ग्रामीण विकास विभाग का जिक्र करते हुए एसोसिएशन ने कहा कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। गिरिडीह जिले का उदाहरण देते हुए बताया गया कि विभाग में बैठे कुछ लोगों को वहां काम कर रही मौजूदा एजेंसी पसंद नहीं है। इस आपसी खींचतान का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। समय पर मानदेय न मिलने और इलाज की सही व्यवस्था न होने के कारण वहां एक कर्मचारी की जान भी चली गई।
मुख्यमंत्री आवास के सामने भूख हड़ताल की चेतावनी
प्रमोद कुमार ने बताया कि इन समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा गया था। इसके लिए 23 जून को आवेदन भी दिया गया, लेकिन अब तक कोई समय नहीं मिला है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले में दखल देने और एक उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने साफ कहा कि अगर सरकार ने इस मामले पर जल्द कोई कदम नहीं उठाया, तो झारखंड कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन चरणबद्ध तरीके से आंदोलन शुरू करेगा। जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री आवास के सामने भूख हड़ताल भी की जाएगी।
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