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Ranchi : झारखंड के चर्चित शराब घोटाला मामले में ED ने जांच की रफ्तार और तेज कर दी है। मंगलवार को कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और राज्य के पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव दूसरे समन के बाद तय समय पर रांची स्थित ED कार्यालय पहुंचे। वहां अधिकारियों ने उनसे वर्ष 2022 की नई आबकारी नीति, उससे जुड़े प्रशासनिक फैसलों और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर पूछताछ शुरू की। इससे ठीक एक दिन पहले सोमवार को उनके बेटे रोहित उरांव से भी कई घंटे तक पूछताछ हुई थी। अब जांच एजेंसी दोनों के बयानों का मिलान कर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। ED की जांच ऐसे समय में तेज हुई है, जब झारखंड शराब घोटाले को लेकर पहले से ही कई स्तरों पर जांच चल रही है। एजेंसी का मानना है कि नई आबकारी नीति के दौरान लिए गए कुछ फैसलों और उसके बाद हुए लाइसेंस आवंटन की प्रक्रिया में कई ऐसे पहलू हैं, जिनकी गहराई से जांच जरूरी है।
आबकारी नीति के फैसलों पर ED की नजर
जांच की सबसे अहम कड़ी वर्ष 2022 में लागू की गई नई आबकारी नीति है। आरोप है कि इस नीति को लागू करने के तरीके से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा और कुछ चुनिंदा शराब कारोबारियों को फायदा मिला। इस मामले में सबसे पहले झारखंड ACB ने प्राथमिकी दर्ज की थी। उसी केस को आधार बनाकर अब ED मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है।
ED का मानना है कि जब नई आबकारी नीति की फाइल वित्त विभाग के पास पहुंची थी, तब विभाग ने कई बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए फाइल वापस भेज दी थी। बाद में यही फाइल मंजूर कर दी गई। उस समय रामेश्वर उरांव वित्त मंत्री थे। ऐसे में ED यह जानना चाहती है कि वित्त विभाग की शुरुआती आपत्तियां आखिर कैसे दूर हुईं। क्या विभाग को अतिरिक्त जानकारी दी गई थी, क्या नियमों में कोई बदलाव हुआ था या फिर किसी स्तर पर फैसले की दिशा बदली गई। इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए पूर्व वित्त मंत्री से पूछताछ की जा रही है।
रोहित उरांव से भी कई घंटे पूछताछ
जांच एजेंसी की नजर सिर्फ पूर्व मंत्री तक सीमित नहीं है। उनके बेटे रोहित उरांव भी जांच के दायरे में हैं। ED को संदेह है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ की कुछ शराब कंपनियों और झारखंड के कारोबारियों के बीच समन्वय स्थापित करने में भूमिका निभाई थी। एजेंसी यह भी जांच रही है कि क्या थोक लाइसेंस दिलाने या कारोबार से जुड़े फैसलों में किसी तरह की मध्यस्थता की गई थी।
सोमवार को रोहित उरांव सुबह करीब 11 बजे ED कार्यालय पहुंचे। अधिकारियों ने उनसे बेनामी निवेश, संपत्तियों के दस्तावेज, वित्तीय लेनदेन और शराब कारोबार से जुड़े संभावित संबंधों को लेकर लंबी पूछताछ की। जांच एजेंसी ने उनसे कई दस्तावेजों के बारे में भी जानकारी मांगी।
2023 की छापेमारी से शुरू हुई थी कार्रवाई
इस मामले में ED ने पहली बड़ी कार्रवाई 23 अगस्त 2023 को की थी। उस समय राज्य के कई जिलों में एक साथ छापेमारी की गई थी। रामेश्वर उरांव और रोहित उरांव के परिसरों पर भी तलाशी ली गई थी। जांच के दौरान रोहित उरांव के ठिकाने से करीब 20 लाख रुपये नकद मिलने और शराब कारोबार से जुड़े कुछ कारोबारी दस्तावेज बरामद होने की जानकारी सामने आई थी। इन दस्तावेजों की जांच अभी भी एजेंसी के पास लंबित है और उसी आधार पर आगे की पूछताछ की जा रही है।
पहले समय मांगा, फिर दूसरा समन जारी हुआ
ED ने जून 2026 के अंतिम सप्ताह में दोनों को पहला समन जारी किया था। रामेश्वर उरांव और रोहित उरांव ने जरूरी दस्तावेज तैयार करने और त्योहारों की छुट्टियों का हवाला देते हुए तीन सप्ताह का समय मांगा था। हालांकि ED ने इतनी लंबी मोहलत देने से इनकार कर दिया और सिर्फ एक सप्ताह का समय देते हुए दूसरा समन जारी कर दिया। दूसरे समन के मुताबिक रोहित उरांव छह जुलाई को और रामेश्वर उरांव सात जुलाई को ED कार्यालय में पेश हुए।
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