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Patna : बिहार के किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। अब राज्य में सूर्यमुखी की खेती और मधुमक्खी पालन को एक साथ बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों की आमदनी दोगुनी हो सके। बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने पटना में इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य तेल और तिलहन मिशन के तहत यह नई पहल शुरू की गई है, जिसके काफी अच्छे नतीजे सामने आ रहे हैं। इस योजना का मकसद किसानों की कमाई बढ़ाना, गांवों में रोजगार के नए मौके देना और खाद्य तेल के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाना है।
एक पंथ दो काज : सूर्यमुखी और मधुमक्खी का अनूठा तालमेल
कृषि मंत्री ने समझाया कि गर्मी के मौसम में अक्सर फूल कम हो जाते हैं, जिससे मधुमक्खियों के लिए भोजन का संकट खड़ा हो जाता है। ऐसे समय में सूर्यमुखी की फसल मधुमक्खियों के लिए वरदान साबित होती है। सूर्यमुखी के फूलों से मधुमक्खियों को भरपूर मात्रा में रस और पराग मिलता है, जिससे उनकी कॉलोनियां सुरक्षित रहती हैं और बढ़िया क्वालिटी का शहद बनता है।
दूसरी तरफ, मधुमक्खियों के आने से सूर्यमुखी की फसल को भी बड़ा फायदा होता है। मधुमक्खियां जब फूलों पर बैठती हैं, तो इससे प्राकृतिक परागण (पॉलिनेशन) होता है। इसकी वजह से सूर्यमुखी के पौधों में दानों का भराव बहुत अच्छा होता है, बीजों की क्वालिटी सुधरती है और कुल पैदावार में भारी बढ़ोतरी होती है। यानी इस मॉडल से किसान और मधुमक्खी पालक, दोनों को एक साथ मुनाफा हो रहा है।
गांवों में ही लगेगा तेल मिल, बचेंगे ट्रांसपोर्ट के पैसे
सरकार सिर्फ खेती बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दे रही है, बल्कि फसल की कटाई के बाद उसकी प्रोसेसिंग और पैकेजिंग पर भी पूरा जोर है। विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि इस योजना के तहत राज्य में नई तेल मिलें लगाने और पुरानी मिलों को आधुनिक बनाने के लिए सरकार की तरफ से मदद दी जा रही है। इससे बड़ा फायदा यह होगा कि किसानों को अपनी फसल बेचने या तेल निकलवाने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। वे अपने इलाके में ही प्रोसेसिंग करा सकेंगे, जिससे गाड़ियों का भाड़ा बचेगा। इसके साथ ही गांवों के लोगों को शुद्ध तेल खाने को मिलेगा और स्थानीय स्तर पर युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
बिहार के इन जिलों में शुरू हुआ काम
इस खास मॉडल को अभी प्रयोग के तौर पर कुछ चुनिंदा जगहों पर लागू किया गया है। कृषि मंत्री के मुताबिक, बांका जिले के धोरैया प्रखंड, शिवहर जिले के पिपराही प्रखंड और सारण जिले में 25-25 एकड़ के बड़े खेतों के समूह (क्लस्टर) बनाकर सूर्यमुखी की खेती और मधुमक्खी पालन का काम साथ में शुरू किया गया है। इन जगहों से मिल रहे बढ़िया नतीजों को देखते हुए सरकार आने वाले समय में इसे राज्य के बाकी जिलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी।
कृषि मंत्री ने बिहार के सभी किसानों से अपील की है कि वे पारंपरिक खेती से थोड़ा आगे बढ़ें और इस आधुनिक मॉडल को अपनाएं। उन्होंने कहा कि “उत्पादन से प्रसंस्करण तक” का यह तरीका बिहार की कृषि को ज्यादा मुनाफेदार और टिकाऊ बनाएगा, जिससे आत्मनिर्भर बिहार का सपना सच हो सकेगा।
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