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Home » नदियों के उफान से पहले सरकार अलर्ट, सचिव ने दिया 10 दिन का अल्टीमेटम
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नदियों के उफान से पहले सरकार अलर्ट, सचिव ने दिया 10 दिन का अल्टीमेटम

July 8, 2026No Comments4 Mins Read
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Patna : बिहार में मानसून के रफ्तार पकड़ते ही बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। नदियों का जलस्तर बढ़ने से पहले सरकार अलर्ट मोड पर आ गई है। बाढ़ के नुकसान को कम करने और गांवों को नदी में विलीन होने से बचाने के लिए जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह खुद कमान संभाले हुए हैं। बुधवार को सचिव ने सारण और वैशाली जिलों का तूफानी दौरा किया। उन्होंने गंगा नदी के किनारे चल रहे सुरक्षा कामों को देखा और लापरवाही बरतने वाले अफसरों को सख्त लहजे में चेतावनी दी।

सारण में अफसरों को अल्टीमेटम, ’10 दिन में काम पूरा करो, वरना खैर नहीं’

सचिव सबसे पहले सारण जिले के सोनपुर प्रखंड के सबलपुर पछियारी टोला पहुंचे। यहां गंगा नदी तेजी से कटाव कर रही है, जिससे आसपास के गांवों पर खतरा मंडरा रहा है। मौके पर चल रहे काम की धीमी रफ्तार देखकर सचिव ने नाराजगी जताई। उन्होंने इंजीनियरों को साफ अल्टीमेटम दिया कि नदी के किनारे पत्थरों की सुरक्षा दीवार (बोल्डर एप्रोन) बनाने का काम हर हाल में अगले 10 दिनों के भीतर पूरा हो जाना चाहिए। साथ ही, ढलान को मजबूत करने (बोल्डर पिचिंग) का बाकी काम भी इसी महीने (जुलाई) के अंत तक हर हाल में खत्म करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पानी बढ़ने पर मिट्टी न बहे।

वैशाली में राहत की खबर, गनियारी गांव और नेशनल हाईवे सुरक्षित

सारण के बाद सचिव का काफिला वैशाली जिले के सहदेई बुजुर्ग प्रखंड के गनियारी गांव पहुंचा। गनियारी गांव और इसके पास से गुजरने वाले NH-122B को बचाने के लिए यहां युद्धस्तर पर बोल्डर एप्रोन और स्लोप पिचिंग का काम चल रहा है। यहां की प्रोग्रेस देखकर सचिव संतुष्ट नजर आए। अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि यहां काम आखिरी चरण में है और अगले एक हफ्ते के भीतर पूरा काम समेट लिया जाएगा।

2025 में इन 5 जगहों ने छुड़ाए थे पसीने, इस बार पहले से तैयारी

पिछले साल यानी 2025 की बाढ़ में राज्य के 5 इलाके ‘अतिआक्रामक’ (सबसे ज्यादा खतरनाक) श्रेणी में थे, जहां नदी ने भयंकर तबाही मचाई थी। विभाग ने इस बार इन जगहों पर खास फोकस किया है…

  1. सारण का हैजलपुर गांव (मकेर) : गंडक नदी के किनारे बसे इस गांव को बचाने का काम पूरा हो चुका है।
  2. भागलपुर का इस्माइलपुर–बिंदटोली तटबंध : गंगा नदी के किनारे का यह बांध सबसे संवेदनशील है।
  3. भोजपुर का जवईनियाँ गांव (शाहपुर) : यहां भी काम तेजी से चल रहा है।
  4. वैशाली का गनियारी गांव : काम आखिरी चरण में है।
  5. सारण का सबलपुर पछियारी टोला : यहां काम तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि वे खुद इन सभी पांचों जगहों का दौरा कर चुके हैं और पल-पल की रिपोर्ट ले रहे हैं ताकि पिछले साल जैसी स्थिति दोबारा न बने।

नदियों को बांधने के लिए ₹1115 करोड़ का बजट, 381 जगहों पर काम जारी

बिहार को डूबने से बचाने के लिए इस साल जल संसाधन विभाग ने पूरी ताकत झोंक दी है। साल 2026 की बाढ़ से निपटने के लिए गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला बलान, कोशी, महानंदा और गंगा नदी बेसिन में कुल 381 संवेदनशील जगहों को चिन्हित किया गया है। इन सभी जगहों पर कटाव रोकने के लिए सरकार 1115.08 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। कोशिश यही है कि पानी का दबाव बढ़ने पर भी बांध सुरक्षित रहें।

आखिर बिहार में ही क्यों आती है इतनी तबाही?

  • 73.06% हिस्सा बाढ़ प्रभावित : बिहार का कुल क्षेत्रफल 94.16 लाख हेक्टेयर है, जिसमें से 68.80 लाख हेक्टेयर इलाका ऐसा है जहां कभी भी बाढ़ आ सकती है।
  • 38 में से 29 जिले खतरे में : बिहार के 29 जिलों के लोग हर साल बाढ़ के डर के साए में जीते हैं।
  • पड़ोसी देश और राज्य बनते हैं वजह : बिहार में बाढ़ आने का सबसे बड़ा कारण यह है कि यहां बहने वाली ज्यादातर बड़ी नदियां इंटरनेशनल बॉर्डर (जैसे नेपाल) या दूसरे राज्यों (जैसे मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश) से होकर बिहार में आती हैं। वहां भारी बारिश होते ही बिहार के मैदानी इलाकों में तबाही मच जाती है।

इसे भी पढ़ें : बिहार में एक्सप्रेसवे और फोरलेन की राह होगी आसान, सचिव ने दिए यूटिलिटी शिफ्टिंग के कड़े निर्देश

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