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Sheohar : बिहार में बागमती नदी हर साल हजारों लोगों के लिए परेशानी लेकर आती है। खासकर शिवहर जिला बाढ़ की सबसे ज्यादा मार झेलता है। बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ते ही गांवों में पानी घुस जाता है। खेत डूब जाते हैं, फसलें बर्बाद हो जाती हैं और लोगों को सुरक्षित जगहों पर शरण लेनी पड़ती है। कई परिवारों को हर साल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। लंबे समय से लोग ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे थे, जिससे बाढ़ पर स्थायी रूप से नियंत्रण पाया जा सके।इसी जरूरत को देखते हुए बागमती नदी पर शिवहर के बेलवा में डैम बनाया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य अब लगभग पूरा हो चुका है। इसके साथ ही बागमती नदी की पुरानी धारा की उड़ाही और लिंक चैनल बनाने का काम भी पूरा कर लिया गया है। इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2020 में तत्कालीन जिलाधिकारी के कार्यकाल में हुई थी। अब यह परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।7 जुलाई 2026 को पहली बार बागमती नदी का पानी उसकी पुरानी धारा में छोड़ा गया। यह पल शिवहर के लोगों के लिए काफी खास रहा। बेलवा डैम के जरिए करीब 50 हजार क्यूसेक पानी को बूढ़ी गंडक नदी की ओर प्रवाहित किया गया। इस ट्रायल का मकसद यह देखना है कि पानी का बहाव नियंत्रित तरीके से हो रहा है या नहीं और पूरी व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है।
कैसे कम होगी बाढ़ की समस्या
डैम का फाटक पूरी तरह चालू होने के बाद बागमती नदी का अतिरिक्त पानी नियंत्रित तरीके से पुरानी धारा में छोड़ा जाएगा। इससे नदी में अचानक आने वाले तेज बहाव को कम करने में मदद मिलेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे बाढ़ की तीव्रता घटेगी और नदी किनारे होने वाले कटाव पर भी काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा।परियोजना के तहत कई जगहों पर स्लुइस गेट भी बनाए जा रहे हैं। इन नियंत्रण द्वारों की मदद से जरूरत के अनुसार पानी को रोका या छोड़ा जा सकेगा। आगे चलकर बागमती के पानी को नियंत्रित रूप से बूढ़ी गंडक नदी से जोड़ने की भी योजना है।इस परियोजना का लाभ सिर्फ शिवहर तक सीमित नहीं रहेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि मुजफ्फरपुर और पूर्वी चंपारण जैसे जिलों में भी बाढ़ की समस्या कम हो सकती है। इसके अलावा किसानों को सिंचाई के लिए सालभर पानी मिलने की संभावना बढ़ेगी। अगर ऐसा हुआ तो खेती आसान होगी, फसल उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
स्थानीय लोगों को है बड़ी उम्मीद
बेलवा गांव के रहने वाले जोगी सहनी कहते हैं कि हर साल बाढ़ आने पर गांव और खेत पूरी तरह डूब जाते हैं। फसल बर्बाद हो जाती है और जब खेती के लिए पानी चाहिए होता है, तब सिंचाई की सुविधा नहीं मिल पाती। उनका कहना है कि अगर डैम पूरी तरह चालू हो गया तो किसानों को सालभर पानी मिलेगा और बाढ़ से होने वाले नुकसान में भी कमी आएगी।हालांकि उनका यह भी कहना है कि अभी सिर्फ ट्रायल शुरू हुआ है। लोग इस इंतजार में हैं कि परियोजना पूरी तरह कब शुरू होगी। उनका कहना है कि अगर मानसून के दौरान सभी काम समय पर पूरे नहीं हुए तो इस साल भी बाढ़ का खतरा बना रह सकता है। इसलिए सरकार और प्रशासन को जल्द से जल्द बाकी काम पूरा करना चाहिए।
सफल संचालन ही तय करेगा भविष्य
जल संसाधन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़ी परियोजना की सफलता केवल उसके निर्माण से तय नहीं होती। उसका सही संचालन और नियमित रखरखाव भी उतना ही जरूरी है। यदि बेलवा डैम योजना पूरी तरह सफल रहती है तो यह बिहार में बाढ़ प्रबंधन का एक प्रभावी मॉडल बन सकती है। इससे भविष्य में राज्य के दूसरे बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए भी ऐसी योजनाओं का रास्ता खुल सकता है।
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