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Home » जिस फैक्ट्री में रोज रोटी कमाने जाता था, वहीं से शुरू हुआ मौत का सफर… अब सवालों के घेरे में प्रबंधन
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जिस फैक्ट्री में रोज रोटी कमाने जाता था, वहीं से शुरू हुआ मौत का सफर… अब सवालों के घेरे में प्रबंधन

July 10, 2026No Comments4 Mins Read
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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : हर रोज की तरह उस दिन भी गोपी करमाली सुबह घर से काम पर निकले थे। परिवार को उम्मीद थी कि शाम को लौटेंगे, साथ बैठकर खाना खाएंगे और अगले दिन फिर ड्यूटी पर चले जाएंगे। लेकिन किसे पता था कि उसी दिन उनकी जिंदगी का आखिरी सफर शुरू हो चुका है। हेसला स्थित झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड में काम करने वाले गोपी करमाली की इलाज के दौरान हुई मौत ने सिर्फ एक परिवार का सहारा नहीं छीना, बल्कि औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले हजारों मजदूरों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर किसी कर्मचारी की तबीयत ड्यूटी के दौरान बिगड़ जाए, तो क्या उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाना फैक्ट्री की जिम्मेदारी नहीं है?

परिजनों का आरोप है कि गोपी की तबीयत फैक्ट्री में ही बिगड़ी थी, लेकिन उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय घर भेज दिया गया। बाद में हालत बिगड़ने पर उन्हें रांची के रिम्स ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

पेट में उठा तेज दर्द, लेकिन अस्पताल की जगह घर भेज दिए गए

परिवार के मुताबिक, गोपी करमाली अपनी ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान उनके पेट में अचानक तेज दर्द शुरू हो गया। दर्द इतना ज्यादा था कि वह ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे। परिजनों का आरोप है कि उस समय फैक्ट्री प्रबंधन ने न तो एंबुलेंस की व्यवस्था की और न ही उन्हें किसी अस्पताल में भर्ती कराया। उन्हें घर भेज दिया गया। घर पहुंचने के बाद उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। जब परिवार ने स्थिति गंभीर देखी तो उन्हें तुरंत इलाज के लिए रांची के रिम्स ले जाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

एक परिवार का सहारा छिन गया

गोपी करमाली सिर्फ एक मजदूर नहीं थे। वह अपने परिवार की उम्मीद थे। घर की रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर बच्चों के भविष्य तक की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। अब उनकी मौत के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। घर में मातम पसरा है। परिजनों की आंखों में आंसू हैं और मन में एक ही सवाल कि अगर समय रहते इलाज मिल जाता तो क्या गोपी आज जिंदा होते?

परिजनों का आरोप, समय पर इलाज मिलता तो बच सकती थी जान

गोपी के परिवार का कहना है कि बीमारी या हादसे की स्थिति में हर बड़ी फैक्ट्री में तत्काल चिकित्सा सुविधा और एंबुलेंस उपलब्ध होनी चाहिए। उनका आरोप है कि यदि प्रबंधन ने जिम्मेदारी निभाई होती और उन्हें तुरंत किसी अच्छे अस्पताल में भर्ती कराया होता तो शायद उनकी जान बच सकती थी। इसी वजह से परिवार अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी देने की मांग कर रहा है।

80 हजार रुपये देकर मामला शांत कराने की चर्चा

घटना के बाद इलाके में यह चर्चा भी फैल गई कि फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से करीब 80 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देकर मामले को शांत करने की कोशिश की गई। हालांकि इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से इस संबंध में कोई बयान जारी किया गया है।

पुराना बॉयलर हादसा फिर लोगों को आया याद

गोपी करमाली की मौत के बाद स्थानीय लोगों को कुछ महीने पहले हुआ बॉयलर हादसा भी याद आने लगा है। उस हादसे में भी कई मजदूरों की जान चली गई थी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने लोगों के मन में यह सवाल और गहरा कर दिया है कि आखिर फैक्ट्री में सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी मजबूत है। स्थानीय लोगों का कहना है कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों में सिर्फ मशीनों की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वहां काम करने वाले इंसानों की जान की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।

अब जांच की मांग तेज

घटना के बाद श्रमिकों और स्थानीय लोगों ने श्रम विभाग, फैक्ट्री निरीक्षण विभाग और जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक मजदूर की मौत का मामला नहीं है, बल्कि यह जानने का भी विषय है कि फैक्ट्री में मेडिकल इमरजेंसी से निपटने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

लोगों का कहना है कि अगर जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। साथ ही फैक्ट्री की स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था की भी व्यापक समीक्षा की जाए, ताकि भविष्य में किसी दूसरे परिवार को ऐसा दर्द न झेलना पड़े।

खबर लिखे जाने तक गोपी करमाली की मौत को लेकर लगाए गए आरोपों पर झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

इसे भी पढ़ें : हिमांशु सिंह मर्डर केस में बड़ा मोड़, मुख्य आरोपी राहुल दुबे ने किया सरेंडर

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