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Patna : बिहार के नये विधायकों के लिए शनिवार का दिन किसी स्कूल के पहले दिन जैसा रहा। मौका था बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) में आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम का। सीधे शब्दों में कहें तो नए माननीयों के लिए विधानसभा के नियम-कायदे सीखने की एक खास पाठशाला लगाई गई है, जिसका शनिवार को शानदार आगाज हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर की। इस खास मौके पर राजनीति और प्रशासन जगत के कई और दिग्गज भी मौजूद रहे।
पहली बार वाले विधायकों के लिए खास क्लास, पुरानी कमियां होंगी दूर
इस बार के चुनाव में कई ऐसे चेहरे जीतकर आए हैं, जो पहली बार विधानसभा की चौखट लांघ रहे हैं। वहीं, कुछ ऐसे भी पुराने विधायक हैं जिन्हें इस बार सरकार में नई और बड़ी जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। उद्घाटन सत्र के दौरान सीनियर नेताओं और वक्ताओं ने साफ कहा कि अगर विधानसभा में अपनी बात को दमदार तरीके से रखना है, तो केवल जोश से काम नहीं चलेगा, बल्कि सदन के नियमों की पूरी जानकारी होना भी बहुत जरूरी है। जब तक विधायी प्रक्रियाओं का पता नहीं होगा, तब तक जनहित के मुद्दों को मजबूती से नहीं उठाया जा सकता।
गयाजी स्थित बिपार्ड में आयोजित बिहार विधानसभा के माननीय सदस्यों के दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम का भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री @CPR_VP जी एवं बिहार के माननीय राज्यपाल के साथ संयुक्त रूप से शुभारंभ किया।
‘सक्षम विधायक, सशक्त विधानसभा’ ही समृद्ध बिहार की आधारशिला है।… pic.twitter.com/Suv0g8Bblj
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) July 11, 2026
एक्सपर्ट्स ने सिखाया : कैसे पूछें सवाल और कैसे रखें अपनी बात
ट्रेनिंग के पहले दिन एक्सपर्ट्स ने विधायकों को विधानसभा की कार्यप्रणाली के व्यावहारिक गुर सिखाए। माननीयों को बताया गया कि वे अपने क्षेत्र की और जनता से जुड़ी समस्याओं को सदन के सामने किस तरह पेश करें। प्रश्नकाल और शून्यकाल का सही और प्रभावी इस्तेमाल कैसे करना है, ताकि सरकार से तुरंत और सटीक जवाब मिल सके। संसदीय मर्यादा यानी चर्चा या बहस के दौरान सदन की गरिमा और परंपराओं का पालन करना कितना जरूरी है। वक्ताओं ने याद दिलाया कि हंगामा करने के बजाय तथ्यों के साथ बात रखने पर जनता का काम ज्यादा आसानी से होता है।
विधायक हैं जनता और सरकार के बीच का पुल
सत्र में वक्ताओं ने बेहद पते की बात कही कि विधायक असल में जनता और सरकार के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। जनता अपनी उम्मीदों और दिक्कतों को लेकर विधायक के पास आती है। अगर विधायक को नियमों की बेहतर समझ होगी, तो वे सदन में बिना किसी हिचकिचाहट के आंकड़ों के साथ अपनी बात रख पाएंगे। इससे सदन में फालतू की बहस नहीं होगी और जनहित से जुड़े मुद्दों का फटाफट समाधान निकल सकेगा।

सीनियर नेताओं के अनुभवों से संवरेगा नए माननीयों का करियर
दो दिनों के इस पूरे कार्यक्रम को इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि नए विधायकों को अपने सीनियर और अनुभवी नेताओं के अनुभवों का सीधा फायदा मिल सके। इसमें विधानसभा की पूरी वर्किंग, नए बिल पर होने वाली चर्चाओं का हिस्सा बनने का तरीका और सवाल पूछने की बारीकियों को समझाया जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि यह ट्रेनिंग प्रोग्राम विधायकों की काम करने की क्षमता को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा। शनिवार के बाद, रविवार को भी इस कार्यक्रम का दूसरा सत्र चलेगा, जिसमें कई और संसदीय विषयों पर खुलकर चर्चा की जाएगी।
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