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Ranchi : जब हम कोयले की खदानों के बारे में सोचते हैं, तो दिमाग में सबसे पहले धूल, उड़ती राख, भारी-भरकम मशीनें और काला धुआं ही आता है। लेकिन झारखंड की धरती पर कुछ ऐसा हो रहा है जिसने इस पूरी तस्वीर को बदल कर रख दिया है। CCL यानी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के तीन बड़े प्रोजेक्ट्स… बिरसा प्रोजेक्ट, आम्रपाली ओसीपी और अशोक ओसीपी ने मूल्यांकन वर्ष 2024–25 के लिए देश की सबसे प्रतिष्ठित ‘फाइव-स्टार रेटिंग’ अपने नाम कर ली है। यह सिर्फ एक सरकारी तमगा या सर्टिफिकेट नहीं है, बल्कि यह कहानी है उस जिद की, जिसमें पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए देश को रोशन करने का संकल्प छिपा है।
जमीन पर कैसे बदला काम का तरीका
खदानों को फाइव-स्टार रेटिंग मिलना उतना ही मुश्किल है जितना किसी होटल को उसकी वर्ल्ड-क्लास सुविधाओं के लिए 5-स्टार मिलना। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए सीसीएल ने अपनी कार्यशैली को पूरी तरह बदल दिया। आमतौर पर माइनिंग में सबसे बड़ी चिंता पर्यावरण की होती है। लेकिन बिरसा, आम्रपाली और अशोक प्रोजेक्ट्स में इस बात का खास ख्याल रखा गया कि कोयला निकालने के साथ-साथ हरियाली भी बची रहे। धूल को दबाने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया, पानी को रीसाइकिल किया गया और खदान के आस-पास के इलाकों को हरा-भरा बनाने के लिए बड़े पैमाने पर पौधे लगाए गए। इसके अलावा, मशीनों को इस तरह चलाया गया कि कम से कम ईंधन में ज्यादा से ज्यादा काम हो सके।

पसीने और टीमवर्क की असली कहानी
इस कामयाबी के पीछे एयरकंडीशनर कमरों में बैठे अफसरों की फाइलें ही नहीं, बल्कि जमीन पर 50 डिग्री की धूप और हाड़ कंपाने वाली ठंड में काम करने वाले मजदूरों का पसीना भी शामिल है। मैनेजमेंट से लेकर खदान में डंपर चलाने वाले ऑपरेटर और सुरक्षा में तैनात गार्ड तक, हर किसी ने इस मिशन को अपना मानकर काम किया। जब यह खबर आई, तो पूरी टीम में जश्न का माहौल था। हर कोई एक-दूसरे को बधाई दे रहा था क्योंकि सब जानते थे कि यह जीत किसी एक की नहीं, बल्कि ‘टीम सीसीएल’ के सामूहिक जज्बे की जीत है।
भविष्य की माइनिंग का नया रास्ता
आज जब पूरी दुनिया क्लाइमेट चेंज और पर्यावरण को लेकर फिक्रमंद है, ऐसे में सीसीएल के इन तीन प्रोजेक्ट्स ने देश के सामने एक मिसाल पेश की है। इन्होंने साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो और तकनीक सही, तो देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कोयला भी निकाला जा सकता है और धरती मां को सुरक्षित भी रखा जा सकता है। यह फाइव-स्टार रेटिंग सीसीएल के लिए एक नई शुरुआत है, जो आने वाले दिनों में देश के दूसरे माइनिंग प्रोजेक्ट्स को भी एक नया और बेहतर रास्ता दिखाएगी।
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