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Home » इंटर-स्टेट क्राइम पर सर्जिकल स्ट्राइक : चार राज्यों के पुलिस मुखिया संग DGP तदाशा मिश्र ने बनाया मास्टरप्लान
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इंटर-स्टेट क्राइम पर सर्जिकल स्ट्राइक : चार राज्यों के पुलिस मुखिया संग DGP तदाशा मिश्र ने बनाया मास्टरप्लान

July 21, 2026No Comments4 Mins Read
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Ranchi : झारखंड और उसके चार पड़ोसी राज्यों की सीमा पार पनप रहे अपराध, नक्सलवाद और साइबर गैंग्स पर नकेल कसने के लिए पुलिस ने आर-पार की तैयारी कर ली है। मंगलवार को रांची स्थित पुलिस मुख्यालय के सभागार में ERPCC-2026 यानी पूर्वी क्षेत्रीय परिषद समन्वय समिति की बेहद अहम और हाई-लेवल मीटिंग हुई। झारखंड की DGP तदाशा मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के डीजीपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीधे जुड़े। इस मैराथन बैठक में अंतरराज्यीय अपराधों, नक्सलियों के दोबारा संगठित होने के खतरों, ड्रग्स नेटवर्क, साइबर ठगी, रेलवे सुरक्षा और ‘जीरो एफआईआर’ की व्यावहारिक दिक्कतों पर पॉइंट-टू-पॉइंट रणनीति तैयार की गई।

बॉर्डर पार भागे तो खैर नहीं, नक्सलियों के खिलाफ बनेगा ‘जॉइंट ग्रिड’

बैठक की शुरुआत में DGP तदाशा मिश्र ने बॉर्डर इलाकों की ग्राउंड रिपोर्ट और मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों को टेबल पर रखा। उन्होंने साफ कहा कि झारखंड का बॉर्डर चार-चार राज्यों से सटता है। नक्सली अक्सर एक राज्य में वारदात को अंजाम देकर दूसरे राज्य की सीमा में छिपने की चाल चलते हैं। इस गेम-प्लांट को ध्वस्त करने के लिए पांचों राज्यों के डीजीपी ने ‘जॉइंट ऑपरेशन’ चलाने पर मुहर लगाई। तय हुआ कि बॉर्डर इलाकों में सिर्फ खानापूर्ति वाली गश्त नहीं होगी, बल्कि रियल-टाइम इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर जॉइंट एक्शन लिया जाएगा। अगर एक राज्य की पुलिस किसी नक्सली का पीछा कर रही है, तो सीमा पार करते ही दूसरे राज्य की पुलिस तुरंत बैकअप फोर्स तैयार रखेगी।

ड्रग्स नेटवर्क पर चौतरफा हमला, जॉइंट नाकेबंदी और बैकवर्ड-फॉरवर्ड लिंकिंग

नशे के कारोबार को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए भी सख्त फैसले लिए गए। अंतरराज्यीय सीमाओं पर सिर्फ एक राज्य की पुलिस की तैनाती के बजाय दोनों राज्यों की पुलिस मिलकर ‘जॉइंट चेकपोस्ट’ बनाएगी। सिर्फ नशे का सामान बरामद करने और कूरियर को जेल भेजने तक मामला नहीं रुकेगा। पुलिस अब उस पूरे नेटवर्क की ‘बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकिंग’ खंगालेगी। यानी माल कहां से पैदा हुआ या सप्लाई हुआ और किस शहर की किस गली तक पहुंचने वाला था, दोनों सिरों को ध्वस्त किया जाएगा। NCORD पोर्टल का इस्तेमाल करके सिंथेटिक ड्रग्स बेचने वाले सिंडिकेट को टारगेट लिस्ट में रखा गया है।

साइबर अपराधियों की शामत… तैयार होगा कॉमन डेटाबेस

साइबर ठगों के मॉडस ऑपरेंडी पर रोक लगाने के लिए राज्यों के बीच डेटा का तालमेल तुरंत प्रभाव से शुरू करने की बात कही गई। फर्जी सिम बेचने वाले दुकानदारों और किराए के बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) के जरिए करोड़ों ऐंठने वाले गिरोहों पर नकेल कसने के लिए ये ठोस फैसले हुए। पांचों राज्यों की पुलिस साइबर अपराधियों की एक जॉइंट लिस्ट तैयार करेगी, जिससे किसी भी आरोपी का क्रिमिनल रिकॉर्ड तुरंत स्क्रीन पर आ जाएगा। हर राज्य में एक डेडिकेटेड नोडल अधिकारी नामित होगा। फर्जी सिम कार्ड बांटने वाले वेंडरों का जॉइंट वेरिफिकेशन किया जाएगा और सत्यापन रिपोर्ट तय सीमा में शेयर की जाएगी।

जीरो FIR की व्यावहारिक खामियों पर प्रहार

बैठक में ‘जीरो एफआईआर’ के अमलीजामे की समीक्षा की गई। पुलिस अफसरों ने माना कि CCTNS और Cri&MAC पोर्टल के तकनीकी मिसमैच के कारण एक राज्य से दूसरे राज्य में केस ट्रांसफर करने में वक्त लगता है। सके अलावा ऑनलाइन ट्रैकिंग में आ रही रुकावटों और कोर्ट में ओरिजिनल एप्लीकेशन तथा दस्तखत भेजने की कागजी प्रक्रियाओं के सरलीकरण की जरूरत महसूस की गई। इन तकनीकी और कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए राज्यों ने मिलकर केंद्र सरकार और संबंधित केंद्रीय एजेंसियों को कंक्रीट ड्राफ्ट और सुझाव भेजने पर अपनी सहमति जताई।

बैठक में मौजूद रहे आला अधिकारी

रांची मुख्यालय में हुई इस बैठक में रणनीति तय करने के दौरान DGP तदाशा मिश्र के अलावा सीआईडी आईजी असीम विक्रांत मिंज, अभियान आईजी नरेन्द्र कुमार सिंह, जैप डीआईजी कार्तिक एस, स्पेशल ब्रांच के डीआईजी नौशाद आलम, स्पेशल ब्रांच एसपी हरविंदर सिंह, अभियान एसपी दीपक कुमार शर्मा और स्पेशल ब्रांच एसपी सौरव भी मौजूद रहे।

इसे भी पढ़ें : जांच में देरी नहीं चलेगी, संयुक्त सचिव और डीजीपी की हाईलेवल मीटिंग में बड़ा फैसला… जानें

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