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Ranchi : राजधानी रांची के पुलिस मुख्यालय में शुक्रवार को माहौल सामान्य बैठकों जैसा नहीं था। एजेंडा साफ था और संदेश भी। नए आपराधिक कानून लागू हो चुके हैं, अब उन्हें जमीन पर उतारने की बारी है। बैठक की संयुक्त अध्यक्षता झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्र और गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव (आंतरिक सुरक्षा-11) निष्ठा तिवारी ने की। यह सिर्फ समीक्षा बैठक नहीं थी, बल्कि आने वाले समय की पुलिसिंग की दिशा तय करने वाली चर्चा थी।
नए कानून, नई जिम्मेदारी
देश में हाल ही में लागू हुए भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 को लेकर विस्तार से बात हुई। अधिकारियों को साफ कहा गया कि अब हर केस की जांच तय समय सीमा में पूरी करनी होगी। लंबित मामलों को तेजी से निपटाना होगा। नए कानूनों का मकसद सिर्फ धाराएं बदलना नहीं है, बल्कि पूरी जांच प्रक्रिया को तेज और जवाबदेह बनाना है। बैठक में यह भी महसूस किया गया कि थाना स्तर पर इन कानूनों की सही समझ बेहद जरूरी है। अगर जमीनी स्तर पर जानकारी अधूरी रही तो कानून का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
डिजिटल दौर में साक्ष्य की नई चुनौती
आज अपराध का चेहरा बदल चुका है। मोबाइल, सोशल मीडिया, ऑनलाइन लेनदेन और सीसीटीवी फुटेज जांच का अहम हिस्सा बन चुके हैं। इसी वजह से बैठक में ई-साक्ष्य ऐप को लेकर लंबी चर्चा हुई। जिलों से जो फीडबैक मिला, उसमें तकनीकी दिक्कतों और प्रशिक्षण की जरूरत की बात सामने आई। इस पर निष्ठा तिवारी ने स्पष्ट कहा कि डिजिटल साक्ष्य के बिना अब मजबूत केस बनाना मुश्किल है। इसलिए तकनीकी खामियों को तुरंत दूर किया जाए और जरूरत पड़ने पर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली जाए। जांच में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और सबूतों को सुरक्षित रखने पर खास जोर दिया गया। साफ संकेत था कि अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ना होगा।

साइबर से लेकर ड्रग्स तक, हर मोर्चे की समीक्षा
बैठक में साइबर क्राइम, आतंकवाद निरोध, ड्रग कंट्रोल, आपदा प्रबंधन, पुलिस आधुनिकीकरण और विदेशी नागरिकों की वैधता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने माना कि अपराधियों के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। साइबर ठगी और ऑनलाइन फ्रॉड जैसे मामलों में तकनीकी दक्षता बेहद जरूरी है। पुलिस को लगातार अपडेट रहना होगा। ड्रग्स के खिलाफ सख्ती, संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई और आपदा के समय बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया।
तालमेल ही सफलता की कुंजी
बैठक में सीडीटीआई चंडीगढ़ के उप-प्रधानाचार्य डॉ. शाहिल अरोड़ा, एसआईबी रांची के संयुक्त निदेशक, डायरेक्टोरेट ऑफ प्रोसिक्युशन के निदेशक और स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह साफ हुआ कि केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि अभियोजन, फॉरेंसिक और अन्य विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। जब तक सभी एजेंसियां एक साथ और एक दिशा में काम नहीं करेंगी, तब तक नए कानूनों का असर पूरी तरह नहीं दिखेगा।
साफ संकेत, अब बहाने नहीं चलेंगे
बैठक का निष्कर्ष सीधा था। जांच में देरी अब स्वीकार नहीं की जाएगी। हर केस में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग होगा। ई-साक्ष्य ऐप को प्रभावी तरीके से लागू करना होगा। रांची से जो संदेश निकला, वह साफ है। पुलिसिंग अब पुराने ढर्रे पर नहीं चलेगी। जवाबदेही बढ़ेगी, समय सीमा तय होगी और तकनीक जांच की धुरी बनेगी।
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