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Pawan Thakur, Ranchi
रांची के टाटीसिलवे की उस भीड़भाड़ वाली सड़क पर गाड़ियां अपनी रफ्तार से गुजर रही थीं, लेकिन किनारे खड़े 12 साल के एक बच्चे के लिए वक़्त जैसे ठहर सा गया था। आंखों में आंसू, चेहरे पर खौफ और ज़ुबान पर सिर्फ एक ही आस… ‘मुझे मेरी मां के पास जाना है।’
पश्चिम बंगाल के वर्धमान का रहने वाला यह मासूम महज दो दिन पहले तक अपने घर में सुरक्षित था। लेकिन कुछ शातिर मानव तस्करों ने उसे पैसों और सुनहरे भविष्य का झांसा दिया, बहलाया-फुसलाया और चुपके से रांची ले आए। किस्मत अच्छी थी कि तस्कर अपनी साज़िश में कामयाब होते, उससे पहले ही यह निडर बच्चा किसी तरह उनके चंगुल से छूटकर भाग निकला।
सड़क पर बिलखते इस बच्चे पर जब ‘अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन’ के कार्यकर्ता पप्पू कुमार की नज़र पड़ी, तो उन्होंने बिना देर किए उसे अपनी हिफाजत में लिया। हौले से सहलाकर जब पूछा, तो बच्चे ने डरते-डरते अपनी पूरी आपबीती सुना दी।
एक फोन कॉल और रांची दौड़ी चली आई मां
बच्चे के मिलते ही संगठन के कार्यकर्ताओं ने तुरंत वर्धमान में उसके परिवार की तलाश शुरू की। जैसे ही मां मधु देवी को पता चला कि उनका कलेजे का टुकड़ा रांची में सुरक्षित है, उनकी सूनी दुनिया में मानो दोबारा सांसें लौट आईं। वे बिना एक पल गंवाए रांची के लिए रवाना हो गईं।
उधर, संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रितेश कुमार ने इस पूरे मामले की जानकारी रांची के DLSA यानी जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव राकेश रौशन को दी। खबर मिलते ही डालसा दफ्तर में हलचल तेज़ हो गई। CWC यानी चाइल्ड हेल्पलाइन और बाल कल्याण समिति को तुरंत एक्टिव किया गया ताकि बच्चे को कानूनी सुरक्षा दी जा सके।
जब छलके खुशी के आंसू
डालसा सचिव राकेश रौशन के दफ्तर में जब मां और बेटे का सामना हुआ, तो वहां मौजूद हर शख्स का दिल भर आया। दो दिन के खौफनाक मंजर के बाद जब बच्चे ने अपनी मां की गोद में सिर रखा, तो मां की आंखों से झरझर लोर झड़ने लगे। यह सिर्फ एक बच्चे का मिलना नहीं था, बल्कि तस्करों के मुंह से एक मासूम जिंदगी को छीन लाने की जीत थी।
डालसा सचिव राकेश रौशन, चाइल्ड हेल्पलाइन के सुपरवाइजर मुकेश कुमार और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में बाल कल्याण समिति ने कागजी औपचारिकताएं पूरी की और बच्चे को उसकी मां के हाथों में सौंप दिया।
समाज से अपील- एक कॉल बचा सकती है किसी का बचपन
इस भावुक पल के बाद डालसा सचिव राकेश रौशन ने समाज से एक बहुत ही अहम अपील की। उन्होंने कहा… “अगर आपको अपने आसपास कोई भी ऐसा बच्चा दिखे जो अकेला, डरा हुआ या मुसीबत में लग रहा हो, तो उसे नज़रअंदाज़ न करें। आपकी एक सतर्कता किसी मासूम को दलदल में गिरने से बचा सकती है।” उन्होंने आगे बताया कि अगर किसी भी व्यक्ति को मुफ्त कानूनी सहायता चाहिए या किसी मुसीबत में फंसे इंसान की मदद करनी हो, तो वे बेझिझक रांची DLSA के दफ्तर में आवेदन दे सकते हैं या टोल फ्री नंबर 15100 पर संपर्क कर सकते हैं।
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