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New Delhi : केरल के चर्चित श्रीनिवासन हत्याकांड में NIA यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी को बड़ी कामयाबी मिली है। चार साल से फरार चल रहा और सऊदी अरब में छिपा पीएफआई का पूर्व जिला अध्यक्ष मुहम्मदअली केपी आखिरकार एनआईए के हत्थे चढ़ गया। गुरुवार को जैसे ही वह रियाद से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा, पहले से मौजूद NIA की टीम ने उसे हिरासत में ले लिया। एनआईए के मुताबिक, मुहम्मदअली केपी प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का पलक्कड़ जिला अध्यक्ष रह चुका है। जांच एजेंसी लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी। उसकी गिरफ्तारी पर 3 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।
हत्या की साजिश में अहम भूमिका निभाने का आरोप
NIA का कहना है कि मुहम्मदअली केपी सिर्फ फरार आरोपी ही नहीं था, बल्कि श्रीनिवासन की हत्या की पूरी साजिश में उसकी अहम भूमिका थी। जांच में सामने आया है कि 16 अप्रैल 2022 को हत्या को अंजाम देने वाले हमलावरों को उसने शरण भी दी थी और उनकी मदद की थी। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए जा चुके हैं।
इंटरपोल तक पहुंचा था मामला
मुहम्मदअली केपी की गिरफ्तारी के लिए एनआईए ने सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रयास किए थे। एजेंसी ने उसकी गिरफ्तारी पर इनाम घोषित करने के साथ इंटरपोल से रेड नोटिस भी जारी कराया था। इसके बाद से उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। भारत लौटते ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इस गिरफ्तारी के बाद श्रीनिवासन हत्याकांड में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 67 हो गई है। एनआईए का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और इससे जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।
जांच में पीएफआई की कार्यप्रणाली को लेकर बड़े दावे
एनआईए की जांच के अनुसार, श्रीनिवासन की हत्या पीएफआई के कैडरों ने की थी। एजेंसी का दावा है कि संगठन भारत में वर्ष 2047 तक इस्लामी शासन स्थापित करने की कथित साजिश के तहत काम कर रहा था और इसी मकसद से अलग-अलग विंग बनाकर गतिविधियां चला रहा था। जांच में यह भी दावा किया गया है कि पीई विंग के जरिए शारीरिक शिक्षा और योग प्रशिक्षण की आड़ में हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती थी। वहीं रिपोर्टर्स विंग संभावित लक्ष्यों की जानकारी जुटाता था, जबकि सर्विस टीम कथित तौर पर हमलों को अंजाम देने का काम करती थी।
सितंबर 2022 में NIA ने दर्ज किया था केस
NIA ने इस मामले में सितंबर 2022 में केस दर्ज किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पीएफआई अपने दफ्तरों, कैंपस और अन्य ठिकानों का इस्तेमाल हिंसक उग्रवाद और जिहादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कर रहा था। फिलहाल एनआईए पूरे मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। एजेंसी का मानना है कि इस गिरफ्तारी से हत्याकांड और उससे जुड़े नेटवर्क के बारे में कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।
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