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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : किसी कारखाने या भारी उद्योग के बारे में सोचते ही आमतौर पर हमारे दिमाग में भारी-भरकम मशीनें, तेज आवाजें और दिन-रात पसीना बहाते मजदूर कौंध जाते हैं। लेकिन झारखंड के रामगढ़ में स्थित बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड (BFCL) के गलियारों में इन दिनों एक अलग ही तरह की बयार बह रही है। यहाँ जंग सिर्फ लोहे की ढलाई की नहीं, बल्कि सोच को और बेहतर बनाने की है। कंपनी के ‘बिजनेस एक्सीलेंस’ विभाग ने हाल ही में एक ऐसे जश्न का आयोजन किया, जहाँ हीरो कोई बड़ी मशीन या भारी बजट नहीं, बल्कि कर्मचारियों के दिमाग से निकले छोटे-छोटे स्मार्ट आइडियाज थे।
HASP हॉल में जमा हुआ हुनर का मेला
यह शानदार मौका ‘काइज़ेन उपहार वितरण समारोह’ का था। कंपनी के HASP प्रशिक्षण हॉल में जैसे ही दीप प्रज्वलित हुआ, पूरा माहौल एक अलग ही ऊर्जा से भर गया। मंच पर एक तरफ प्रबंधन के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे, तो दूसरी तरफ सामने कुर्सियों पर बैठे थे वे जांबाज़ कर्मचारी, जिन्होंने अपने रोजमर्रा के काम में कुछ नया और आसान करने की हिम्मत दिखाई। जब विजेताओं के नामों की घोषणा हुई और उन्हें मंच पर बुलाकर खास उपहार सौंपे गए, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह सिर्फ एक इनाम नहीं था, बल्कि किसी कर्मचारी की महीनों की सोच और मेहनत पर मिलने वाली वो थपकी थी, जो उन्हें और बेहतर करने की प्रेरणा देती है।

कागज का टुकड़ा नहीं, बदलाव का मंत्र है काइजेन
अक्सर कंपनियों में सुझाव पेटी धूल फांकती नजर आती हैं, लेकिन BFCL में कहानी बिल्कुल जुदा है। समारोह में बोलते हुए प्रबंधन के अधिकारियों ने एक बेहद पते की बात कही कि काइज़ेन सिर्फ एक बॉक्स में सुझाव का पर्चा डालने या औपचारिकता पूरी करने का नाम नहीं है। यह तो हमारे काम करने की संस्कृति है। जब एक कर्मचारी सोचता है कि मैं अपने काम को और सुरक्षित और आसान कैसे बना सकता हूँ, वहीं से एक बड़े बदलाव की शुरुआत होती है।
आखिर क्या है यह जापानी काइजेन का जादू?
बहुत से लोग सोचते हैं कि कंपनी को बेहतर बनाने के लिए लाखों-करोड़ों का बजट चाहिए होता है, लेकिन जापानी तकनीक काइज़ेन इस सोच को सीधे नकारती है। काइज़ेन का सीधा अर्थ है अच्छे के लिए निरंतर बदलाव। इसमें बिना किसी भारी-भरकम खर्च के, अपने रोज के काम में छोटे-छोटे समझदारी भरे बदलाव किए जाते हैं। इससे दुर्घटनाओं के खतरे को शून्य पर लाने में मदद मिलती है, समय और सामग्री की बर्बादी रुकती है, और कम मेहनत में बेहतर तथा तेज उत्पादन हासिल होता है।
एक नई मिसाल, एक नया संकल्प
समारोह के ढलते सूरज के साथ कार्यक्रम तो संपन्न हो गया, लेकिन कर्मचारियों के दिलों में एक नई उमंग छोड़ गया। जाते-जाते प्रबंधन ने सभी विभागों से यही अपील की कि विचारों का यह सिलसिला रुकना नहीं चाहिए। BFCL ने यह साबित कर दिया है कि जब हर हाथ को काम के साथ-साथ सोचने की आजादी और सम्मान मिलता है, तो सफलता की नई इबारत अपने आप लिख जाती है।
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