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Ranchi : रात के सन्नाटे में जब पूरा रांची शहर चैन की नींद सो रहा होता था, तब सड़कों पर दौड़ती एक चमचमाती बलेनो कार खामोशी से किसी सुनसान इलाके में रुकती थी। कार से उतरते थे कुछ लोग, हाथों में कटर, प्लास और औजार। निशाना… ऊंचे-ऊंचे मोबाइल टावर!
घंटों का काम मिनटों में। टावरों से गायब हो जाती थीं लाखों रुपये की आरएम मशीनें, भारी-भरकम बैटरियां और कीमती कॉपर केबल। और फिर… कार हवा में गायब!
महीनों तक चले इस ‘हाई-टेक खेल’ ने नेटवर्क कंपनियों की नींद उड़ा दी थी। आखिरकार रांची पुलिस की स्पेशल टीम ने इस शातिर गिरोह का पर्दाफाश कर ही दिया। जब गिरोह का मास्टरमाइंड पकड़ा गया, तो पुलिस भी दंग रह गई।
जब जाल में फंसा ‘अंदर का आदमी’
रांची के रूरल एसपी गौरव गोस्वामी के अनुसार कहानी की शुरुआत होती है इसी साल अप्रैल के महीने से। चान्हों इलाके के सिलागाई, फुलडीह और पतरातु गांवों में एक के बाद एक मोबाइल टावर में चोरी की बड़ी वारदातें हुईं। लाखों का सामान गायब था और चोरी का तरीका इतना सफाई भरा था कि किसी आम चोर का काम यह लग ही नहीं रहा था। बड़ाहुटार निवासी अभिमन्यु साहू ने जब चान्हों थाने में केस दर्ज कराया, तो पुलिस महकमे में हलचल मच गई।
रांची के एसएसपी राकेश रंजन के कड़े निर्देश पर रूरल एसपी गौरव गोस्वामी की देखरेख में एक स्पेशल टास्क फोर्स बनी। कमान सौंपी गई खलारी डीएसपी रामनारायण चौधरी और मांडर इंस्पेक्टर जय प्रकाश राणा को।
पुलिस की टीम ने जब पिछले एक साल में हुए चोरी के पैटर्न को खंगाला और सर्विलांस का जाल बिछाया, तो एक मोबाइल नंबर पर जाकर शक की सुई अटक गई। पुलिस ने घेराबंदी कर तौफिक अंसारी को दबोचा। तौफिक अंसारी अनगड़ा के राजाडेरा का रहने वाला है। थाने लाकर जब तौफिक से कड़ाई से पूछताछ शुरू हुई, तो उसने जो राज उगला, वह जांच अधिकारियों को चौंका गया। तौफिक कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि जियो कंपनी का पूर्व साइट मैनेजर निकला!
उसे टावर के हर एक पुर्जे, उसकी कीमत और उसे चुराने के सबसे आसान तरीके की नस-नस मालूम थी। कंपनी छोड़ने के बाद उसने अपने इसी ज्ञान का इस्तेमाल जुर्म की दुनिया में कदम रखने के लिए किया और बना डाला अपना एक ‘टावर चोर गैंग’!
चोरी से लेकर खपाने तक का पूरा नेटवर्क
तौफिक मास्टरमाइंड था, जो प्लान बनाता था। लेकिन इस खेल में उसके साथ तीन और खिलाड़ी शामिल थे। इनके नाम अकमल अंसारी (29 वर्ष), मुबारक अंसारी (26 वर्ष) और गौरी कुमार (27 वर्ष) बताये गये। रांची के पिस्का नगरी का रहने वाला अकमल अंसारी पुराना शातिर अपराधी है। मुबारक अंसारी रांची के पुंदाग के ईलाही नगर में रहता है। वहीं, मूल रूप से बिहार के सीतामढ़ी का गौरी कुमार फिलहाल रांची के कांके में अपना कबाड़ी दुकान चला रहा है।
तौफिक अपने साथियों को गाइड करता था कि कौन सा सामान सबसे महंगा है और उसे कैसे निकालना है। चोरी के बाद सारा माल बलेनो कार में लादकर सीधा कांके रिंग रोड पर गौरी कबाड़ी की दुकान तक पहुँचाया जाता था, जहाँ गौरी इस चोरी के माल को कौड़ियों के भाव खरीदकर खपा देता था।
बरामदगी देख पुलिस भी चौंकी
जब पुलिस ने गिरोह के ठिकानों पर छापेमारी की, तो भारी मात्रा में चोरी का सामान बरामद हुआ:
- लक्जरी बलेनो कार (JH01EL-4898) — जिससे वारदात को अंजाम दिया जाता था।
- 3 स्मार्टफोन (वीवो कंपनी)
- 75 फीट लंबा केबल और 20 किलो खुली केबल
- 3 पीस आरएम (RM) मशीनें (टावर का सबसे महंगा और संवेदनशील उपकरण)
- 1 टावर बैटरी चार्जर और 5 पीस हैवी बैटरियां
एक गिरफ्तारी और 33 चोरियों का सनसनीखेज खुलासा
इस गिरोह के पकड़े जाने से सिर्फ चान्हों ही नहीं, बल्कि पूरे रांची जिले के थानों की फाइलों में बंद पड़ी चोरियों का सच सामने आ गया। पूछताछ में गिरोह ने रांची जिले के अलग-अलग थानों में दर्ज कुल 33 चोरी के मामलों में अपनी संलिप्तता कुबूल की!
पिठौरिया, कांके, नगड़ी, रातू, ओरमांझी, सिकिदिरी, अनगड़ा, बुढ़मू, ठाकुरगांव, मांडर, खलारी, चान्हों, इटकी, बेड़ों, लापुंग, बुंडू और राहे… ऐसा कोई इलाका नहीं बचा था जहां इस गैंग ने हाथ न साफ किया हो।
रांची में मोबाइल टावरों से लाखों के उपकरण चुराने वाले गिरोह के 4 आरोपी गिरफ्तार। जियो का पूर्व साइट मैनेजर निकला मास्टरमाइंड, बलेनो कार जब्त। क्या बोले रूरल एसपी गौरव गोस्वामी… देखें#RanchiPolice #CrimeNews #LatestNews #JharkhandNews #TrendingNews #NewsSamvad #TodayNews pic.twitter.com/dTNDBTrDqp
— News Samvad (@newssamvaad) July 27, 2026
इन तेज तर्रार अफसरों ने किया गिरोह का खुलासा
इस बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने वाली टीम में डीएसपी रामनारायण चौधरी, इंस्पेक्टर जय प्रकाश राणा, चान्हों थानेदार टिंकु रजक, ठाकुरगांव थानेदार शुभम कुमार, मांडर थाना प्रभारी मनोज करमाली, पिठौरिया थानेदार सतीश पांडेय, अनगड़ा थाना प्रभारी गौतम कुमार रजवार, नगड़ी थानेदार अभिषेक राय और तकनीकी शाखा के बलेंद्र कुमार सिंह, देवेंद्र उरांव व बिरेंद्र कुमार सिंह की सराहनीय भूमिका रही।
फिलहाल, पुलिस ने चारों आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है और राहत की सांस ली है।
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