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Ranchi : दोपहर का वक्त था। आसमान में बादल छाए थे और बीच-बीच में बारिश भी हो रही थी। सड़क किनारे कुछ पैरामेडिकल छात्र अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। उनके हाथों में बैनर थे और चेहरे पर उम्मीद के साथ चिंता भी झलक रही थी। तभी वहां से स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी का काफिला गुजरा। आमतौर पर ऐसे काफिले निकल जाते हैं, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग थी।
मंत्री ने छात्रों को देखा तो गाड़ी रुकवा दी। बिना किसी औपचारिकता के वह सीधे छात्रों के बीच पहुंचे। कुछ पल उनकी बातें सुनीं और फिर मुस्कुराते हुए कहा, “आप लोग सड़क पर क्यों बैठे हैं? डॉक्टर, पैरामेडिकल छात्र और स्वास्थ्यकर्मी मेरे अपने लोग हैं। आइए, मेरे कार्यालय चलते हैं। वहां आराम से बैठकर आपकी हर बात सुनेंगे।”

दफ्तर में नहीं दिखी मंत्री और छात्रों के बीच दूरी
कुछ ही देर बाद मंत्री कार्यालय का माहौल बदल चुका था। जो छात्र कुछ समय पहले सड़क पर धरना दे रहे थे, वही अब मंत्री के सामने कुर्सी पर बैठकर अपनी बातें रख रहे थे। किसी तरह की जल्दबाजी नहीं थी। पहले सभी के लिए नाश्ते और भोजन की व्यवस्था कराई गई। उसके बाद एक-एक कर सभी समस्याएं सुनी गईं।
बैठक के दौरान डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग उनके लिए सिर्फ एक सरकारी विभाग नहीं, बल्कि एक परिवार है। डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, स्वास्थ्यकर्मी और छात्र, सभी उसी परिवार का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा, “मैं पहले डॉक्टर हूं और बाद में मंत्री। इसलिए जब किसी छात्र या स्वास्थ्यकर्मी को परेशानी में देखता हूं तो उसकी तकलीफ महसूस करता हूं। मैं नहीं चाहता कि स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा कोई भी व्यक्ति अपनी बात कहने के लिए सड़क पर बैठने को मजबूर हो।”
140 छात्रों के छात्रावास का मुद्दा सबसे बड़ा सवाल बनकर सामने आया
बातचीत के दौरान झारखंड पैरामेडिकल स्टाफ्स एसोसिएशन ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, जमशेदपुर में पढ़ रहे करीब 140 नए पैरामेडिकल प्रशिक्षु छात्रों के लिए छात्रावास की व्यवस्था का मुद्दा उठाया। छात्रों ने बताया कि रहने की सुविधा नहीं होने से उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
मंत्री ने ज्ञापन हाथ में लिया और उसी समय अधिकारियों की ओर देखा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस मामले को लंबा नहीं खींचा जाएगा। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि एक सप्ताह के भीतर छात्रावास की व्यवस्था को लेकर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट तैयार कर उनके सामने रखी जाए।
इतना ही नहीं, मंत्री ने मौके पर ही एमजीएम मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक से फोन पर बात की। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों पर विस्तृत प्रस्ताव तुरंत विभाग को भेजा जाए ताकि जल्द फैसला लिया जा सके।

प्रमुख सचिव को भी मिला साफ संदेश- समाधान चाहिए, सिर्फ आश्वासन नहीं
डॉ. इरफान अंसारी ने स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव अजय कुमार सिंह को भी निर्देश दिया कि पैरामेडिकल छात्रों की मांगों पर जल्द बैठक बुलाई जाए। उन्होंने कहा कि केवल फाइलें आगे बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। ऐसा समाधान निकाला जाए जिससे छात्रों को भविष्य में बार-बार अपनी मांगों के लिए आंदोलन न करना पड़े।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य शिक्षा को मजबूत बनाने के साथ-साथ प्रशिक्षु छात्रों को बेहतर माहौल देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पैरामेडिकल छात्र स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूत नींव हैं। अगर उनके प्रशिक्षण और रहने की सुविधाएं बेहतर होंगी तो इसका सीधा फायदा मरीजों और पूरे स्वास्थ्य तंत्र को मिलेगा।
छात्र बोले- आज लगा हमारी बात सुनने वाला कोई है
बैठक खत्म होने के बाद छात्रों के चेहरे पहले से अलग नजर आए। जो निराशा लेकर वे सड़क पर बैठे थे, उसकी जगह अब उम्मीद दिखाई दे रही थी। छात्रों ने कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के बारे में बहुत कुछ सुना था, लेकिन पहली बार उनसे मिलकर महसूस हुआ कि वह सिर्फ बातें नहीं करते, बल्कि लोगों की समस्याएं सुनने के लिए समय भी निकालते हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री ने सम्मान के साथ बैठाया, भोजन कराया और बिना किसी जल्दबाजी के हर मांग सुनी।
छात्रों का कहना था कि अगर सरकार इसी तरह संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान करती रही तो स्वास्थ्य व्यवस्था और मजबूत होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि छात्रावास समेत उनकी दूसरी मांगों पर भी जल्द सकारात्मक फैसला होगा।
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