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New Delhi/Ranchi : झारखंड में मानव तस्करी के कई मामलों में मोस्ट वांटेड महिला तस्कर आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गई। तीन साल से फरार चल रही आरोपी को शनिवार सुबह दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी से पहले पुलिस और जांच एजेंसियों ने लगातार कई दिनों तक उसके ठिकानों की रेकी की। इस ऑपरेशन के दौरान एक दूसरी कार्रवाई में खूंटी जिले की मानव तस्करी की शिकार एक नाबालिग को भी तस्करों के चंगुल से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
कई बार दिल्ली पहुंची पुलिस, इस बार बिछाया ऐसा जाल कि बच नहीं पाई
चाईबासा में वर्ष 2023 से आरोपी महिला के खिलाफ मानव तस्करी के कई मामले दर्ज हैं। अदालत ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी कर रखा था। चाईबासा पुलिस पहले भी कई बार दिल्ली पहुंची, लेकिन हर बार आरोपी पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार हो जाती थी। इस बार महिला एवं बाल विकास विभाग के एकीकृत पुनर्वास सह संसाधन केंद्र, झारखंड भवन, नई दिल्ली ने पूरी रणनीति तैयार की। चाईबासा पुलिस, दिल्ली पुलिस और एक स्थानीय एनजीओ की टीम ने पिछले दो-तीन दिनों तक लगातार संदिग्ध ठिकानों की निगरानी की। शनिवार सुबह करीब छह बजे टीम ने दबिश दी और आरोपी को उसके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से चाईबासा पुलिस को चार दिन की रिमांड मिल गई। अब उससे पूछताछ कर पूरे मानव तस्करी नेटवर्क की कड़ियां खंगाली जा रही हैं।

दूसरे तस्कर के घर से मिली खूंटी की नाबालिग, तुरंत कराया मेडिकल
इसी ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने एक अन्य मानव तस्कर को भी गिरफ्तार किया। उसके घर की तलाशी में खूंटी जिले की एक नाबालिग बालिका मिली, जिसे मानव तस्करी का शिकार बनाया गया था। दिल्ली के सुभाष प्लेस थाना क्षेत्र से उसे सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। रेस्क्यू के तुरंत बाद बालिका का मेडिकल कराया गया। फिलहाल उसे सुरक्षित गृह में रखा गया है। अब उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जाएगा। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे सुरक्षित तरीके से उसके गृह जिले भेजा जाएगा।
सरकार का साफ संदेश, तस्करों को नहीं मिलेगी कोई राहत
महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने कहा कि मानव तस्करी के मामलों में सरकार की नीति पूरी तरह जीरो टॉलरेंस की है। किसी भी जिले से ऐसी सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई होगी। जरूरत पड़ने पर जिला समाज कल्याण पदाधिकारी और जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी की संयुक्त टीम दूसरे राज्यों में भेजी जाएगी, ताकि फंसे हुए बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित वापस लाया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ रेस्क्यू तक सीमित नहीं रहती। पीड़ितों का पुनर्वास कराया जाता है, उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाता है और लगातार निगरानी भी रखी जाती है ताकि वे दोबारा तस्करों के जाल में न फंसें।
महिला एवं बाल विकास विभाग के मुताबिक अब तक झारखंड के सैकड़ों बच्चों और महिलाओं को देश के अलग-अलग राज्यों से सुरक्षित रेस्क्यू कर उनका पुनर्वास कराया जा चुका है। नई दिल्ली स्थित झारखंड भवन का एकीकृत पुनर्वास सह संसाधन केंद्र इस पूरी प्रक्रिया में लगातार अहम भूमिका निभा रहा है। शनिवार का यह ऑपरेशन भी झारखंड भवन के स्थानिक आयुक्त अरवा राजकमल के निर्देशन में सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
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