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Home » ओमान के दलदल में फंसी सिमडेगा की प्रीति के लिए मसीहा बने सीएम हेमंत… जानें कैसे
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ओमान के दलदल में फंसी सिमडेगा की प्रीति के लिए मसीहा बने सीएम हेमंत… जानें कैसे

August 1, 2026No Comments4 Mins Read
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Ranchi : जब राज्य का मुखिया संवेदनशीलता और जवाबदेही की मिसाल पेश करता है, तो हजारों मील दूर किसी बेगाने मुल्क में भी अपने नागरिक सुरक्षित महसूस करते हैं। ओमान में प्रताड़ना और अनिश्चितता का सामना कर रही सिमडेगा की आदिवासी बेटी प्रीति कुजूर की सुरक्षित वापसी इसी संवेदनशील नेतृत्व का जीता-जागता उदाहरण है। सीएम हेमंत सोरेन की व्यक्तिगत रुचि, त्वरित फैसले और संवेदनशील सोच की बदौलत ही ओमान के उस मुश्किल दलदल से प्रीति अपने घर सुरक्षित वापस आ सकी हैं। आज यानी एक अगस्त को मस्कट से भारत के लिए उड़ान भरने के बाद प्रीति दो अगस्त को झारखंड में अपने गांव पहुंच रही हैं।

45 हजार की कमाई का झांसा और एक गरीब परिवार का संघर्ष

सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड स्थित छोटे से गांव मरारोमा गंझूटोली में रहने वाले प्रीति के परिवार की माली हालत बहुत बढ़िया महीं थी। घर की तंगी दूर करने और अपनों को बेहतर जिंदगी देने का सपना लेकर प्रीति ने आगे बढ़ने की सोची। मार्च 2026 में जब एक स्थानीय एजेंट ने उसे दुबई में घरेलू कामकाज के बदले हर महीने 45 हजार से 50 हजार रुपये कमाने का लालच दिया, तो परिवार को लगा कि शायद अब उनके दिन बदल जाएंगे। लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी। एजेंट ने छल-कपट का जाल बुनकर उसे दुबई की जगह ओमान भेज दिया। वहां पहुंचते ही उससे पासपोर्ट और फोन छीन लिए गए। ₹45,000 की जगह सिर्फ ₹23,000 से ₹25,000 देकर उससे मनमाना काम कराया जाने लगा। जब प्रीति ने विरोध किया, तो मालिक ने घर लौटने के बदले मोटी रकम की डिमांड कर दी। गांव में रहने वाले भाई रंतु कुजूर और बूढ़े मां-बाप ने जैसे-तैसे दूसरों से मांगकर ₹1.92 लाख भेजे, लेकिन निर्दयी मालिक का दिल फिर भी नहीं पसीजा और उसने प्रीति के सारे असली कागजात जब्त कर लिए।

जब सीएम हेमंत सोरेन बने संकटमोचक

जब ओमान की धरती पर प्रीति के सारे रास्ते बंद हो चुके थे, तब उसने किसी तरह एक भावुक वीडियो संदेश बनाकर राज्य सरकार और मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई। यह वीडियो सामने आते ही सीएम हेमंत सोरेन ने इसे सिर्फ एक प्रशासनिक मामला न मानकर अपनी राज्य की बेटी की अस्मिता का सवाल माना। उन्होंने तुरंत मामले पर व्यक्तिगत संज्ञान लिया और श्रम विभाग के ‘राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष’ को निर्देश दिया कि बिना एक पल गंवाए प्रीति की सही-सलामत वापसी तय की जाए। सीएम हेमंत सोरेन के स्पष्ट और कड़े रुख का ही असर था कि 23 जून 2026 को तुरंत मामला प्रोटेक्टर ऑफ एमिग्रेंट्स (POE), रांची और मस्कट स्थित भारतीय दूतावास को भेजा गया। ठीक अगले दिन 24 जून को दूतावास ने प्रीति से संपर्क साधा और उसे भरोसा दिलाया कि झारखंड सरकार उसके साथ खड़ी है।

जुर्माना कम कराया और वापस दिलाए कागजात

कंपनी मालिक 2 साल का ठेका अधूरा छोड़ने का जुर्माना बताकर 950 ओमानी रियाल यानी 2,35,855 रुपये की मांग पर अड़ा हुआ था। एक गरीब परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम देना नामुमकिन था। सीएम हेमंत सोरेन के निर्देश पर राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष ने भारतीय दूतावास के माध्यम से नियोक्ता के साथ कड़ा और कूटनीतिक संवाद कायम किया। दूतावास ने प्रीति के परिवार की दयनीय आर्थिक हालत का हवाला दिया और उस पर इंसानियत दिखाने का दबाव बनाया। राज्य सरकार की इस निरंतर पहल का ही असर हुआ कि मालिक जुर्माना घटाकर 600 ओमानी रियाल यानी 1,48,961 रुपये करने पर राजी हो गया। जरूरी औपचारिकताएं पूरी होते ही मालिक को प्रीति का पासपोर्ट और सारे असली कागजात लौटाने पड़े।

जन-जन के संरक्षक के रूप में उभरे सीएम हेमंत सोरेन

यह पहला मौका नहीं है जब सीएम हेमंत सोरेन ने विदेशों में फंसे झारखंडी प्रवासियों के लिए अपने दरवाजे खोले हों। चाहे कोरोना काल में मजदूरों को हवाई जहाज और ट्रेनों से सुरक्षित घर लाने की बात हो या फिर खाड़ी देशों से फंसे श्रमिकों की रेस्क्यू कराने की रणनीति, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बार-बार यह साबित किया है कि उनकी सरकार में हर नागरिक की सुरक्षा सर्वोपरि है।

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