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Patna : बिहार की सियासत में जब मुद्दे खत्म होने लगते हैं, तो तीखे तीरों की जगह बेतुके बखेड़े लेने लगते हैं। इन दिनों पटना के सियासी गलियारों से लेकर सोशल मीडिया के डिजिटल अखाड़े तक एक नई जंग छिड़ी हुई है। केंद्र में हैं बिहार के सीएम सम्राट चौधरी और उनकी जेब में रहने वाली एक छोटी सी डिब्बी। राष्ट्रीय जनता दल की प्रवक्ता प्रियंका भारती ने एक्स पर मुख्यमंत्री का एक वीडियो शेयर किया। वीडियो में वे जेब से डिब्बी निकालकर मुंह में कुछ डालते दिखते हैं। राजद प्रवक्ता ने इस पर ‘खैनी, गुटखा और तंबाकू स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है’ वाली वैधानिक चेतावनी चिपकाकर यह संदेश देने की कोशिश की, मानो मुख्यमंत्री तंबाकू का सेवन कर रहे हों। लेकिन इस वीडियो की परतें जैसे ही उघड़ती हैं, राजनीति का एक ऐसा चेहरा सामने आता है जहां सच को तोड़-मरोड़कर पेश करना ही सबसे बड़ा एजेंडा बन चुका है।

जेब का राज : खैनी का चूना नहीं, गले का इलाज है वो डिब्बी
सामने से देखो तो सीएम सम्राट चौधरी का अंदाज बिल्कुल ठेठ बिहारी नेता वाला है। लंबे भाषण, लगातार बैठकों का दौर, समर्थकों की भीड़ और सुबह से देर रात तक गरजती हुई आवाज़। ऐसे में गले का साथ छोड़ देना कोई नई बात नहीं है। जो लोग मुख्यमंत्री को करीब से जानते हैं, वे इस बात के गवाह हैं कि उनकी जेब में रहने वाली वह छोटी सी डिब्बी किसी तंबाकू या गुटखा कंपनी का प्रोडक्ट नहीं है। उस डिब्बी में भरी होती है सीधी-सादी, सेहतमंद लौंग। लौंग चबाना सम्राट चौधरी की पुरानी आदत है। लगातार बोलने के कारण गले में होने वाली खराश को दूर करने और आवाज़ को साफ रखने के लिए वे अक्सर लौंग मुंह में रखते हैं। आयुर्वेद में जिस लौंग को गले का सबसे बड़ा मददगार माना गया है, विरोधियों ने उसे एक झटके में जहरीली खैनी घोषित कर दिया।
राजनीति का गिरता स्तर… मुद्दे गायब, तो लौंग पर ही वार
सवाल यह उठता है कि क्या बिहार में अब जनता से जुड़े असली मुद्दे खत्म हो गए हैं? क्या रोजगार, विकास, कानून-व्यवस्था और नीतिगत फैसलों पर बहस करने के बजाय अब यह देखा जाएगा कि मुख्यमंत्री की जेब में कौन सी डिब्बी रखी है? राजद की ओर से इस तरह का वीडियो पोस्ट करना और उस पर तंबाकू की वैधानिक चेतावनी लिखना केवल एक राजनीतिक चुटकी भर नहीं है, बल्कि यह एक नेता की छवि को जानबूझकर धूमिल करने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा दिखता है। बिना किसी पड़ताल के, बिना यह जाने कि डिब्बी के भीतर क्या है, सीधे खैनी और गुटखे का ठप्पा लगा देना दिखाता है कि आज की राजनीति में विपक्ष के पास ठोस तर्कों की कितनी कमी हो गई है।
नशामुक्ति के पैरोकार को नशाबाज साबित करने की नाकाम होड़
बिहार वह राज्य है जहां शराबबंदी का कानून लागू है और नशामुक्ति को लेकर सरकार लगातार कड़े कदम उठाती रही है। खुद सीएम सम्राट चौधरी सार्वजनिक मंचों से युवाओं को नशे से दूर रहने और एक बेहतर जीवनशैली अपनाने की सलाह देते नजर आते हैं। जो नेता खुद नशामुक्ति का झंडा उठाए खड़ा हो, उसे केवल एक 10 सेकंड के क्लिप के सहारे कटघरे में खड़ा कर देना न केवल हास्यास्पद है, बल्कि यह जनता की समझ का भी अपमान है। वायरल वीडियो को अगर कोई भी इंसान बिना पूर्वाग्रह के देखे, तो उसे साफ दिखेगा कि उसमें तंबाकू मलने या हथेली पर चूना मिलाने जैसी कोई भी प्रक्रिया नहीं हो रही है। डिब्बी खुली, लौंग मुंह में गई और बात खत्म।
सच बनाम फैलाया गया भ्रम
सोशल मीडिया के इस दौर में किसी भी वीडियो को काटकर, मरोड़कर और अपनी पसंद का कैप्शन लगाकर परोस देना बेहद आसान हो गया है। प्रियंका भारती के इस पोस्ट के बाद भले ही राजद समर्थकों ने थोड़ी देर के लिए चुटकियां ले ली हों, लेकिन सच के सामने आते ही यह पूरी कवायद उलटी पड़ती दिख रही है। सीएम सम्राट चौधरी का लौंग चबाना उनकी एक व्यक्तिगत और स्वस्थ आदत है, जो उनके गले और सेहत को बनाए रखती है। इसे खैनी का नाम देकर सियासी माइलेज हासिल करने की कोशिश ने उल्टा विरोधियों के बचकानेपन को ही बेनकाब कर दिया है। सियासत अपनी जगह चलती रहेगी, लेकिन लौंग को तंबाकू बनाने का यह खेल जनता भी बखूबी समझ चुकी है।
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