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Ranchi : झारखंड विधानसभा के चौथे कार्य दिवस की शुरुआत मंगलवार को हंगामे के साथ हुई। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही छात्रों के आंदोलन और 10 अगस्त को हुए घटनाक्रम को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। प्रश्नकाल शुरू हुआ, लेकिन कुछ ही देर में सदन नारेबाजी से गूंजने लगा। विपक्ष ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर सरकार को घेरा, जबकि सत्ता पक्ष ने भाजपा पर छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।
हंगामे के कारण प्रश्नकाल की कार्यवाही ठीक से नहीं चल सकी। दोनों पक्षों के विधायक वेल में पहुंचकर एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। स्थिति को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो ने कई बार सदस्यों से शांत रहने की अपील की। इसके बावजूद जब हंगामा नहीं थमा तो उन्होंने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
प्रदीप यादव ने उठाया 10 अगस्त की घटना का मुद्दा
प्रश्नकाल शुरू होते ही कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने 10 अगस्त को छात्रों के आंदोलन के दौरान हुई घटना का मुद्दा उठाया। उन्होंने आसन को पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि छात्रों के आंदोलन में कुछ सामाजिक तत्व घुस गए थे। उन्होंने विपक्ष पर राज्य को अराजकता की स्थिति में ले जाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
प्रदीप यादव ने सरकार से 10 अगस्त को हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी सदन में रखने की मांग की। उनके वक्तव्य के दौरान ही भाजपा विधायक विरोध में खड़े हो गए। देखते ही देखते कई भाजपा विधायक वेल में पहुंच गए और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का विरोध करने लगे।
भाजपा विधायकों ने हाथों में प्लेकार्ड लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उनका कहना था कि छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई की गई। विपक्ष ने इस मामले में जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की। भाजपा विधायकों के लगातार विरोध के कारण सदन का माहौल और गरम हो गया।
विपक्ष के बाद सत्ता पक्ष भी वेल में पहुंचा
भाजपा विधायकों के विरोध के जवाब में सत्ता पक्ष के विधायक भी वेल में पहुंच गए। इसके बाद दोनों पक्षों के विधायक आमने-सामने आ गए और नारेबाजी शुरू हो गई। सत्ता पक्ष के विधायकों ने आरोप लगाया कि 10 अगस्त को छात्रों का शांतिपूर्ण आंदोलन भाजपा ने हाईजैक कर लिया था।
सत्ता पक्ष की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि छात्रों के आंदोलन को भटकाने के लिए पश्चिम बंगाल से असामाजिक तत्वों को बुलाया गया था। इस आरोप के बाद सदन में राजनीतिक टकराव और बढ़ गया। दोनों ओर से लगातार नारेबाजी होती रही और प्रश्नकाल की कार्यवाही प्रभावित होती रही।
विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो ने दोनों पक्षों के विधायकों से शांत रहने और सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि छात्रों के प्रति सभी सदस्यों में सहानुभूति है। ऐसे में सदन में हंगामा करने के बजाय मामले को शांतिपूर्वक उठाया जाना चाहिए। लेकिन हंगामा जारी रहने पर अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी।
विधानसभा के बाहर का विवाद अब सदन के अंदर
छात्र आंदोलन को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब विधानसभा के अंदर भी खुलकर सामने आ गया है। एक तरफ भाजपा छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर सरकार को घेर रही है और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग कर रही है। दूसरी ओर सत्ता पक्ष भाजपा पर छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रहा है।
10 अगस्त को छात्रों के आंदोलन के दौरान हुए घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर पहले ही शुरू हो चुका था। मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही इसका असर सदन के भीतर भी दिखाई दिया। प्रश्नकाल के दौरान हुए हंगामे ने यह साफ कर दिया कि आने वाले दिनों में छात्र आंदोलन का मुद्दा विधानसभा में भी जोरदार तरीके से उठ सकता है।
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