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Koderma (Aftab Alam) : अक्सर सरकारी महकमों की ऊंची सीढ़ियां, चमचमाते केबिन और भारी-भरकम दरवाजे आम फरियादी के हौसलों को तोड़ देते हैं। किसी बड़े अफसर से मिलने की आस में लोग घंटों बाहर इंतजार करते हैं, लेकिन जब कोई खाकी वर्दीधारी अपनी कुर्सी का गुरूर छोड़कर खुद किसी बेबस के पास आ खड़ा हो, तो वह सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि इंसानियत की मिसाल बन जाता है। कुछ ऐसा ही भावुक और दिल को छू लेने वाला मंजर कोडरमा एसपी के दफ्तर में देखने को मिला, जहां पुलिस की सख्त छवि के पीछे छिपी एक बेहद संवेदनशील संवेदना खुलकर सामने आई।
लाचारी और सीढ़ियों का फासला, जब एक आस लेकर पहुंचीं पारो
जयनगर थाना क्षेत्र की रहने वाली पारो कुमारी के लिए जिंदगी की राहें वैसे ही आसान नहीं थीं। शारीरिक रूप से असमर्थ पारो चलने-फिरने से लाचार हैं, लेकिन जमीन के एक पुराने विवाद ने उनकी रातों की नींद हराम कर रखी थी। जब हर तरफ से मायूसी हाथ लगी, तो वे अपनी जमीन को बचाने की आखिरी उम्मीद लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचीं। एसपी दफ्तर की सीढ़ियों को देखकर उनकी सांसें फूलने लगीं, क्योंकि शारीरिक लाचारी के कारण ऊपर केबिन तक पहुंचना उनके लिए नामुमकिन जैसा था। वे थकी-हारी आंखों में उम्मीद का दीया जलाए नीचे ही रुक गईं।
जब कुर्सी का दायरा तोड़कर बाहर निकल आए पुलिस कप्तान
पारो कुमारी के आने की सूचना जैसे ही कोडरमा के एसपी कुमार शिवाशीष तक पहुंची, उन्होंने एक पल का भी वक्त नहीं गंवाया। प्रोटोकॉल और केबिन की दीवारों को दरकिनार करते हुए वे खुद अपने कमरे से बाहर निकल आए। सीढ़ियों के पास एक लाचार महिला को देखकर एसपी कुमार शिवाशीष उसके पास पहुंचे और बेहद आत्मीयता के साथ उनकी समस्या सुनने लगे। अफसर को खुद अपने पास खड़ा देख पारो कुमारी स्तब्ध रह गईं। एसपी ने बड़े धैर्य से जमीन से जुड़ी उनकी पूरी आपबीती सुनी और उन्हें ढांढस बंधाया कि अब उन्हें परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
मौके पर ही दिया तुरंत मदद का फरमान
मामले की नब्ज समझते ही एसपी ने जरा भी देरी नहीं की। उन्होंने तुरंत संबंधित पुलिस अधिकारी को फोन लगाया और सख्त निर्देश दिए कि पारो कुमारी की जमीन से जुड़े मामले की निष्पक्ष जांच कर उसका तुरंत निस्तारण किया जाए। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी सूरत में फरियादी को भटकने न दिया जाए।
आंसुओं में छलका सुकून, हर जुबान पर छा गई यह सादगी
जब बातचीत पूरी हुई और जाने का वक्त आया, तो एसपी के कहने पर महिला पुलिस कर्मियों ने अत्यंत सम्मान और ममता भरे हाथ से पारो कुमारी को सहारा दिया और उन्हें सुरक्षित गाड़ी तक पहुंचाया। एक अफसर का यह आत्मीय व्यवहार और सम्मान देखकर पारो कुमारी के सब्र का बांध टूट गया और उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। वहां मौजूद आम लोग और अन्य फरियादी भी पुलिस कप्तान की इस सादगी और संवेदनशीलता को देखकर गदगद हो गए। आज पूरे जिले में कोडरमा पुलिस के इस मानवीय चेहरे की चर्चा हर जुबान पर है।
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