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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : कहते हैं कि अगर हुनर को सही वक्त पर सही मंच मिल जाए, तो वो पूरी दुनिया में अपनी चमक बिखेर सकता है। झारखंड के एक छोटे से गांव की बेटी अंजना कुमारी ने इस बात को सच कर दिखाया है। सात समंदर पार जॉर्जिया के बातुमी शहर में आयोजित हुई अंतरराष्ट्रीय वुशु चैंपियनशिप 2026 में अंजना ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने ‘डबल डैगर’ और ‘विनचुन’ जैसी मुश्किल स्पर्धाओं में दुनिया भर के धुरंधरों को पछाड़कर यह सफलता हासिल की है।
साधारण परिवार की बेटी का असाधारण सपना
झारखंड के ग्रामीण परिवेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का तिरंगा फहराना अंजना के लिए कोई आसान राह नहीं थी। संसाधनों की कमी और शुरुआती दिक्कतों के बावजूद उनके मन में कुछ कर गुजरने की तड़प हमेशा बनी रही। घर-परिवार ने अपनी सीमित क्षमताओं के बावजूद अंजना के सपनों को कभी दबने नहीं दिया, वहीं उनके प्रशिक्षकों ने दिन-रात पसीना बहाकर उनकी प्रतिभा को तराशा।
कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी की पेश की मिसाल
किसी भी प्रतिभावान खिलाड़ी के लिए सिर्फ लगन ही काफी नहीं होती, कई बार आर्थिक तंगी और बेहतर सुविधाओं का अभाव रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा बन जाता है। यहीं पर बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड (बीएफसीएल) ने एक सच्चे मददगार की भूमिका निभाई। बीएफसीएल केवल उद्योग चलाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने समाज और स्थानीय प्रतिभाओं के निखार के लिए भी अपने दरवाजे खोले। अंजना जैसे ग्रामीण इलाकों के होनहार खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भेजने, उनके प्रशिक्षण और जरूरी सुविधाओं का पूरा जिम्मा उठाकर बीएफसीएल ने साबित कर दिया कि सही समय पर मिला थोड़ा सा सहयोग किसी की जिंदगी बदल सकता है। बीएफसीएल का यह प्रयास राज्य में खेल संस्कृति को नया जीवन दे रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाया अपनी मेहनत का रंग
30 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक चले इस अंतरराष्ट्रीय वुशु टूर्नामेंट में दुनिया भर से आए बेहतरीन खिलाड़ियों के बीच अंजना ने अपने खेल, कड़े अनुशासन और गजब की चुस्ती का प्रदर्शन किया। जब मंच पर भारत के नाम का ऐलान हुआ और अंजना के गले में दो-दो पदक पहनाए गए, तो न सिर्फ उनका परिवार बल्कि पूरा रामगढ़ और बीएफसीएल परिवार गर्व से झूम उठा।
उभरते खिलाड़ियों के लिए नई उम्मीद बनीं अंजना
अंजना की यह ऐतिहासिक सफलता आज झारखंड के दूर-दराज गांवों में रहने वाले हजारों बच्चों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। बीएफसीएल ने अंजना को उनकी इस दोहरी जीत पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। बीएफसीएल का मानना है कि अगर झारखंड की मिट्टी में छिपे इस हुनर को इसी तरह सहारा मिलता रहा, तो आने वाले दिनों में राज्य के कई और लाल अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का नाम रोशन करेंगे।
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