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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : कहते हैं कि हुनर किसी पहचान का मोहताज नहीं होता, लेकिन जब उस हुनर को सही वक्त पर सही प्रोत्साहन और सहारा मिल जाए, तो वह राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश की शान बन जाता है। झारखंड के रामगढ़ की धरती पर आज ऐसा ही एक खूबसूरत उदाहरण देखने को मिल रहा है। युवा निशानेबाज सोनू प्रताप सिंह की हालिया कामयाबी इस बात की मिसाल है कि जब कोई दूरदर्शी संस्थान किसी प्रतिभा के पीछे खड़ा होता है, तो नतीजे स्वर्ण और रजत पदकों की चमक बनकर सामने आते हैं।
हाल ही में 29 से 31 जुलाई 2026 तक आयोजित 16वीं झारखंड राज्य शूटिंग चैंपियनशिप में सोनू प्रताप सिंह ने अपने सटीक निशाने से सबका दिल जीत लिया। 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल में स्वर्ण पदक और 10 मीटर एयर पिस्टल में रजत पदक जीतकर सोनू ने शूटिंग रेंज पर अपना दबदबा कायम किया। लेकिन इस चमकती हुई ट्रॉफी और पदकों के पीछे एक और नाम है, जो पर्दे के पीछे रहकर खिलाड़ियों की नींव मजबूत कर रहा है… BFCL यानी बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड।
सपनों को पंख देता BFCL का खेल सीएसआर मॉडल
अक्सर देखा जाता है कि छोटे शहरों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं होती, लेकिन उच्चस्तरीय ट्रेनिंग, महंगे खेल उपकरण और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के खर्च के आगे कई उभरते खिलाड़ी पीछे हट जाते हैं। बीएफसीएल ने इस चुनौती को समझा और अपने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत खेलों को बढ़ावा देने का बीड़ा उठाया।
BFCL सिर्फ एक उद्योग नहीं, बल्कि इलाके के युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक बनकर उभरा है। सोनू प्रताप सिंह जैसे होनहार एथलीट को गोद लेकर, उन्हें आधुनिक संसाधन और मानसिक संबल प्रदान करना संस्थान की दूरगामी सोच को दर्शाता है। “प्रतिभा को सहयोग, उत्कृष्टता का सम्मान” का जो संकल्प बीएफसीएल ने लिया है, वह धरातल पर पूरी निष्ठा के साथ उतरता हुआ दिख रहा है।
उद्योग और समाज के रिश्तों की नई मिसाल
सोनू की इस शानदार दोहरी सफलता के बाद बीएफसीएल प्रबंधन ने दिल खोलकर अपने इस सितारे को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। संस्थान का मानना है कि किसी स्थानीय युवा को जब सफलता के शीर्ष पर पहुंचते देखा जाता है, तो उससे पूरे इलाके के सैकड़ों बच्चों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
आज रामगढ़ के लोग न केवल सोनू प्रताप सिंह की सटीक निशानेबाजी पर गर्व कर रहे हैं, बल्कि BFCL के इस सराहनीय प्रयास की भी दिल से तारीफ कर रहे हैं। बीएफसीएल ने यह साबित कर दिया है कि अगर उद्योग जगत इसी तरह अपने सामाजिक दायित्वों को निभाते हुए खेल संस्कृति को सींचे, तो हमारे ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों से कई और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय चैंपियन निकल सकते हैं। सोनू का यह सफर तो बस शुरुआत है, बीएफसीएल के सहयोग से ऐसे कई और सपने अभी परवाज भरने को तैयार हैं।
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