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Patna : कॉलेज में मार्कशीट अटक जाए, हॉस्टल में पानी-बिजली की किल्लत हो या फिर स्कॉलरशिप की फाइल किसी टेबल पर धूल फांक रही हो, आम तौर पर छात्र पढ़ाई छोड़कर सरकारी दफ्तरों की सीढ़ियां नापने को मजबूर हो जाते हैं। कई बार शिकायत करने पर यह डर भी रहता है कि कहीं कॉलेज प्रशासन नाराज न हो जाए। बिहार के लाखों छात्र-छात्राओं की इसी रोजमर्रा की जद्दोजहद और झिझक को खत्म करने के लिए सीएम सम्राट चौधरी ने राजधानी पटना के जेडी वीमेंस कॉलेज से ‘विद्यार्थी सहयोग पोर्टल’ की शुरुआत की है। इस मौके पर उन्होंने साफ कहा कि सरकार की मंशा यह है कि किसी भी छात्र को अपनी जायज बात मनवाने के लिए किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े और उनका पूरा ध्यान सिर्फ अपनी पढ़ाई पर रहे।

घर बैठे सुनवाई और पहचान की पूरी सुरक्षा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि इस नई व्यवस्था के तहत छात्र अपनी किसी भी शैक्षणिक या बुनियादी समस्या को घर बैठे ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं। जो विद्यार्थी इंटरनेट का इस्तेमाल करने में सहज नहीं हैं, उनके लिए 1100 टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर की सुविधा भी दी गई है। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में छात्र का नाम और पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी, ताकि किसी भी युवा को अपनी बात रखने में कोई झिझक या डर न सताए। यह सेवा पूरी तरह मुफ्त है और छात्र अपनी शिकायत के साथ-साथ व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार को अपने सुझाव भी भेज सकते हैं।

तीस दिन का पक्का वादा और लापरवाह अफसरों पर लगाम
अक्सर सरकारी व्यवस्थाओं में शिकायतें फाइलों में दबकर रह जाती हैं, लेकिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पोर्टल के पीछे जवाबदेही तय करने का एक बेहद सख्त तंत्र लागू किया है। शिकायत दर्ज होने के ठीक 10 दिन के भीतर संबंधित विभाग को उस पर काम शुरू करना होगा। अगर 10 दिन तक फाइल आगे नहीं बढ़ी, तो 11वें दिन खुद मुख्यमंत्री कार्यालय से सीधे संबंधित अफसर के पास पहला नोटिस पहुंच जाएगा। इसके बाद 20वें और 25वें दिन भी चेतावनी भेजी जाएगी। हर हाल में 30 दिनों के भीतर मामले को सुलझाकर छात्र को लिखित में जवाब देना अनिवार्य कर दिया गया है। तय समय में काम न करने वाले लापरवाह कर्मचारियों और अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई की बात भी मुख्यमंत्री ने कही है।
कैंपस में सीधे संवाद और जमीनी मदद का भरोसा
सिर्फ ऑनलाइन व्यवस्था ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी छात्रों से जुड़ने की तैयारी की गई है। सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि हर महीने के चौथे मंगलवार को सभी स्कूल और कॉलेजों में ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ लगाए जाएंगे, जहां छात्र सीधे अधिकारियों के सामने बैठकर अपनी परेशानी बयां कर सकेंगे। पहले लगे ऐसे शिविरों में 6.42 लाख से अधिक समस्याएं सामने आई थीं, जिनमें से 96 प्रतिशत का समाधान मौके पर या तय वक्त में किया गया। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए 25 अगस्त से सभी स्कूलों और हॉस्टलों में एक विशेष अभियान भी शुरू होने जा रहा है, ताकि किसी दूरदराज के गांव या कस्बे में पढ़ रहे छात्र को भी यह न लगे कि उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है।

देर रात पढ़ाई में मदद और नए कॉलेजों की सौगात
पढ़ाई के दौरान अक्सर बच्चों को रात में किसी सवाल या विषय को समझने में दिक्कत आती है। इस परेशानी को समझते हुए सीएम सम्राट चौधरी ने बताया कि अब मोबाइल और लैपटॉप के जरिए देर रात तक छात्रों को लाइव शिक्षकों से पढ़ाई में मदद दिलाने की योजना पर काम शुरू हुआ है। इसके अलावा राज्य के 534 प्रखंडों और प्रमुख शहरों को जोड़कर 551 आधुनिक मॉडल स्कूल तैयार किए जा रहे हैं। उच्च शिक्षा के लिए बिहार के बच्चों को अपना घर छोड़कर दूसरे राज्यों में न भटकना पड़े, इसलिए 211 नए डिग्री कॉलेज खोले जा रहे हैं और 342 बीएड कॉलेजों में नियमित डिग्री कोर्स चलाने की मंजूरी दी गई है।
सपनों के आड़े नहीं आएगी तंगी और बेटियों को बड़ा सहारा
सीएम सम्राट चौधरी ने जोर देकर कहा कि आर्थिक तंगी की वजह से किसी भी होनहार बच्चे का सपना अधूरा नहीं रहना चाहिए। इसके लिए 10 रुपये में इंजीनियरिंग और 5 रुपये में पॉलिटेक्निक शिक्षा जैसी पहल से युवाओं को बड़ा संबल मिला है। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के जरिए लगभग 18 हजार करोड़ रुपये की मदद जमीन पर उतारी जा चुकी है। वहीं दूसरी तरफ, घर की बेटियों को स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक जोड़ने के लिए पोशाक, पोषण और पास होने पर प्रोत्साहन राशि सीधे दी जा रही है। नौकरियों में 35 प्रतिशत और स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण देकर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई गई है। इस पूरी पहल का मकसद बिहार के युवाओं के कंधों से प्रशासनिक चिंताओं का बोझ हटाकर उनके सपनों को एक नई और मजबूत उड़ान देना है।
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