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New Delhi : खेती में नई तकनीक और वैज्ञानिक शोध का फायदा अगर किसान के खेत तक नहीं पहुंचे तो उसका मतलब ही क्या है। बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मंगलवार को नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की 97वीं वार्षिक आम बैठक में इसी बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार की खेती को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रसंस्करण और बाजार से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने की जरूरत है। बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ अलग-अलग राज्यों के कृषि मंत्री भी शामिल हुए। इस दौरान किसानों की आय बढ़ाने, कृषि अनुसंधान को खेतों तक पहुंचाने, प्राकृतिक खेती, बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक और कृषि क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
कम बारिश के बावजूद 93% से ज्यादा धान की रोपनी
मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बैठक में बिहार की कृषि स्थिति को सामने रखते हुए कहा कि राज्य में इस बार कम बारिश की स्थिति रही है, इसके बावजूद 93 प्रतिशत से ज्यादा धान की रोपनी पूरी हो चुकी है। सरकार का प्रयास है कि बाकी लक्ष्य भी जल्द पूरा हो और किसानों को मौसम की मार से बचाने के लिए बेहतर तकनीक और फसल की नई किस्में उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि बिहार में एक तरफ बाढ़ तो दूसरी तरफ सुखाड़ की चुनौती रहती है। ऐसे में ऐसी फसलों की किस्मों पर शोध होना चाहिए जो कम समय में तैयार हों और मौसम में होने वाले बदलाव को सह सकें। इसके लिए कृषि वैज्ञानिकों और सरकार के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
कृषि मंत्री ने बिहार के मखाना को लेकर भी खास बात रखी। उन्होंने कहा कि मखाना बिहार की खास पहचान है और इसकी खेती को और बेहतर बनाने की काफी गुंजाइश है। मखाना की उन्नत किस्म विकसित करने, वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन बढ़ाने, मशीनों का इस्तेमाल करने, उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने और उसे दूसरे देशों के बाजार तक पहुंचाने के लिए ICAR स्तर पर विशेष शोध की जरूरत है।
नई दिल्ली में आयोजित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (ICAR) की 97वीं वार्षिक आम बैठक में माननीय केंद्रीय मंत्री श्री @ChouhanShivraj जी एवं अन्य राज्यों के माननीय कृषि मंत्रियों के साथ उपस्थित हुआ साथ ही बिहार की ओर से सहभागिता कर कृषि अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और किसानों की आय बढ़ाने… pic.twitter.com/aGCpAhgfLU
— Vijay Kumar Sinha (@VijayKrSinhaBih) August 18, 2026
छोटे किसान, महिलाएं और युवा भी नई खेती से जुड़ें
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि खेती में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन इसका फायदा सिर्फ बड़े किसानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। छोटे और सीमांत किसानों तक भी नई तकनीक पहुंचनी चाहिए। महिला किसानों और कृषि की पढ़ाई कर चुके युवाओं को भी खेती से जुड़े नए अवसरों से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कृषि की पढ़ाई करने वाले युवाओं के लिए खेती अब सिर्फ नौकरी का विकल्प नहीं, बल्कि अपना काम शुरू करने का भी जरिया बन सकती है। बिहार सरकार ऐसे युवाओं को कृषि और कृषि उद्यमिता से जुड़ी योजनाओं में प्राथमिकता देने की दिशा में काम कर रही है।
कृषि मंत्री ने बीज उत्पादन और प्राकृतिक खाद के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए विशेष अनुदान की जरूरत भी बताई। उनका कहना था कि रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को केवल सलाह देने से काम नहीं चलेगा। उन्हें प्रशिक्षण, सही तकनीक, आर्थिक मदद और अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर बाजार भी देना होगा।
फल, सब्जी, दलहन और तिलहन जैसी फसलों के उत्पादन में भी किसानों को उचित कीमत दिलाने पर जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर ऐसी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए, जिससे किसान उत्पादन के साथ-साथ अपनी उपज की अच्छी कीमत भी हासिल कर सके।
20 अगस्त से शुरू होगा जनकल्याण संवाद अभियान
कृषि मंत्री ने छोटे और सीमांत किसानों को सहकारी समितियों से जोड़ने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसान अगर संगठित होकर काम करेंगे तो उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, खेती का सामान खरीदने, उत्पादन बढ़ाने और उपज बेचने में आसानी होगी। उन्होंने ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं को भी किसानों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने की बात कही। उनका कहना था कि गांवों में खेती के साथ दूसरी आजीविका के साधन और जरूरी सुविधाएं मजबूत होंगी तो किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा।
इसी कड़ी में बिहार में ‘किसान कृषि, महिला उद्यम, युवा रोजगार एवं श्रमिक उत्थान सह जनकल्याण संवाद अभियान’ शुरू किया जा रहा है। इसका शुभारंभ 20 अगस्त को बामेती में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। अभियान के दौरान किसानों, महिलाओं, युवाओं और श्रमिकों से संवाद कर उनकी जरूरतों और समस्याओं पर बात की जाएगी। साथ ही कृषि से जुड़े रोजगार और अपना काम शुरू करने के अवसरों पर भी चर्चा होगी।
मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि कृषि को सिर्फ खेत में फसल पैदा करने तक सीमित रखने से किसानों की आमदनी को ज्यादा बढ़ाना मुश्किल होगा। खेती के साथ प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, कृषि उद्यमिता और निर्यात को जोड़ना होगा। इससे किसान अपनी उपज की बेहतर कीमत पा सकेंगे और गांवों में रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान का फायदा तभी दिखाई देगा, जब वह प्रयोगशाला से निकलकर किसान के खेत तक पहुंचे। आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज और मौसम के हिसाब से खेती की जानकारी किसान को समय पर मिले, यही सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से बिहार में कृषि क्षेत्र में तकनीकी विकास को और आगे बढ़ाया जा सकता है।
कृषि मंत्री ने कहा कि ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान’ की सोच के साथ बिहार का लक्ष्य है कि वैज्ञानिक खेती का लाभ आखिरी किसान तक पहुंचे। खेती को बेहतर उत्पादन के साथ बाजार और रोजगार से जोड़कर ही किसानों की आमदनी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
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