अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Patna : बिहार के किसानों के लिए सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। अब खेती के लिए बैंक से लिए गए ऋण पर किसानों को केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाले 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान के अलावा बिहार सरकार की तरफ से 1 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज अनुदान मिलेगा। यानी पात्र किसानों को कृषि ऋण के ब्याज में कुल 4 प्रतिशत तक की राहत मिल सकेगी। इसके लिए बुधवार को पटना के मीठापुर स्थित कृषि भवन में कृषि विभाग और NABARD के बीच समझौता हुआ।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लागू की गई इस योजना के MoU पर कृषि विभाग की ओर से कृषि निदेशक मुकेश कुमार लाल और NABARD की ओर से उप महाप्रबंधक भोला प्रसाद सिंह ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा भी मौजूद रहे। राज्य सरकार ने योजना के लिए 5 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई है। योजना को लागू करने के लिए NABARD को राज्य एजेंसी बनाया गया है।
3 लाख तक के ऋण पर मिलेगा 1% अतिरिक्त अनुदान
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि योजना के तहत वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंक से लिए गए 3 लाख रुपये तक के फसल ऋण पर 1 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज अनुदान दिया जाएगा। किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC से लिए गए ऋण और अल्पावधि कृषि उत्पादन ऋण को भी इसका लाभ मिलेगा।
अगर किसी किसान ने 3 लाख रुपये से ज्यादा का कृषि ऋण लिया है तो भी ब्याज अनुदान की गणना अधिकतम 3 लाख रुपये की ऋण राशि पर ही होगी। मसलन, किसी किसान ने 4 लाख रुपये का कृषि ऋण लिया है तो अतिरिक्त ब्याज अनुदान 4 लाख रुपये पर नहीं, बल्कि 3 लाख रुपये तक की राशि पर मिलेगा।
इस योजना का फायदा लेने के लिए किसान को तय समय के भीतर अपना ऋण चुकाना होगा। सरकार का मकसद किसानों पर ब्याज का बोझ कम करना और उन्हें बैंकों से संस्थागत कृषि ऋण लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे किसानों को खेती के मौसम में पैसे की जरूरत पूरी करने के लिए आसानी से बैंक ऋण मिलने की उम्मीद है।
बटाईदार और JLG सदस्य भी योजना में शामिल
सरकार ने इस योजना का दायरा केवल छोटे और सीमांत किसानों तक नहीं रखा है। लघु, सीमांत और अन्य सभी श्रेणी के किसान इसके पात्र होंगे। खास बात यह है कि सभी तरह की फसलों को योजना में शामिल किया गया है। पात्र कृषि ऋण लेने वाले बटाईदार, मौखिक पट्टेदार और संयुक्त देयता समूह यानी JLG के सदस्य भी इसका लाभ ले सकेंगे।
इससे उन किसानों को भी मदद मिलेगी, जो जमीन पर खेती तो करते हैं, लेकिन उनके नाम पर जमीन नहीं है। ऐसे किसान अगर योजना की पात्रता शर्तों के अनुसार कृषि ऋण लेते हैं तो उन्हें भी ब्याज अनुदान का लाभ मिल सकता है।
कृषि मंत्री ने कहा कि किसान के लिए खेती के समय पैसे की उपलब्धता बहुत जरूरी है। बीज, खाद, सिंचाई, कीटनाशी और दूसरी जरूरी चीजों पर समय से खर्च नहीं हो तो फसल प्रभावित हो सकती है। सरकार की कोशिश है कि किसानों को खेती के लिए कम ब्याज पर समय पर संस्थागत ऋण मिल सके।
ब्याज का बोझ घटेगा, खेती में निवेश बढ़ेगा
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि ब्याज में राहत मिलने से किसानों को कृषि निवेश करने में सहूलियत होगी। किसान बेहतर बीज खरीदने, खाद और कीटनाशी का इस्तेमाल करने तथा सिंचाई की व्यवस्था करने में ज्यादा आसानी महसूस करेंगे। इससे कृषि उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि सरकार की सोच साफ है कि किसान को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए उसे समय पर और आसानी से संस्थागत ऋण मिलना जरूरी है। किसान बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ेगा तो खेती के लिए जरूरी रकम की व्यवस्था करना उसके लिए आसान होगा और उसे अधिक ब्याज वाले दूसरे स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि विभाग और NABARD के बीच हुआ यह समझौता बिहार के किसानों को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का लक्ष्य है कि किसान आत्मनिर्भर बने, खेती में निवेश बढ़े और राज्य की कृषि व्यवस्था मजबूत हो। उन्होंने कहा कि ब्याज अनुदान की यह योजना किसानों को संस्थागत कृषि ऋण से जोड़ने और कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।
इसे भी पढ़ें : सीएम सम्राट ने कोसी-मेची परियोजना की परखी रफ्तार, दे गये ये हिदायत













