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Supaul : कोसी का जो पानी बाढ़ के दिनों में परेशानी खड़ी करता है, वही पानी अब सीमांचल के खेतों के लिए वरदान बनेगा। सीएम सम्राट चौधरी ने बुधवार को कहा कि कोसी के अधिशेष पानी का सही इस्तेमाल कर उसे सीमांचल के खेतों तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इससे खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी, कृषि उत्पादन में इजाफा होगा और किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोसी-मेची अंतःराज्यीय रिवर लिंक परियोजना को हर हाल में तय समय सीमा में और अच्छी गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए।
सीएम सम्राट चौधरी बुधवार को सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड के चैनपुर गांव पहुंचे थे। यहां उन्होंने निर्माणाधीन कोसी-मेची परियोजना का स्थल निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर चल रहे निर्माण कार्य को देखा और अधिकारियों से काम की प्रगति की जानकारी ली। इसके बाद कैंप कार्यालय में परियोजना की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ कहा कि काम में तेजी लाई जाए, लेकिन गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।

2.14 लाख हेक्टेयर खेतों तक पहुंचेगा पानी
कोसी-मेची परियोजना पूरी होने के बाद सीमांचल के चार जिलों के 2,14,813 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त और सुनिश्चित सिंचाई सुविधा मिलने की योजना है। अररिया में 69,642 हेक्टेयर, पूर्णिया में 69,970 हेक्टेयर, किशनगंज में 39,548 हेक्टेयर और कटिहार में 35,653 हेक्टेयर कृषि भूमि को इसका फायदा मिलेगा।
सीएम ने कहा कि परियोजना सीमांचल और पूरे बिहार के लिए महत्वपूर्ण है। सिंचाई की सुविधा बढ़ने से किसानों को खेती के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होगी। इससे फसल उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो सकती है।
इस परियोजना की अनुमानित लागत 6,282.32 करोड़ रुपए है और इसे मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के तहत बाढ़ के समय कोसी नदी में आने वाले अतिरिक्त पानी को लिंक नहर के जरिए मेची नदी तक पहुंचाया जाएगा। इससे महानंदा बेसिन में पानी की उपलब्धता बढ़ाने और कोसी के बाढ़ के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।

नहर की क्षमता 15 हजार से बढ़कर 20 हजार क्यूसेक्स होगी
परियोजना के तहत पूर्वी कोसी मुख्य नहर की पानी ले जाने की क्षमता बढ़ाई जाएगी। अभी यह क्षमता 15 हजार क्यूसेक्स है, जिसे बढ़ाकर 20 हजार क्यूसेक्स किया जाएगा। इसके साथ चार शाखा नहरें, छह वितरणियां और जरूरत के मुताबिक दूसरी नहर प्रणालियां भी बनाई जाएंगी।
परियोजना के अंतिम छोर पर करीब 950 क्यूसेक्स पानी मेची नदी में पहुंचाने की योजना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोसी के अतिरिक्त पानी को व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल करने से बाढ़ प्रबंधन के साथ सिंचाई की जरूरत भी पूरी की जा सकेगी।
सीएम ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि परियोजना के निर्माण के दौरान किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। खेतों में चल रहे कृषि कार्य प्रभावित न हों, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने परियोजना के हर काम की लगातार निगरानी करने को कहा।

कोसी-गंडक के लिए भी बनेगी लंबी योजना
सीएम सम्राट ने कोसी और गंडक नदियों को व्यवस्थित करने के लिए भी समग्र योजना तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे डैम और दूसरी जल संरचनाओं की मदद से छोटी नदियों में भी पूरे साल पर्याप्त पानी उपलब्ध रहे।
उन्होंने जल संसाधनों के संरक्षण और बेहतर इस्तेमाल के लिए लंबी अवधि की योजना पर काम करने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों में आने वाले पानी को सिर्फ बाढ़ की समस्या के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि जरूरत के मुताबिक उसका उपयोग खेती और दूसरी जरूरतों के लिए भी किया जाना चाहिए।
समीक्षा बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने परियोजना की प्रगति की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। सुपौल के जिलाधिकारी सावन कुमार ने प्रस्तुतीकरण के जरिए निर्माण कार्य की स्थिति और परियोजना से जुड़े दूसरे पहलुओं की जानकारी दी।
निरीक्षण और समीक्षा बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, विधायक नीरज कुमार बबलू, विधायक रामविलास कामत, विधायक देवंती यादव, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह, जिलाधिकारी सावन कुमार, पुलिस अधीक्षक शस्थ आर.एस. सहित अन्य अधिकारी और अभियंता मौजूद रहे।
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