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Ranchi : शाम ढलते ही जब कॉलोनियों की बत्तियां जलती हैं और बच्चे ट्यूशन या खेल के मैदान से घर लौटते हैं, तो माता-पिता की नजरें अक्सर दरवाजे पर टिकी रहती हैं। मन में एक अनजाना डर तैरता रहता है कि कहीं गली के नुक्कड़ पर बैठा आवारा कुत्तों का झुंड किसी पर झपट न पड़े। रात के सन्नाटे में दोपहिया वाहन के पीछे अचानक भागते कुत्तों से बचने के चक्कर में संतुलन खोने की घटनाएं भी रांची के लोगों के लिए नई नहीं हैं। लेकिन इसी तस्वीर का एक दूसरा और बेहद दर्दनाक पहलू भी है, जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। उसी सड़क के किनारे किसी तेज रफ्तार गाड़ी से कुचला हुआ एक लाचार कुत्ता खून से लथपथ होकर मदद की गुहार लगाता दिखता है, जो ठंड, भूख और बीमारी से तड़पते हुए दम तोड़ देता है।
इंसानों का डर और बेजुबानों की यह बेबसी लंबे समय से राजधानी रांची की गलियों में एक मूक टकराव का कारण बनी हुई थी। लोग परेशान थे और बेसहारा जानवर दर्द में जी रहे थे। अब इस कड़वे सच को बदलने और दोनों पक्षों के बीच एक मानवीय पुल बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। रांची नगर निगम ने इस समस्या के स्थाई और दयालु समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है, जहां न तो इंसानी सुरक्षा से समझौता होगा और न ही इन बेजुबानों के साथ कोई क्रूरता की जाएगी।

बड़गाईं की जमीन पर 2.10 करोड़ की लागत से बनेगा नया ठिकाना
नगर विकास एवं आवास विभाग ने रांची नगर निगम को 2.10 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है ताकि शहर में पशु जन्म नियंत्रण और आश्रय की एक सर्वसुविधायुक्त व्यवस्था खड़ी की जा सके। इस पूरी परियोजना के लिए मौजा बड़गाईं में खाता संख्या 140 और प्लॉट संख्या 767 के तहत कुल एक एकड़ नब्बे डिसमिल जमीन चिन्हित की गई है।
इस जमीन पर बनने वाले केंद्र को दो अलग-अलग मगर बेहद महत्वपूर्ण चरणों में विकसित किया जाएगा। पहले चरण में कुल जमीन में से बीस दशमलव दो डिसमिल हिस्से पर आधुनिक पशु जन्म नियंत्रण केंद्र यानी एबीसी सेंटर तैयार होगा। इस केंद्र का मुख्य काम आवारा कुत्तों की संख्या को वैज्ञानिक और मानवीय नियमों के तहत नियंत्रित करना होगा। यहां कुत्तों को पकड़कर लाया जाएगा, उनकी सुरक्षित नसबंदी की जाएगी, रेबीज और अन्य संक्रामक बीमारियों के टीके लगाए जाएंगे और पूरी तरह स्वस्थ होने पर उचित देखभाल दी जाएगी। इससे आने वाले समय में शहर की सड़कों पर कुत्तों की अनियंत्रित आबादी पर स्वाभाविक रोक लगेगी और लोगों के दिलों से रेबीज का खौफ हमेशा के लिए खत्म हो सकेगा।

दर्द पर मरहम लगाएगा अलग-अलग वार्डों वाला डॉग शेल्टर होम
परियोजना के दूसरे चरण में बची हुई विस्तृत जमीन पर एक विशाल और व्यवस्थित डॉग शेल्टर होम का निर्माण किया जाएगा। अक्सर देखने में आता है कि लोग डर के मारे आक्रामक या घायल कुत्तों को पत्थरों से मारते हैं, जिससे वे और अधिक हिंसक हो जाते हैं। नगर निगम इस शेल्टर को सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के पूर्ण पालन के साथ डिजाइन करवा रहा है, ताकि हर जानवर के स्वभाव और उसकी शारीरिक स्थिति के अनुसार उसे सही माहौल मिल सके।
इस शेल्टर होम की बनावट ऐसी रखी जा रही है जिसमें विभिन्न प्रकार के कुत्तों के लिए अलग-अलग खंड होंगे। जो जानवर डर या चोट के कारण बहुत आक्रामक हो चुके हैं, उन्हें विशेष सुरक्षा वाले बाड़ों में रखा जाएगा ताकि वे किसी अन्य जानवर या देखरेख करने वाले कर्मचारियों को नुकसान न पहुंचाएं। वहीं दूसरी तरफ, रेबीज या अन्य गंभीर संक्रामक रोगों से जूझ रहे असहाय कुत्तों के लिए बिल्कुल अलग आइसोलेशन वार्ड बनाए जाएंगे, जहां पशु चिकित्सक संक्रमण का खतरा फैलाए बिना उनका नियमित उपचार कर सकेंगे। सामान्य, शांत और स्वस्थ आवारा कुत्तों के लिए खुला, हवादार और सुरक्षित परिसर तैयार होगा, जहां वे बिना किसी भय के रह सकेंगे। इसके साथ ही पूरे परिसर में एक मजबूत सुरक्षा दीवार, गार्ड रूम, पानी और बिजली की समुचित व्यवस्था और गाड़ियों के आने-जाने के लिए सुगम रास्ते बनाए जाएंगे।

प्रशासनिक तत्परता और एक संवेदनशील शहर की उम्मीद
हाल ही में रांची के नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने नगर निगम की पूरी तकनीकी टीम के साथ बड़गाईं पहुंचकर प्रस्तावित स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद कार्यपालक अभियंता, सहायक लोक स्वास्थ्य पदाधिकारी, निगम के इंजीनियरों और नगर प्रबंधकों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि इस परियोजना के नक्शे और प्रस्ताव को तुरंत अंतिम रूप दिया जाए।
नगर आयुक्त ने अधिकारियों को यह हिदायत भी दी कि टेंडर प्रक्रिया और निर्माण से जुड़ी सभी औपचारिकताओं को बिना किसी देरी के प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, जिससे धरातल पर जल्द से जल्द काम शुरू हो सके। निर्माण कार्य में गुणवत्ता और आधुनिक मानकों का पूरा ध्यान रखने की बात कही गई है।
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