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Patna : बिहार में महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को नई दिशा देते हुए सीएम सम्राट चौधरी ने अभया ब्रिगेड की ताकत में बड़ा इजाफा किया है। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर पटना के ज्ञान भवन से मुख्यमंत्री ने यह साफ संदेश दिया कि राज्य की आधी आबादी की सुरक्षा और सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं होगा। जब मंच पर खाकी वर्दी पहने पुलिस दीदियों ने मुख्यमंत्री की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा, तो उन्होंने एक भाई और कुशल प्रशासक की तरह बहनों की हिफाजत और तरक्की का मजबूत संकल्प दोहराया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार की बहनें ही राज्य की तकदीर बदलेंगी और जब तक महिलाएं सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर नहीं होंगी, तब तक समृद्ध बिहार का सपना पूरा नहीं हो सकता।

सड़कों पर गश्त करेंगी 4,700 पुलिस दीदियां, शोहदों पर नकेल कसने की ठोस तैयारी
छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के मन से डर को पूरी तरह खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने पुलिस दीदी यानी अभया ब्रिगेड को 4,700 नए स्कूटर और मोटरसाइकिलों की सौगात दी है। मुख्यमंत्री द्वारा इन वाहनों को हरी झंडी दिखाए जाने के बाद अब महिला पुलिसकर्मी स्कूल, कॉलेज, कोचिंग और प्रमुख बाजारों में तेजी से गश्त कर सकेंगी। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिहार पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक स्तर पर पहुंची है, जहां करीब 40 हजार महिला पुलिसकर्मी अपनी सेवाएं दे रही हैं। यह संख्या पूरे देश में किसी भी राज्य की तुलना में सबसे ज्यादा है। इतना ही नहीं, आपात स्थिति में मदद पहुंचाने के लिए डायल 112 के रिस्पॉन्स टाइम को घटाकर महज 5 से 7 मिनट करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि किसी भी बेटी को संकट के समय तुरंत सुरक्षा मिल सके।

रिसर्च के लिए 10 हजार महीना और स्टार्टअप के लिए 2 लाख
बेटियों को सिर्फ सुरक्षित माहौल ही नहीं, बल्कि उनकी ऊंची उड़ान के लिए भी मुख्यमंत्री ने खजाना खोल दिया है। उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में बेटियों की राह आसान बनाने के लिए ‘मुख्यमंत्री बालिका पीएचडी फेलोशिप’ की शुरुआत की गई है। इसके तहत करीब 1,000 छात्राओं को चार साल तक हर महीने 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जिससे पैसे के अभाव में किसी होनहार छात्रा का शोध कार्य न रुके। इसके साथ ही महिलाओं को खुद का कारोबार शुरू करने के लिए ‘बिहार की बेटी स्टार्टअप चैलेंज’ योजना शुरू की गई है, जिसके जरिए 2,100 महिला उद्यमियों को 50 हजार से लेकर 2 लाख रुपये तक की सीधी मदद मिलेगी। सीएम का यह विजन बेटियों को नौकरी मांगने वाले के बजाय रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

एक करोड़ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का संकल्प, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनीं दीदियां
सीएम सम्राट चौधरी ने राज्य के विकास में महिलाओं की भागीदारी को रेखांकित करते हुए बताया कि आज जीविका दीदियां राज्य की अर्थव्यवस्था में 1.36 लाख करोड़ रुपये का योगदान दे रही हैं। 43 लाख महिलाएं पहले ही लखपति दीदी बन चुकी हैं और सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में एक करोड़ और महिलाओं को इस श्रेणी में लाने का है। पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और छोटे उद्योगों के जरिए कुल एक करोड़ महिलाओं को सीधे रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने का महाअभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। पंचायती राज व्यवस्था में मिले पचास फीसदी आरक्षण के कारण आज उनसठ फीसदी महिलाएं जनप्रतिनिधि बनकर विकास की कमान संभाल रही हैं। मुख्यमंत्री के इन दूरदर्शी फैसलों ने साबित कर दिया है कि बिहार की नारी शक्ति को सुरक्षित, सक्षम और समृद्ध बनाना ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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