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Patna : पटना के बापू सभागार में जब हजारों जीविका दीदियों के नारों से पूरा परिसर गूंज रहा था, तब मंच पर मौजूद सीएम सम्राट चौधरी के चेहरे पर एक अलग ही आत्मविश्वास और संतोष नजर आ रहा था। रक्षाबंधन से पहले अपनी बहनों को केवल बधाई देने के बजाय, उन्होंने सीधे उनकी आत्मनिर्भरता का पक्का रोडमैप उनके हाथों में सौंप दिया। जब जीविका दीदी संध्या कुमारी ने सीएम की कलाई पर स्नेह की डोर बांधी, तो सीएम सम्राट चौधरी ने भी बड़े भाई और प्रदेश के मुखिया का फर्ज निभाते हुए यह साफ कर दिया कि बिहार का विकास महिलाओं के उत्थान के बिना अधूरा है। ‘समृद्ध महिला, समृद्ध बिहार’ का संकल्प लेकर उतरे सीएम ने अपने फैसलों से यह साबित कर दिया है कि वे केवल योजनाएं नहीं बनाते, बल्कि जमीन पर उनका ठोस असर भी दिखाते हैं।

एक ऐसी यूनिवर्सिटी जो बनेगी बेटियों के स्वाभिमान का प्रतीक
सीएम सम्राट चौधरी की दूरदर्शी सोच का सबसे बड़ा उदाहरण राज्य में एक नए और अनोखे महिला विश्वविद्यालय की स्थापना का ऐलान है। बिहार के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला ऐसा संस्थान होगा जहां वाइस चांसलर से लेकर प्रोफेसर, क्लर्क और सुरक्षाकर्मी तक, पूरा सिस्टम सिर्फ और सिर्फ महिलाएं संभालेंगी। सीएम की इस पहल ने बेटियों के लिए एक ऐसा सुरक्षित और सशक्त मंच तैयार करने की नींव रख दी है, जहां वे बिना किसी संकोच के अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकेंगी।
यही नहीं, बेटियों को उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे ले जाने के लिए सीएम ने एक और बड़ा दिल दिखाया है। राज्य की 1,000 छात्राओं को पीएचडी की पढ़ाई के दौरान हर महीने 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे दी जाएगी। आर्थिक तंगी के कारण अक्सर रिसर्च छोड़ने को मजबूर होने वाली बिहार की होनहार बेटियों के लिए मुख्यमंत्री का यह फैसला किसी वरदान से कम नहीं है।

चूल्हे की चिंता से मुक्ति और आर्थिक आजादी का सम्राट विजन
गांव की गरीब महिलाओं के दर्द और उनकी रोजमर्रा की दिक्कतों को सीएम सम्राट चौधरी बखूबी समझते हैं। इसी सोच के तहत उन्होंने 31 मार्च तक 10 लाख जीविका दीदियों के घरों की छत पर सोलर पैनल लगाने का बड़ा फैसला लिया है। इससे न सिर्फ गरीब परिवारों को बिजली के बिल से राहत मिलेगी, बल्कि वे ऊर्जा के क्षेत्र में भी पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेंगे।
सीएम सम्राट चौधरी ने एक ही क्लिक में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 5 लाख लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में 600 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर कर यह जता दिया कि सरकार के खजाने का मुंह हमेशा बहनों की तरक्की के लिए खुला है। इसके साथ ही 10 हजार महिलाओं को आसान शर्तों पर कर्ज और गांवों में उनके उत्पादों को सही दाम दिलाने के लिए 112 नए ग्रामीण हाट का तोहफा देकर सीएम ने जमीनी स्तर पर स्वरोजगार की एक नई लहर पैदा कर दी है। आज राज्य की 50 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं और सीएम सम्राट चौधरी ने इसे 1 करोड़ तक पहुंचाने का मजबूत लक्ष्य सामने रखा है।

सुरक्षा का भरोसा, सेहत की फिक्र और सरकारी सेवा में भागीदारी
मुख्यमंत्री का मानना है कि बेटियां जब तक सुरक्षित और स्वस्थ महसूस नहीं करेंगी, तब तक समाज आगे नहीं बढ़ सकता। यही वजह है कि उन्होंने स्कूल, कॉलेज और व्यस्त बाजारों के आसपास ‘पुलिस दीदी’ की तैनाती सुनिश्चित की है। महिला पुलिसकर्मियों को पेट्रोलिंग के लिए मोटरसाइकिलें देकर सीएम ने कानून-व्यवस्था को महिलाओं के अनुकूल बना दिया है। आज पूरे देश में सबसे ज्यादा, यानी करीब 40 हजार महिला पुलिसकर्मी बिहार में सेवा दे रही हैं, जो राज्य के लिए गर्व की बात है।
बीपीएससी के जरिए चुनी गईं 7,376 सरकारी नर्सों को नियुक्ति पत्र देकर उन्होंने बेटियों को सम्मानजनक रोजगार से जोड़ा है। वहीं दूसरी तरफ, गांव-गांव में महिलाओं की सेहत सुधारने के लिए नवंबर तक 1 करोड़ महिलाओं की खून की मुफ्त जांच और एनीमिया की दवाएं बांटने का विशाल अभियान भी सीएम की संवेदनशील सोच का ही नतीजा है।

नशामुक्ति के जरिए परिवारों को टूटने से बचाने के लिए ब्रह्माकुमारी संस्थान से समझौता हो या आम जनता की समस्याओं को 30 दिनों के भीतर निपटाने का ‘सहयोग पोर्टल’, सीएम सम्राट चौधरी का हर कदम आम आदमी और खासतौर पर महिलाओं के जीवन को खुशहाल बनाने पर केंद्रित है। परिवार के सुख-दुख की चिंता करने से लेकर उनके आर्थिक भविष्य को संवारने तक, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद को बिहार की हर बहन का सच्चा और मजबूत मददगार साबित कर दिखाया है।

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