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Palamu : करीब 10 साल पहले एक डीलर से तीन हजार रुपए घूस लेते पकड़े गए विश्रामपुर के तत्कालीन BSO यानी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी रमेश चंद्र प्रसाद को अब सजा मिली है। पलामू व्यवहार न्यायालय की एंटी करप्शन ब्यूरो की विशेष अदालत ने उन्हें पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। रमेश चंद्र प्रसाद अब रिटायर हो चुके हैं। अदालत ने उन पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
यह फैसला एंटी करप्शन ब्यूरो के स्पेशल जज राजकुमार मिश्रा की अदालत ने सुनाया। मामला वर्ष 2014 का है, जब रमेश चंद्र प्रसाद विश्रामपुर के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर तैनात थे। आरोप था कि वह सरकारी अनाज के उठाव के लिए डीलर से प्रति क्विंटल 10 रुपए की रिश्वत मांग रहे थे। इसी शिकायत के बाद एसीबी ने जाल बिछाया और उन्हें रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था।
प्रति क्विंटल 10 रुपए मांगे, तीन हजार लेते पकड़े गए
मामले के अनुसार, विश्रामपुर के डीलर मुनीर आलम से अनाज उठाव के बदले रिश्वत मांगी जा रही थी। रमेश चंद्र प्रसाद पर आरोप था कि वह प्रति क्विंटल अनाज के लिए 10 रुपए की मांग कर रहे थे। बार-बार रिश्वत मांगे जाने के बाद मुनीर आलम ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो से कर दी।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की जांच की और रिश्वत लेते अधिकारी को पकड़ने की तैयारी की। तय योजना के तहत मुनीर आलम तीन हजार रुपए लेकर रमेश चंद्र प्रसाद के पास पहुंचे। जैसे ही उन्होंने रिश्वत की रकम ली, एसीबी की टीम ने मौके पर कार्रवाई कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
उस समय यह मामला इलाके में काफी चर्चा में रहा था। सरकारी अधिकारी पर डीलर से अनाज उठाव के बदले पैसे मांगने का आरोप लगा था। गिरफ्तारी के बाद मामला अदालत पहुंचा और करीब एक दशक तक इसकी कानूनी प्रक्रिया चलती रही।
दो धाराओं में दोषी, दोनों सजा साथ-साथ चलेगी
अदालत ने रमेश चंद्र प्रसाद को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(d) के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
वहीं, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत अदालत ने उन्हें चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई और 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। हालांकि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इसका मतलब है कि दोनों धाराओं में मिली सजा अलग-अलग जोड़कर नहीं काटनी होगी। अधिकतम पांच वर्ष की सजा प्रभावी रहेगी।
अपर लोक अभियोजक अभय पांडेय ने बताया कि अदालत ने रमेश चंद्र प्रसाद को मामले में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। करीब 10 साल पुराने इस मामले में फैसला आने के बाद अब सेवानिवृत्त हो चुके पूर्व प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी को जेल की सजा भुगतनी होगी।
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