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Patna : बिहार में सिंचाई की सुविधाओं को बढ़ाने और हर साल आने वाली बाढ़ से राहत दिलाने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र के सामने अपनी लंबित योजनाओं का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया है। सीएम सम्राट चौधरी ने सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात की। बैठक में बिहार की बड़ी सिंचाई, जल संसाधन और बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे।
बैठक में सीएम ने केंद्र से कहा कि बिहार की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का डीपीआर पहले ही भेजा जा चुका है, लेकिन कई योजनाएं अभी स्वीकृति और केंद्रीय सहायता के इंतजार में हैं। उन्होंने इन योजनाओं को जल्द मंजूरी देने और केंद्र से मिलने वाली राशि समय पर उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
कोसी-मेची परियोजना पर सबसे ज्यादा जोर
बैठक में कोसी-मेची अंतर्राज्यीय रिवर लिंक परियोजना पर खास तौर पर चर्चा हुई। इस योजना का मकसद कोसी बेसिन में उपलब्ध अतिरिक्त पानी का इस्तेमाल कर उत्तर बिहार के उन इलाकों तक सिंचाई का पानी पहुंचाना है, जहां खेती के लिए पानी की कमी रहती है। करीब 3,652.56 करोड़ रुपये की इस परियोजना के पहले चरण के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 395.41 करोड़ रुपये और 2026-27 में 570 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यानी पहले चरण के लिए कुल 965.41 करोड़ रुपये का प्रावधान है। हालांकि, अभी तक बिहार को सिर्फ 156.745 करोड़ रुपये ही मिल पाए हैं। सीएम सम्राट चौधरी ने केंद्र से पहले चरण की बची हुई राशि जल्द जारी करने की मांग की। साथ ही परियोजना के दूसरे चरण के डीपीआर को भी मंजूरी देने का आग्रह किया।
16 हजार करोड़ से ज्यादा की परियोजनाओं का डीपीआर केंद्र को
सीएम ने बैठक में बताया कि केंद्रीय बजट 2024-25 में बिहार के लिए कोसी-मेची परियोजना समेत सिंचाई और जल संसाधन क्षेत्र की कई योजनाओं के लिए वित्तीय मदद की घोषणा की गई थी। इसके बाद बिहार सरकार ने कुल 16,339.18 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का डीपीआर केंद्र सरकार को भेजा है। इनमें अभी तक केवल दो परियोजनाओं को मंजूरी मिल सकी है। बाकी परियोजनाओं की मंजूरी मिलने से बिहार में सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कई काम आगे बढ़ सकते हैं। बैठक में सिंचाई क्षेत्र की तीन परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई, जिनकी अनुमानित लागत 5,951.45 करोड़ रुपये है। इसके अलावा बाढ़ प्रबंधन से जुड़ी 15 परियोजनाएं भी केंद्र के स्तर पर विचाराधीन हैं। इनकी अनुमानित लागत 3,896.14 करोड़ रुपये बताई गई है।

सिकरहना तटबंध के लिए केंद्रीय मदद जल्द देने की मांग
सीएम ने सिकरहना दायां तटबंध निर्माण योजना का मामला भी केंद्रीय मंत्री के सामने रखा। इस योजना में केंद्र का हिस्सा 125.08 करोड़ रुपये है। संबंधित केंद्रीय समिति पहले ही योजना की अनुशंसा कर चुकी है। सीएम ने कहा कि अब इस योजना के लिए केंद्रीय सहायता जल्द उपलब्ध कराई जाए, ताकि तटबंध निर्माण का काम समय पर आगे बढ़ सके और बाढ़ के दौरान लोगों को राहत मिल सके।
पश्चिमी कोसी नहर के विस्तार पर भी हुई बात
केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के विस्तार, नवीकरण और आधुनिकीकरण की प्रगति पर भी बैठक में चर्चा हुई। बिहार सरकार ने इस परियोजना के लिए 8,338.89 करोड़ रुपये का डीपीआर केंद्रीय जल आयोग को भेजा है। केंद्र से मंजूरी और आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद में राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से पहले चरण का काम शुरू भी कर दिया है। पहले चरण पर करीब 3,484.24 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। सीएम ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से परियोजना को जल्द मंजूरी देने और केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
बाढ़ प्रभावित बिहार के लिए बढ़े केंद्रीय बजट की मांग
बैठक में बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ की समस्या भी प्रमुख मुद्दा रही। सीएम ने फ्लड मैनेजमेंट एंड बॉर्डर एरिया प्रोग्राम यानी FMBAP के तहत बिहार के लिए बजटीय प्रावधान बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि बिहार देश के सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित राज्यों में शामिल है। राज्य का करीब 73 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आता है। गंगा, कोसी, कमला, बागमती समेत कई नदियों के कारण हर साल बड़ी आबादी प्रभावित होती है। ऐसे में राज्य की जरूरत के हिसाब से केंद्र से ज्यादा आर्थिक सहायता मिलना जरूरी है। सीएम ने बाढ़ नियंत्रण की योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए पर्याप्त केंद्रीय मदद की मांग की।

2026-27 के बजट में तीन बड़ी परियोजनाएं शामिल करने का आग्रह
सीएम ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से केंद्रीय बजट 2026-27 में बिहार की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को शामिल करने का भी अनुरोध किया। पहली परियोजना इंद्रपुरी जलाशय योजना है। इसका उद्देश्य सोन नहर प्रणाली को लंबे समय तक पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना है। बिहार और झारखंड के बीच जल बंटवारे को लेकर एमओयू होने के बाद इस परियोजना को आगे बढ़ाने की संभावना बनी है। दूसरी परियोजना सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना है। इसके तहत सोन नदी के पानी को पाइपलाइन और नहरों के जरिए फल्गु नदी तक पहुंचाने की योजना है। इससे गया और औरंगाबाद के सूखाग्रस्त इलाकों में सिंचाई के साथ पेयजल और औद्योगिक जरूरतों के लिए पानी मिल सकेगा। साथ ही फल्गु नदी में सालभर पानी उपलब्ध रखने में भी मदद मिलेगी। तीसरी योजना सारण जिला बाढ़ नियंत्रण एवं जलनिकासी परियोजना के पहले चरण की है। इसकी अनुमानित लागत 1,350.95 करोड़ रुपये है। योजना के तहत प्रमुख जलनिकासी चैनलों का जीर्णोद्धार, नए रेगुलेटरों का निर्माण और दूसरी जरूरी संरचनाओं का काम किया जाना है। इससे सारण में जलजमाव और बाढ़ की समस्या कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। कृषि भूमि की सुरक्षा के साथ सोनपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, एयरोसिटी और आसपास के शहरी इलाकों को भी इसका फायदा मिलने की बात कही गई।
फरक्का बराज और गाद की समस्या का स्थायी समाधान मांगा
बैठक में गंगा में लगातार बढ़ रही गाद की समस्या को लेकर भी सीएम ने अपनी बात रखी। उन्होंने फरक्का बराज और भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि से जुड़े कारणों से बिहार में गाद जमने, नदी की धारा बदलने और बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान तलाशने की जरूरत बताई। सीएम ने केंद्र से राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति बनाने और इसके लिए अलग से समर्पित कोष तैयार करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि बिहार की सिंचाई, पेयजल और उद्योगों की जरूरत को देखते हुए राज्य के हिस्से में पर्याप्त पानी उपलब्ध रहना भी जरूरी है।
पटना में ही रहे गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग का मुख्यालय
सीएम ने गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग यानी GFCC के अध्यक्ष का मुख्यालय पटना में बनाए रखने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार गंगा बेसिन का सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित राज्यों में से एक है। ऐसे में आयोग का मुख्यालय पटना में रहने से बाढ़ नियंत्रण से जुड़े मामलों की निगरानी और जरूरी फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे। भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि के नवीनीकरण और इससे बिहार के हितों पर पड़ने वाले असर को लेकर भी केंद्रीय मंत्री के साथ चर्चा हुई।
नेपाल से जुड़ी परियोजनाओं में तेजी की मांग
उत्तर बिहार में बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए नेपाल से जुड़ी परियोजनाओं को भी बैठक में प्रमुखता से उठाया गया। सीएम ने कोसी हाई डैम, कमला बहुउद्देशीय परियोजना और बागमती बांध परियोजना के सर्वे और डीपीआर तैयार करने का काम जल्द पूरा कराने का आग्रह किया। उन्होंने संयुक्त परियोजना कार्यालय यानी JPO में बिहार के प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने की भी मांग रखी। इन परियोजनाओं के आगे बढ़ने से उत्तर बिहार में बाढ़ का असर कम करने, सिंचाई सुविधा बढ़ाने और जलविद्युत उत्पादन की संभावनाएं मजबूत होने की उम्मीद है।
केंद्र से जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद
बैठक के बाद सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय से बिहार की लंबित सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का सीधा फायदा किसानों, ग्रामीण आबादी और राज्य की अर्थव्यवस्था को मिलेगा। सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार बिहार के विकास को प्राथमिकता दे रही है। ऐसे में राज्य की ओर से भेजी गई महत्वपूर्ण जल संसाधन और बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं को जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
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