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New Delhi/Ranchi : झारखंड के पलामू और गढ़वा समेत सोन नदी से जुड़े इलाकों के लिए सोमवार का दिन खास रहा। जिस सोन नदी का पानी सामने से गुजरता है, लेकिन उसका पूरा फायदा झारखंड के हिस्से में नहीं आ पाता था, अब उसकी हिस्सेदारी को लेकर बिहार और झारखंड के बीच सहमति बन गई है। नई दिल्ली में दोनों राज्यों के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर MoU पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के बाद CM हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का आभार जताया।
CM हेमंत सोरेन ने कहा कि सोन नदी के जल बंटवारे का समाधान होने से झारखंड के पलामू, गढ़वा और आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई और पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। उनके मुताबिक इससे राज्य के जल संसाधनों को मजबूत करने के साथ इन इलाकों के विकास को भी आगे बढ़ाने का रास्ता खुलेगा।
इस समझौते के तहत बिहार को सोन नदी से 5.75 MAF और झारखंड को 2.00 MAF पानी आवंटित करने पर दोनों राज्यों ने सहमति जताई है।
नदी वही थी, लेकिन पानी के हिस्से को लेकर सवाल बना हुआ था
सोन नदी झारखंड और बिहार के लिए कोई नई नदी नहीं है। इसके पानी से दोनों राज्यों के कई इलाके सीधे तौर पर जुड़े हैं। लेकिन बिहार और झारखंड के अलग होने के बाद नदी के पानी के इस्तेमाल और हिस्सेदारी को लेकर कई सवाल बने रहे। झारखंड के पलामू और गढ़वा जैसे इलाकों में पानी की जरूरत का मुद्दा अक्सर सामने आता रहा है। खेती के लिए सिंचाई हो या गर्मी के दिनों में पीने के पानी की जरूरत, पर्याप्त जल संसाधन यहां के लोगों के लिए बड़ी जरूरत है। अब MoU के बाद पानी की हिस्सेदारी तय हो गई है। ऐसे में झारखंड सरकार के सामने अगली चुनौती इस पानी को जरूरत वाले इलाकों तक पहुंचाने और उससे जुड़ी योजनाओं को जमीन पर उतारने की होगी।
CM हेमंत बोले- समाधान से लोगों को मिलेगा सीधा फायदा
CM हेमंत सोरेन ने सोन नदी जल बंटवारे के समाधान को झारखंड के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने इस मुद्दे के समाधान में सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक सोन नदी के पानी की उपलब्धता से पलामू, गढ़वा और आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसका असर सीधे किसानों पर पड़ सकता है। अभी जिन इलाकों में खेती काफी हद तक बारिश पर निर्भर रहती है, वहां सिंचाई के अतिरिक्त विकल्प तैयार किए जा सकेंगे। पानी सिर्फ खेत के लिए नहीं चाहिए। घर के लिए भी चाहिए। इसलिए समझौते का एक अहम पहलू पेयजल की उपलब्धता से जुड़ा है। सरकार का कहना है कि सोन नदी के पानी के बेहतर इस्तेमाल से लोगों को पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
बिहार को ज्यादा, झारखंड को भी तय हिस्सेदारी
समझौते के मुताबिक बिहार को 5.75 MAF और झारखंड को 2.00 MAF पानी मिलेगा। दोनों राज्यों के बीच सहमति के बाद अब सोन नदी के पानी के इस्तेमाल को लेकर एक स्पष्ट व्यवस्था सामने आई है। झारखंड के लिहाज से 2.00 MAF पानी की हिस्सेदारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका इस्तेमाल सिंचाई और पेयजल जैसी जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकता है। खासकर पलामू और गढ़वा के लोगों की नजर अब इस बात पर होगी कि तय पानी का लाभ उनके गांवों और खेतों तक कितनी जल्दी पहुंचता है। किसानों के लिए सिंचाई की सुविधा का मतलब सिर्फ एक फसल का पानी नहीं है। पानी उपलब्ध होने पर फसल का चुनाव, खेती का समय और उत्पादन सभी पर असर पड़ता है। अगर सिंचाई की व्यवस्था मजबूत होती है तो किसानों को बारिश के भरोसे कम रहना पड़ेगा।
गर्मी में पानी की चिंता करने वाले इलाकों को उम्मीद
पलामू और गढ़वा सहित आसपास के इलाकों में गर्मी के दिनों में पानी की समस्या कोई नई बात नहीं है। कई जगहों पर लोगों को दूर से पानी लाना पड़ता है। दूसरी तरफ खेती के लिए भी पानी की जरूरत बनी रहती है। ऐसे में सोन नदी के पानी की हिस्सेदारी तय होने से लोगों की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि समझौते के बाद सबसे अहम काम इसके क्रियान्वयन का होगा। पानी को किस व्यवस्था के तहत लिया जाएगा, किस इलाके तक पहुंचाया जाएगा और सिंचाई तथा पेयजल योजनाओं से इसे किस तरह जोड़ा जाएगा, इसका असर आने वाले समय में दिखाई देगा।
नई दिल्ली में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री रहे मौजूद
सोन नदी जल बंटवारे से संबंधित MoU पर नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हस्ताक्षर हुए। कार्यक्रम में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शामिल हुए। इस मौके पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, बिहार के उपमुख्यमंत्री, झारखंड के जल संसाधन मंत्री हफीजुल हसन समेत दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। झारखंड के मुख्य सचिव अविनाश कुमार, जल संसाधन विभाग के सचिव प्रशांत कुमार और झारखंड भवन, नई दिल्ली के रेजिडेंट कमिश्नर अरवा राजकमल सहित भारत सरकार, झारखंड सरकार और बिहार सरकार के अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
वर्षों पुराने मुद्दे पर बनी सहमति
बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे का मामला लंबे समय से अहम रहा है। अब दोनों राज्यों ने पानी की हिस्सेदारी पर सहमति बनाकर आगे का रास्ता साफ कर दिया है। CM हेमंत सोरेन ने भी इस समाधान के लिए केंद्र के प्रति आभार जताया है। झारखंड के लिए यह समझौता खासकर पलामू और गढ़वा जैसे क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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