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New Delhi : टोल प्लाजा पर सफर करने वालों की जेब कट रही थी और सरकार को भनक तक नहीं लगी। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के टोल नाकों पर चल रही इस बड़ी लूट पर अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) का शिकंजा कसा है। एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत देश के सात राज्यों में 14 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू, दिल्ली-एनसीआर और कोलकाता में चल रही है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने सरकारी सिस्टम के बराबर अपना एक नकली सॉफ्टवेयर खड़ा कर दिया था, जिससे करोड़ों रुपये की सीधी चपत लगाई जा रही थी।
100 रुपये वसूले तो सरकार को दिए सिर्फ 5 रुपये
इस पूरे खेल का पर्दाफाश सबसे पहले उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने किया था। जब एसटीएफ ने परतें खोलीं तो पता चला कि टोल से गुजरने वाली गाड़ियों से जो वसूली हो रही थी, उसका सिर्फ 5 फीसदी हिस्सा ही सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जा रहा था। बाकी का 95 फीसदी पैसा सीधे आरोपियों की जेब में जा रहा था। पुलिस में दर्ज दो प्राथमिकियों को आधार बनाकर ईडी ने जांच संभाली। अफसरों का कहना है कि यह सीधे तौर पर सरकारी राजस्व की खुली डकैती थी, जिसे बेहद शातिराना तरीके से अंजाम दिया जा रहा था।
नकली रसीदें काटीं और मेन सिस्टम से बाहर रखा पैसा
आरोपियों ने एनएचएआई के ओरिजिनल सॉफ्टवेयर जैसा ही एक डमी सिस्टम तैयार कर रखा था। जब भी कोई गाड़ी टोल से निकलती, तो इसी फर्जी सॉफ्टवेयर से पर्ची काट दी जाती थी। इस वजह से यह पैसा नेशनल हाईवे के मुख्य अकाउंटिंग सिस्टम में कभी दर्ज ही नहीं हुआ। टोल से होने वाली असली कमाई को सिस्टम से बाहर ही डायवर्ट कर दिया गया। फॉरेंसिक पड़ताल और एनएचएआई के डेटा ने भी अब यह साफ कर दिया है कि टोल बूथों पर फर्जी सॉफ्टवेयर से ही समानांतर खेल चल रहा था।
काली कमाई और डिजिटल सुराग तलाश रही टीम
ईडी की टीमों ने जिन ठिकानों पर दबिश दी है, वहां से कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और बही-खातों की बारीकी से जांच की जा रही है। एजेंसी का मुख्य मकसद इस सिंडिकेट में शामिल तमाम चेहरों तक पहुंचना और फर्जीवाड़े से जुड़े ठोस डिजिटल सबूत जुटाना है। इसके साथ ही इस घोटाले से बनाई गई बेनामी संपत्तियों और बैंक खातों का पता लगाया जा रहा है, ताकि अपराध से जुटाई गई काली कमाई को जब्त किया जा सके। मामले में आने वाले दिनों में कुछ बड़े लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।
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