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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : रामगढ़ आम दिनों में चितरपुर कॉलेज के क्लासरूम में अक्सर सवालों और किताबों के पन्नों की सरसराहट सुनाई देती है, लेकिन शिक्षक दिवस पर माहौल बिल्कुल जुदा था। सुबह से ही कॉलेज परिसर में एक अलग तरह की हलचल और मुस्कान तैर रही थी। गलियारों में जहां अमूमन क्लास बंक करने या नोट्स की बातें होती थीं, वहां छात्र अपने शिक्षकों के स्वागत की तैयारियों में मशगूल थे। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के बहाने यह दिन सिर्फ एक औपचारिकता भर नहीं रहा, बल्कि छात्रों और गुरुओं के उस रिश्ते का जश्न बन गया जो क्लासरूम की चारदीवारी से निकलकर पूरी जिंदगी का सहारा बनता है।
जब प्राचार्या ने कहा- गुरु का मोल चुकाना किसी के बस की बात नहीं
कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत कॉलेज की प्राचार्या डॉ. संज्ञा ने डॉ. राधाकृष्णन की तस्वीर पर फूल चढ़ाकर और दीया जलाकर की। इसके बाद जैसे ही उन्होंने माइक थामा, पूरा हॉल शांत होकर उनकी बातें सुनने लगा। बेहद अपनेपन भरे लहजे में उन्होंने कहा कि शिक्षक उस दीये की तरह होता है जो खुद तपकर बच्चों की राह से अज्ञान का अंधेरा हटाता है। कच्ची मिट्टी की तरह कॉलेज आने वाले नौजवानों को एक बेहतर इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनाने का काम शिक्षक ही करता है। प्राचार्या ने दिल छू लेने वाले अंदाज में कहा कि मां-बाप जन्म देते हैं, लेकिन जिंदगी जीने का सलीका गुरु सिखाता है, और इस कर्ज को कभी पैसों या किसी तोहफे से नहीं चुकाया जा सकता।
पैर छूकर लिया आशीर्वाद, नम आंखों और मुस्कान के बीच बंटे उपहार
मंच पर भाषणों का दौर थमा तो भावनाएं उमड़ पड़ीं। सेमेस्टर 5 के छात्र अनीस कुमार पूरे जोश के साथ मंच संभाल रहे थे और उनकी हर बात पर साथी छात्र तालियां बजा रहे थे। इसके बाद छात्रों ने अपनी जेबखर्च से बचाकर लाए गए छोटे-छोटे उपहार अपने शिक्षकों और कर्मचारियों के हाथों में थमाए। किसी ने डायरी दी तो किसी ने कलम, लेकिन उन तोहफों के साथ जो सम्मान था, उसने कई शिक्षकों की आंखें नम कर दीं। सिर्फ पढ़ाने वाले प्रोफेसर ही नहीं, बल्कि कॉलेज के दफ्तर और परिसर की व्यवस्था संभालने वाले शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को भी बच्चों ने उतना ही आदर दिया। अंत में प्रो. रेवालाल पटेल ने सभी का शुक्रिया अदा किया और माहौल को गर्मजोशी से भर दिया।
समारोह के दौरान प्रो. ज्योति कुमारी, प्रो. जूही उपाध्याय, प्रो. निरंजन महतो, प्रो. अंजू कुमारी, प्रो. उत्तम कुमार, प्रो. शबाना अंजुम, प्रो. दीपक कुमार, प्रो. मीना मुंडा, प्रो. नगमा नौशाबा, प्रो. उत्तम कुमार सिंह और प्रो. इब्राहिम अहमद ने भी अपने पुराने दिनों के अनुभव साझा किए। वहीं मिथलेश करमाली, जफरुल हसन खान, रवि कुमार, आसिया आफ़रीन, सोनू कुमार, राजेश तिवारी, पिंटू प्रजापति और आमिर अली समेत कॉलेज के तमाम छात्र-छात्राएं इस यादगार पल के साक्षी बने। घंटी बजने पर अमूमन खाली हो जाने वाला कॉलेज उस शाम देर तक हंसी-ठिठोली और गुरु-शिष्य की आत्मीय बातचीत से गुलजार रहा।
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