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Ranchi : JPSC में भर्ती धांधली की जांच कर रही CID ने अदालत में बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए सीआईडी ने हलफनामा दायर किया है। जांच एजेंसी ने साफ कहा है कि आयोग में अधिकारियों, दलालों और ब्लैकलिस्टेड एजेंसी का एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय था। इस सिंडिकेट ने कई परीक्षाओं में खुलेआम गड़बड़ी की और भारी रकम वसूली।
CID के अनुसार, 22 जुलाई 2026 को आयोग के दफ्तर में छापेमारी के तुरंत बाद तत्कालीन चेयरमैन एल. खियांग्ते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने के बाद वे सरकारी लैपटॉप और पेन ड्राइव अपने साथ घर ले गए। फॉरेंसिक जांच में यह बात सामने आई है कि उन्होंने हार्ड डिस्क को नुकसान पहुंचाया और डेटा डिलीट करके डिजिटल सबूत मिटाने की पूरी कोशिश की। सीआईडी को पूर्व चेयरमैन और दलालों के बीच संदिग्ध पैसों के लेनदेन और बातचीत के मजबूत कॉल रिकॉर्ड्स मिले हैं।
पास कराने की बंधी थी रेट लिस्ट, 500 ओएमआर शीट में हेराफेरी
CID ने अदालत को बताया कि फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर परीक्षा में 350 से ज्यादा और असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट परीक्षा में 150 से अधिक ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ की गई थी। इस पूरे खेल के लिए सिंडिकेट ने बाकायदा रेट लिस्ट बना रखी थी। अभ्यर्थियों से पीटी पास कराने के बदले 5 लाख रुपये मांगे जाते थे, जबकि फाइनल सेलेक्शन की कीमत 10 से 25 लाख रुपये तक तय थी। पैसे की गारंटी पक्की करने के लिए दलाल अभ्यर्थियों के असली शैक्षणिक दस्तावेज, दस्तखत किए हुए खाली चेक और कानूनी स्टांप पेपर अपने पास गिरवी रख लेते थे, ताकि बाद में कोई मुकर न सके।
दागी एजेंसी को काम देने के लिए परीक्षा नियंत्रक को हटाया
सीआईडी की जांच में यह बात भी सामने आई कि जेएसएससी ने मई 2025 में जिस टीडीपीएल (TDPL) कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया था, उसी कंपनी को जून 2025 में जेपीएससी की अहम परीक्षाओं का ठेका थमा दिया गया। तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोटा ने इस काली सूची वाली एजेंसी को काम देने का कड़ा विरोध किया था। इसके बावजूद खियांग्ते ने एजेंसी पर कोई कदम उठाने के बजाय असीम किस्पोटा से ही परीक्षा का प्रभार छीन लिया। इसके बाद यह जिम्मा उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता के हवाले कर दिया गया। श्वेता कुमारी गुप्ता का तबादला होने के बाद भी वे खियांग्ते के कहने पर आयोग में ही टिकी रहीं और काम संभालती रहीं।
टीडीपीएल का मैनेजर निकला सरगना, खुद भी पास की परीक्षाएं
इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड टीडीपीएल कंपनी का मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी निकला है। जांच में खुलासा हुआ कि वह एजेंसी में काम करने के साथ-साथ खुद भी परीक्षाओं में बैठता था और सेटिंग के दम पर पास भी हो जाता था। CID ने जेएसएससी दफ्तर में लगातार छापे मारकर सीजीएल परीक्षा से जुड़े कागजात खंगाले हैं। कई ऐसे सफल अभ्यर्थियों से भी कड़ाई से पूछताछ की गई है, जिन पर धांधली के जरिए पास होने का शक है। एजेंसी ने मौके से कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं और मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
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