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Lucknow : सुबह की धूप में स्कूल के गेट पर रोते-बिलखते बच्चे और बस्ते का भारी-भरकम बोझ अब बीते दिनों की बात बनने जा रहा है। उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में अब बचपन को किताबों के वजन तले दबाने के बजाय खेल-कूद, रंग-बिरंगी आकृतियों और कहानियों की जादुई दुनिया में संवारने की तैयारी है। तीन से छह साल के नन्हे-मुन्नों के लिए सीएम योगी की सरकार प्रदेश भर के आंगनबाड़ी केंद्रों को पूरी तरह बालवाटिका का आधुनिक रूप देने जा रही है। मकसद बिल्कुल साफ है कि जब ये बच्चे पहली कक्षा की औपचारिक दहलीज पर कदम रखें, तो उनके मन में स्कूल का खौफ नहीं, बल्कि कुछ नया सीखने का गजब का उत्साह हो। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इस पूरी योजना का खाका जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है।
क्लासरूम में सजेगा जादुई पिटारा और चार खास कोने
अब सरकारी स्कूल के कमरे किसी उबाऊ जगह जैसे नहीं दिखेंगे। हर बालवाटिका में बच्चों के लिए चार अलग-अलग लर्निंग कॉर्नर तैयार किए जा रहे हैं। एक कोने में रंग-बिरंगे ब्लॉक्स होंगे जिन्हें जोड़कर बच्चे अपनी कल्पना के महल बनाएंगे, तो दूसरे कोने में सचित्र मजेदार बाल साहित्य की किताबें सजी होंगी। तीसरे कोने में कागजों की कतरनें, मिट्टी और रंगों से कलाकारी होगी, जबकि चौथे कोने में बच्चे तरह-तरह के अभिनय और नाटक करके अपनी झिझक मिटाएंगे।
पढ़ाई को मजेदार बनाने के लिए जादुई पिटारा, वंडर बॉक्स और खिलौनों का सहारा लिया जाएगा। इसके साथ ही एससीईआरटी की ओर से तैयार की गई विशेष अभ्यास पुस्तकें जैसे ‘चहक’, ‘कदम’ और ‘कलांकुर’ बच्चों के हाथों में होंगी। बैठने के लिए छोटे और सुरक्षित बालमैत्री फर्नीचर, दीवार पर आकर्षक चार्ट, सुरक्षित खेल मैदान और बच्चों की लंबाई के हिसाब से तैयार वॉश बेसिन व शौचालय हर केंद्र का हिस्सा बनेंगे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और नोडल शिक्षक हर दिन कम से कम तीन घंटे तक बच्चों को ऐसी मजेदार गतिविधियों में व्यस्त रखेंगे, जिससे उनका सामाजिक, मानसिक और शारीरिक विकास तेजी से हो सके।
दाखिले से लेकर मॉनिटरिंग तक, हर बच्चे पर रहेगी नजर
सरकार की इस पूरी कवायद का असर तभी दिखेगा जब गांव और मोहल्लों के सभी बच्चे स्कूल तक पहुंचेंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए सेवित क्षेत्र के तीन से छह वर्ष के बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन कराने और कम से कम सत्तर फीसदी हाजिरी बनाए रखने का कड़ा लक्ष्य तय किया गया है। स्कूल के हेडमास्टर, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं की संयुक्त टीम घर-घर जाकर अभिभावकों को इस नई व्यवस्था से जोड़ेंगी। बच्चे ने साल भर में क्या सीखा, इसके लिए उसका एक समग्र रिपोर्ट कार्ड तैयार होगा और साल में दो बार अभिभावकों को बुलाकर उनसे साझा किया जाएगा।
योजना सिर्फ कागजों पर न सिमटे, इसके लिए जिले स्तर पर एक विशेष ईसीसीई कोर ग्रुप बनाया गया है। इसमें डायट प्रवक्ता, बेसिक शिक्षा अधिकारी और बाल विकास परियोजना के अफसर शामिल रहेंगे। यह टीम उन आंगनबाड़ी केंद्रों पर खास ध्यान देगी जो स्कूल की दो सौ मीटर की परिधि में किसी किराए या पुराने भवन में चल रहे हैं, ताकि उन्हें तुरंत स्कूल परिसर के अंदर शिफ्ट कराया जा सके। यह कोर ग्रुप शिक्षकों की ट्रेनिंग, संसाधनों की उपलब्धता और पढ़ाई के दौरान आने वाली हर छोटी-बड़ी समस्या का मौके पर ही निपटारा करेगा।
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