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Patna : रविवार की ढलती शाम जब ज्ञान भवन के भारी-भरकम दरवाजों से लोग अंदर दाखिल हो रहे थे, तो माहौल किसी बड़े बाजार जैसा नहीं बल्कि एक भरे-पूरे गांव के आंगन जैसा लग रहा था। कहीं भागलपुर के सिल्क के थान खुल रहे थे, तो कहीं बांस की नक्काशीदार डलिया लोगों का ध्यान खींच रही थी। हवा में पकवानों की वही सोंधी महक तैर रही थी, जो सिर्फ मिट्टी और घर के चूल्हे से निकलती है। मौका था बिहार सरस मेला 2026 के आगाज का, जहां देश के 15 राज्यों से आईं हुनरमंद महिलाएं अपनी साल भर की मेहनत, उम्मीदें और आत्मनिर्भरता का सपना लेकर पहुंची हैं। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने फीता काटकर मेले का शुभारंभ किया और सीधे महिलाओं के स्टॉलों की तरफ बढ़ गए।


घूंघट की ओट से निकलकर बाजार की मुख्य धारा तक
कभी घर की चारदीवारी और चूल्हे-चौके तक सीमित रहने वाली ये महिलाएं आज अपने काम की खुद मालिक हैं। मेले में लगे स्टॉलों पर नजर डालें तो हर मेज के पीछे एक संघर्ष और जीत की दास्तान बैठी मिलती है। मंत्री श्रवण कुमार जब स्टॉलों पर पहुंचे, तो उन्होंने केवल सामान नहीं देखा बल्कि महिलाओं से उनके काम और कमाई का हाल भी पूछा। हाथ से बुने कालीन, सूती और रेशमी कपड़े, मिट्टी के खिलौने और खेतों से सीधे लाए गए जैविक उत्पाद हर आने-जाने वाले को अपनी ओर खींच रहे थे। स्वागत का तरीका भी अनोखा रहा, जहां गुलदस्तों की जगह दीदियों ने अतिथियों को गमलों में लगे हरे पौधे थमाए। इसके पीछे संदेश साफ था कि पर्यावरण बचाना भी उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। जीविका के सीईओ हिमांशु शर्मा ने कहा कि यह मेला केवल खरीद-बिक्री की जगह नहीं है, यह इन बहनों के आत्मसम्मान और ताकत का सबसे बड़ा जलसा है।

जब हुनर को मिला ब्रांड का नाम और नया मुकाम
इस शाम की सबसे खास तस्वीर तब उभरी जब जीविका दीदियों के अपने ब्रांड ‘बिहारिका’ के नए लोगो का लोकार्पण हुआ। अब तक गांव-कस्बों में बिना किसी नाम के बिकने वाले इन बेहतरीन उत्पादों को अब एक संगठित और बड़ा बाजार मिलेगा। अपर मुख्य सचिव एच.आर. श्रीनिवास ने बताया कि जीविका ने गांव और शहर के बीच की दूरी पाट दी है। अब किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं है, दीदियां सीधे ग्राहकों से मोलभाव कर रही हैं। मंत्री ने इस मौके पर कहा कि सरकार की सतत जीविकोपार्जन योजना और मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से गांव-गांव में गरीबी के ताले टूटे हैं। उन्होंने पटना के लोगों से दिल खोलकर अपील की कि वे अगले दस दिनों में यहां आएं, खरीदारी करें और इन कर्मठ हाथों का हौसला बढ़ाएं।
समारोह के समापन पर जब बिहार राज्य गीत की धुन गूंजी, तो मंच पर मौजूद पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, विधायक रविन्द्र प्रसाद सिंह और जीविका की अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अनन्या सिंह समेत तमाम अफसरों और आम लोगों के चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। यह चमक थी उस भरोसे की, जो 20 से 29 सितंबर तक ज्ञान भवन की इस छत के नीचे नए पंख फैलाने जा रहा है।
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