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Patna : किसी दौर में जो मखाना मिथिला के तालाबों और गांव-घर की चारदीवारी तक सिमटा हुआ था, वह आज समंदर पार कर दुनिया के 20 से ज्यादा देशों के डाइनिंग टेबल पर अपनी धाक जमा रहा है। अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ग्रीस जैसे देशों में आज बिहार का यह सुपरफूड शान से बिक रहा है। मखाने के इस सफर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और बिहार के किसानों की जिंदगी बदलने में राज्य के नेतृत्व और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की दूरदर्शी नीतियों की सबसे बड़ी भूमिका मानी जा रही है। उनके साफ विजन और लगातार प्रयासों का ही नतीजा है कि मिथिला मखाना आज सिर्फ एक पारंपरिक उपज नहीं, बल्कि बिहार की नई पहचान और ग्लोबल ब्रांड बनकर उभरा है।
तालाब से वैश्विक बाजार तक… सीएम की नीतियों से बदली तस्वीर
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि बिहार की असली ताकत उसकी मिट्टी और मेहनती किसान हैं। इसी सोच के तहत उन्होंने मखाना उत्पादन को संगठित उद्योग का रूप देने के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार कराया। राज्य सरकार ने एपीडा के साथ मिलकर न केवल मखाने की पैकेजिंग और गुणवत्ता पर काम किया, बल्कि जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना को सीधे विदेशी बाजारों से जोड़ने का रास्ता भी खोला। हाल ही में बिहटा स्थित औद्योगिक क्षेत्र से 18 मीट्रिक टन मखाने की पहली खेप समुद्र के रास्ते ऑस्ट्रेलिया भेजी गई, जो सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति और सही नीतियों का जीवंत उदाहरण है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत से 7,200 मीट्रिक टन से ज्यादा मखाना विदेशों में भेजा गया, जिससे राज्य और देश को करीब 22 मिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा हासिल हुई।
2030 का बड़ा सपना और 90 करोड़ का पहला कदम
बिहार को मखाने की वैश्विक राजधानी बनाने के लिए मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में ‘मखाना से समृद्धि अभियान’ की पांच वर्षीय रूपरेखा तैयार की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक चलने वाले इस महाभियान का लक्ष्य खेती के रकबे को 41 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर सीधे 82 हजार हेक्टेयर करना है। इसके साथ ही पॉप मखाना का उत्पादन 91 हजार मीट्रिक टन से पार ले जाने और निर्यात को 30 हजार मीट्रिक टन तक पहुंचाने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है। सीएम की पहल पर योजना के पहले ही साल के लिए करीब 90 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट तय किया गया है, ताकि किसानों को आधुनिक मशीनें, कटाई के बाद के प्रोसेसिंग सेंटर और दुनिया भर में ब्रांडिंग का पूरा फायदा मिल सके। सरकार का संकल्प साफ है कि आने वाले समय में दुनिया भर में बिकने वाले मखाने के हर दो पैकेट में से एक पैकेट पर मिथिला मखाना का लोगो चमके।
किसानों के चेहरे पर लौटी मुस्कान, आय में 12 गुना उछाल
इस पूरी कवायद का सबसे खूबसूरत पहलू यह है कि इसका सीधा लाभ उन किसानों तक पहुंच रहा है जो कमर भर पानी में उतरकर मखाना निकालते हैं। आंकड़ों की जुबानी समझें तो साल 2012-13 में जिस किसान को प्रति हेक्टेयर मखाने से महज 35 हजार रुपये की आय होती थी, आज नई तकनीकों, सीधी बाजार पहुंच और सरकारी सहयोग के दम पर वही आय बढ़कर 4 लाख 25 हजार 750 रुपये प्रति हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है। यानी कमाई में 12 गुना से भी ज्यादा का जबरदस्त इजाफा हुआ है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह प्रयास आज मिथिला और पूरे बिहार के ग्रामीण इलाकों में आर्थिक आत्मनिर्भरता और खुशहाली की एक नई इबारत लिख रहा है।
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