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Patna : बरसों से बिहार के गांवों की एक आम तस्वीर रही है… खेत की मेड़ को लेकर दो पड़ोसियों में ठन गई या कहासुनी में किसी ने हाथ छोड़ दिया, तो सीधे जिला अदालत की दौड़ शुरू हो जाती थी। तारीख पर तारीख पड़ती, वकीलों की फीस में गाढ़ी कमाई लुटती और खेत-खलिहान छोड़कर शहर के चक्कर काटते-काटते उम्र बीत जाती थी। लेकिन अब बिहार के देहात में न्याय का मिजाज बदल रहा है। पंचायती राज विभाग के ई-ग्राम कचहरी पोर्टल ने इस पुराने ढर्रे को तोड़ दिया है। जनवरी 2025 से लेकर अब तक इस पोर्टल के जरिए 44 हजार से ज्यादा झगड़े सुलझाए जा चुके हैं। इनमें 22 हजार से ज्यादा जमीन और लेन-देन से जुड़े दीवानी मामले हैं और इतने ही मारपीट जैसे फौजदारी विवाद, जिनका निपटारा गांव के स्तर पर ही बैठकर कर दिया गया।
बड़े मुकदमों के बोझ से राहत, चंपारण ने दिखाया सबसे तेज असर
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि सालों तक चलने वाली रंजिश कुछ ही दिनों में बातचीत से खत्म हो रही है। मामलों को सुलझाने की होड़ में पश्चिम चंपारण जिले ने सबको पीछे छोड़ दिया है। वहां 1,965 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से 1,812 का फैसला करा दिया गया। यानी लगभग 92 फीसदी मामलों का निपटारा गांव में ही हो गया। इनमें 1,235 जमीन और रुपयों के झगड़े थे और 625 मारपीट के मामले। इसी तरह लखीसराय में 76 फीसदी और मधेपुरा में 74 फीसदी मामलों को सुलझा लिया गया। गांव के लोगों का कहना है कि जब मामला जिला कचहरी जाने के बजाय अपने ही लोगों के बीच बैठकर सुलझ जाता है, तो दिल में कड़वाहट नहीं बचती और भाईचारा बना रहता है।
जेब का खर्च बचा और मोबाइल स्क्रीन पर दिखने लगी तारीख
पहले कचहरी का नाम सुनते ही छोटे किसानों और मजदूरों के माथे पर पसीना आ जाता था। बस का किराया, दिनभर की दिहाड़ी का नुकसान और कागजी लिखा-पढ़ी का भारी खर्च लोगों की कमर तोड़ देता था। अब स्थिति यह है कि शिकायत दर्ज कराने के लिए किसी दफ्तर की लाइन में नहीं लगना पड़ता। ग्रामीण सीधे egramkachari.bihar.gov.in पोर्टल पर जाते हैं, अपना मोबाइल नंबर डालते हैं और ओटीपी के जरिए लॉग इन कर लेते हैं। इसके बाद केस एंट्री में जाकर अपनी बात लिखते हैं और अपने इलाके के सरपंच, उप-सरपंच व पंच को चुन लेते हैं। केस किस मोड़ पर पहुंचा और सुनवाई कब है, यह सब फोन पर ही पता चल जाता है। इस सादगी और पारदर्शिता ने गांव के कमजोर तबके को भी अपनी बात बेहिचक रखने की हिम्मत दी है।
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