अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Patna : अब तक वे भूगोल की क्लास में सिर्फ नक्शे देखते थे, नदियों का बहाव पढ़ते थे और किताबों में यह समझते थे कि बाढ़ या भूकंप कैसे आते हैं। लेकिन अब वे सरकारी फाइलों, वायरलेस की आवाजों और कंट्रोल रूम की उन स्क्रीनों के बीच हैं, जहां से किसी भी आपदा के वक्त हजारों जिंदगियां बचाने का फैसला लिया जाता है। मौका है बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग में शुरू हुए 10 दिवसीय इंटर्नशिप कार्यक्रम के दूसरे सत्र का, जहां ANC यानी एएन कॉलेज पटना के बीए (भूगोल) के 20 विद्यार्थी जमीनी स्तर पर राहत और बचाव का ककहरा सीख रहे हैं। विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल की पहल पर तैयार किए गए इस कार्यक्रम का मकसद युवाओं को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर वास्तविक चुनौतियों से रूबरू कराना है।
भूगोल के पन्नों से निकलकर जमीन पर उतरेगी समझ
भूगोल के इन छात्रों के लिए यह दस दिन किसी क्लासरूम लेक्चर जैसे नहीं होंगे। यहां उन्हें समझना है कि जब मौसम बिगड़ता है या नदियां उफान पर होती हैं, तो सरकार किस तरह पहले से अलर्ट मोड में आती है। छात्रों को सिखाया जा रहा है कि संकट आने से पहले जोखिम को कम कैसे किया जाए, कम से कम नुकसान हो इसके लिए पहले से क्या तैयारी रखी जाए और जब कोई हादसा हो जाए तो बिना वक्त गंवाए तुरंत एक्शन कैसे लिया जाए। इसके अलावा राहत सामग्री बांटने से लेकर बेघर हुए लोगों के सुरक्षित पुनर्वास तक की पूरी प्रशासनिक चेन को समझने का मौका इन्हें मिलेगा।

जब अधिकारियों और विशेषज्ञों ने साझा किए जमीनी तजुर्बे
इंटर्नशिप के पहले ही दिन छात्रों को विभाग के उन चेहरों से सीधे बात करने का मौका मिला, जो हर बड़े संकट के वक्त फैसले लेते हैं। विभाग के अपर सचिव मो. नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी, उप सचिव अमन प्रीत सिंह और उप सचिव पंकज कुमार कमल ने छात्रों को समझाया कि आपदा के वक्त प्रशासनिक तालमेल कितना जरूरी होता है। वहीं सहायक निदेशक (सूचना एवं जनसंपर्क) अमन कुमार आकाश और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ कोमल प्रिया सिंह ने बताया कि कैसे सही सूचना और तकनीकी तैयारी से किसी बड़े नुकसान को टाला जा सकता है। अधिकारियों ने छात्रों को बताया कि भूगोल की पढ़ाई उन्हें जमीन, मिट्टी और मौसम की समझ देती है, और जब यही समझ आपदा प्रबंधन से जुड़ती है, तो राहत कार्य और ज्यादा असरदार बन जाता है।
नई पीढ़ी तैयार करने की अनोखी पहल
यह इंटर्नशिप एक ट्रेनिंग के साथ छात्रों के नजरिए को बदलने की कोशिश है। आने वाले दिनों में ये छात्र विभाग के अलग-अलग विंग में बैठकर देखेंगे कि मॉनिटरिंग कैसे होती है, जिलों से तालमेल कैसे बैठाया जाता है और विपरीत हालात में तुरंत संसाधन कैसे जुटाए जाते हैं। जब ये 20 छात्र यहां से अपना दस दिन का सफर पूरा करके निकलेंगे, तो उनके हाथ में सिर्फ एक सर्टिफिकेट नहीं होगा, बल्कि संकट के समय समाज और सरकार के साथ खड़े होने का एक ठोस व्यावहारिक अनुभव भी होगा।
इसे भी पढ़ें : बिहार के सरकारी दफ्तरों की छतों पर लगेंगे सोलर प्लांट, 2030 तक बड़ा लक्ष्य


