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हमारी युवा ताकत और संसाधन ही राज्य की असली पूंजी : सीएम
समारोह को संबोधित करते हुए सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के सपने में बिहार पूरी ताकत से साथ खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि कोई भी राज्य तभी मजबूत बन सकता है, जब उसकी अपनी कमाई और आर्थिकी मजबूत हो। इसके लिए कारखानों का लगना बहुत जरूरी है। सीएम ने कहा कि बिहार के पास दो बहुत बड़ी ताकतें हैं… पहला यहां का भरपूर पानी और दूसरा यहां की नौजवान आबादी। राज्य को आगे ले जाना है तो इन दोनों का सही इस्तेमाल करना होगा। जब हमारे युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार मिलेगा, तभी असली तरक्की दिखेगी। अब वह समय चला गया जब सिर्फ कागजों पर बातें होती थीं, अब जमीन पर काम दिख रहा है और बिहार को बदलने में ज्यादा दिन नहीं लगेंगे।

30 दिनों में बनेगी नई नीति, अफसरों को तेजी से जमीन देने के निर्देश
कार्यक्रम में पहुंचे उद्यमियों को भरोसा देते हुए सीएम ने एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि उद्योगपति बिहार आएं और अपनी जरूरत के हिसाब से निवेश का प्रस्ताव दें। सरकार उन प्रस्तावों को फाइलों में नहीं दबाएगी, बल्कि 30 दिनों के भीतर उस सेक्टर के अनुकूल नियम और नीति बना देगी। सीएम ने अधिकारियों को भी सख्त हिदायत दी कि उद्योग लगाने के लिए जमीन देने में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। फाइलें टेबल पर नहीं अटकनी चाहिए। सरकार का मकसद सिर्फ कागजी समझौते करना नहीं, बल्कि असलियत में फैक्ट्रियां चालू कराना है ताकि नौजवानों को पक्की नौकरी मिल सके। इसके लिए बड़े उद्योगों से लेकर छोटे-मझोले कारोबारियों तक, हर किसी को हरसंभव मदद दी जा रही है।
मुजफ्फरपुर से गया तक रैपिड रेल और ड्राई पोर्ट की तैयारी
उत्तर बिहार के इस इलाके को देश-दुनिया के बाजारों से सीधे जोड़ने के लिए सीएम ने कई बड़े प्रोजेक्ट्स की बात कही। उन्होंने बताया कि महवल क्लस्टर में जो भी सामान बनेगा, उसे देश के अलग-अलग कोनों और विदेशों तक आसानी से भेजने के लिए मुजफ्फरपुर में एक ड्राई पोर्ट तैयार किया जाएगा। इससे कारोबारियों को माल भेजने में आसानी होगी और खर्च भी कम आएगा। इसके साथ ही आने-जाने को आसान बनाने के लिए मुजफ्फरपुर, पटना और गया के बीच रैपिड रेल चलाने की योजना पर भी काम चल रहा है। गया में बड़ा मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर बन रहा है और उसी तर्ज पर मुजफ्फरपुर और दरभंगा में भी ऐसे केंद्र बनेंगे। इसके अलावा आने वाले समय की जरूरतों को देखते हुए साल 2030 से पहले 1,000 मेगावाट का डेटा सेंटर खड़ा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए बिजली और सड़कों का नेटवर्क लगातार सुधारा जा रहा है।

रोजगार ढूंढने वाले नहीं, काम देने वाले बनें युवा : श्रेयसी सिंह
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि कल-कारखाने लगाने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि आम लोगों को घर के पास काम मिलता है। सरकार चाहती है कि बिहार का युवा केवल नौकरी की तलाश में भटकने के बजाय खुद अपना काम शुरू करे और चार दूसरे लोगों को भी रोजगार दे। उन्होंने कहा कि राज्य में काम-धंधा शुरू करने के नियमों को काफी आसान बना दिया गया है। नई एमएसएमई नीति से छोटे कारोबारियों को पूंजी, नई तकनीक और बाजार मिलने में काफी सहूलियत हो रही है। टेक्सटाइल, इथेनॉल और चमड़ा उद्योग में बिहार तेजी से आगे बढ़ रहा है और बाहर के बड़े कारोबारी भी अब यहां पूंजी लगाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
अपने ही घर में मिला हुनर को सही मंच : कुंदन कुमार
उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने कहा कि देश भर के बड़े शहरों में जूता और कपड़े बनाने के कारखानों में सबसे ज्यादा मेहनत बिहार के कामगारों की ही होती है। पहले मजबूरी यह थी कि काम सीखने और कमाने के लिए सबको बाहर जाना पड़ता था। अब सरकार की कोशिश है कि यह हुनर अपनी ही जमीन पर दिखे और लोगों को यहीं अच्छा मेहनताना मिले। उन्होंने बताया कि मुजफ्फरपुर का औद्योगिक दायरा काफी बड़ा हो चुका है। यहां टेक्सटाइल, बैग क्लस्टर और इथेनॉल की फैक्ट्रियां लगातार लग रही हैं। पास के मेगा फूड पार्क का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वहां 600 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश हो चुका है और करीब 3,000 स्थानीय लोगों को पक्का काम मिला है। महवल का यह लेदर क्लस्टर भी आने वाले दिनों में हजारों परिवारों के लिए कमाई का जरिया बनेगा।
बियाडा का मकसद उद्योग लगाने वाले लोगों को अनुकूल माहौल देना : नवीन कुमार
बियाडा के प्रबंध निदेशक नवीन कुमार ने कहा कि औद्योगिक क्लस्टर का विकास करने, जरूरी सुविधाएं बढ़ाने और उद्यमियों को बेहतर व्यवस्था देने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की औद्योगिक परियोजनाओं से बिहार में निवेश बढ़ेगा, उद्योग-धंधों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। मुजफ्फरपुर के महवल में बन रहा मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज़ क्लस्टर इस दिशा में एक अहम पहल है। इसके जरिए चमड़ा, जूता-चप्पल और उनसे जुड़े दूसरे उद्योगों को एक ही जगह पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। BIADA का मकसद उद्योग लगाने वाले लोगों को अनुकूल माहौल देना, उनकी जरूरत के हिसाब से बुनियादी सुविधाएं विकसित करना और बिहार में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देना है।

कॉमन फैसिलिटी सेंटर का उद्घाटन और FDDI से करार
उद्घाटन के बाद सीएम सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी, उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी, मंत्री रमा निषाद, मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता, सांसद वीणा देवी, सीएम के सचिव संजय कुमार, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह और डीएम कुमार गौरव सहित तमाम अधिकारियों ने पूरे क्लस्टर का चक्कर लगाकर जायजा लिया। सभी ने स्टॉलों पर जाकर चमड़े के जूते, बैग और बेल्ट जैसे उत्पादों को देखा।
समारोह में क्लस्टर के कॉमन फैसिलिटी सेंटर की भी शुरुआत की गई। यह सेंटर छोटे कारोबारियों के लिए बहुत काम का है, क्योंकि डिजाइनिंग और टेस्टिंग से जुड़ी महंगी मशीनें यहां साझा तौर पर मिलेंगी, जिससे छोटे व्यापारियों को अलग से भारी खर्च नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही कई उद्यमियों को जमीन और शेड के आवंटन पत्र भी बांटे गए।
कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट यानी FDDI के साथ हुआ करार रहा। इस समझौते के बाद अब मुजफ्फरपुर में ही स्थानीय युवाओं को आधुनिक फुटवियर डिजाइनिंग, कटिंग और सिलाई की ट्रेनिंग दी जाएगी। इससे कारखानों को सीधे ट्रेंड कारीगर मिलेंगे और यहां के युवाओं को अच्छी कमाई वाले काम के बेहतर मौके हासिल होंगे।
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