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Pawan Thakur
मातृशोक में डूबे किसी इंसान से मिलने लोग आमतौर पर ढांढस बंधाने जाते हैं, लेकिन रामगढ़ के बेराटांड़ गांव निवासी रामकिशुन बेसरा अपने छह साल के मासूम बेटे अनूप की जिंदगी और उसकी सुनने की ताकत की फरियाद लेकर पहुंचे थे। सीएम हेमंत सोरेन इन दिनों अपने पैतृक गांव नेमरा में अपनी दिवंगत मां स्व. रूपी सोरेन के श्राद्धकर्म के सिलसिले में मौजूद हैं। चारों तरफ गमगीन माहौल और श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़ के बीच जब रामकिशुन अपने बच्चे की बीमारी की पर्चियां लेकर पहुंचे, तो सीएम हेमंत सोरेन ने न केवल एक मुखिया की तरह बल्कि एक संवेदनशील अभिभावक की तरह उनकी तकलीफ को महसूस किया।
मासूम की खामोशी और पिता के आंसुओं की दास्तान
छह साल का अनूप, जिसकी उम्र अभी खिलौनों से खेलने और स्कूल में दोस्तों के साथ चहकने की है, वह दुनिया की तमाम आवाजों से महरूम होने की कगार पर खड़ा था। डॉक्टरों ने जांच के बाद साफ कह दिया था कि अनूप के कान का अंदरूनी हिस्सा यानी इंटरनल इयर खराब हो चुका है और इसे सर्जरी के जरिए बदलना ही एकमात्र रास्ता है। अनूप का इलाज तमिलनाडु के वेल्लौर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में चल रहा था, लेकिन इलाज का खर्च इतना ज्यादा था कि एक साधारण परिवार के लिए सोचना भी डरावना सपना जैसा था। अस्पताल के चक्कर काटते और पैसे जुटाने की नाकाम कोशिशों में रामकिशुन की उम्मीदें पूरी तरह टूटने लगी थीं।
श्राद्धकर्म के बीच जनता की सुध और सरकारी तंत्र की फुर्ती
जब कोई रास्ता नहीं दिखा, तो रामकिशुन ने हिम्मत जुटाकर नेमरा का रुख किया। सीएम से मिलकर उन्होंने भारी मन से बताया कि पैसों की तंगी उनके बच्चे को ताउम्र के लिए बहरा बना देगी। खुद गहरे व्यक्तिगत दुख से गुजर रहे हेमंत सोरेन ने उनकी बात बहुत गौर से सुनी और तुरंत रामगढ़ जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि इसमें एक पल की भी देरी न हो। अमूमन सरकारी योजनाओं में कागजी कार्रवाई महीनों घसीटती है, लेकिन यहां मानवीय पहलू सबसे ऊपर रहा। प्रशासन ने दौड़-धूप करके महज 48 घंटे के भीतर ‘मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना’ की सारी औपचारिकताएं पूरी कर लीं।
दस लाख का संबल और चेहरे पर लौटी उम्मीद की चमक
नेमरा के उसी आंगन में जहां संवेदनाओं का तांता लगा था, सीएम ने खुद रामकिशुन के हाथों में 10 लाख रुपए का सरकारी चेक सौंपा। चेक हाथ में लेते ही पिता की आंखें छलक पड़ीं। रामकिशुन ने रुंधे गले से कहा कि उनके बेटे का भविष्य अब अंधेरे में जाने से बच गया है और वे जल्द ही वेल्लौर जाकर उसका ऑपरेशन करवाएंगे। नेमरा में सिर्फ अनूप ही नहीं, अपनी-अपनी फरियाद लेकर पहुंचे दर्जनों लोगों को मुख्यमंत्री ने बारी-बारी से सुना। दुख की इस घड़ी में भी जब सीएम ने एक लाचार परिवार के आंसू पोंछा तो बेबस पिता के मुख से बस इतना निकला… भला हो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का।
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