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Patna : देशभर में खेतों की उर्वरता बचाने और खेती को टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। इसी सिलसिले में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय विमर्श में बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य का पक्ष रखा। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई इस उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में अलग-अलग राज्यों के कृषि मंत्रियों ने हिस्सा लिया। विजय कुमार सिन्हा ने पटना स्थित कृषि भवन से जुड़ते हुए कहा कि खेती केवल अन्न उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और जीवन का आधार है।
“प्रकृति ही शक्ति है और प्रकृति के प्रति हमारी भक्ति एवं श्रद्धा आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगी। इसी संकल्प के साथ हम शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर इस अभियान का शुभारंभ कर रहे हैं।”
– विजय कुमार सिन्हा, कृषि मंत्री, बिहार सरकार
चौपालों से बदली तस्वीर, छह लाख से ज्यादा किसानों तक पहुंचा अभियान
कृषि मंत्री ने बैठक में बताया कि बिहार में जमीन और पानी बचाने की मुहिम पहले से ही जमीन पर मजबूती से उतारी जा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत राज्य में 1 जून से 30 जून के बीच खेत बचाओ अभियान का पहला चरण चलाया गया था। इस दौरान पूरे राज्य में 7,275 किसान चौपालें लगाई गईं। इन चौपालों के जरिए 6 लाख 19 हजार से ज्यादा किसानों को सीधे तौर पर खेती के आधुनिक और प्राकृतिक तरीकों से जोड़ा गया। वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के कर्मचारियों ने गांव-गांव जाकर किसानों को यह समझाया कि किस तरह रासायनिक खादों का अंधाधुंध इस्तेमाल हमारी जमीन को बंजर बना रहा है।

26 अक्टूबर से दूसरा चरण, जन-आंदोलन बनाने की पूरी तैयारी
विजय कुमार सिन्हा ने आगे की कार्ययोजना साझा करते हुए बताया कि राज्य में 26 अक्टूबर से 30 नवंबर तक इस अभियान का अगला चरण शुरू होने जा रहा है। सरकार की योजना इसे सिर्फ सरकारी कार्यक्रम न रखकर एक बड़ा जन-आंदोलन बनाने की है। आने वाले इस अभियान के तहत किसानों को संतुलित खाद डालने, प्राकृतिक खेती अपनाने, मिट्टी की जांच कराने और सिंचाई के लिए पानी की एक-एक बूंद का सही उपयोग करने के प्रति जागरूक किया जाएगा।

दलहन और फसल विविधीकरण से सुधरेगा मिट्टी का स्वास्थ्य
खेती को लंबे समय तक फायदेमंद बनाए रखने के लिए मंत्री ने बुनियादी बदलावों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को अब परंपरागत तौर-तरीकों से आगे बढ़कर फसल विविधीकरण की तरफ कदम बढ़ाना होगा। खेतों में नमी बरकरार रखने, बारिश का पानी सहेजने, पराली यानी फसल अवशेषों का सही प्रबंधन करने और दलहनी फसलों की बुआई बढ़ाने से जमीन की खोई हुई ताकत वापस लौट सकती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कृषि विज्ञान केंद्रों और प्रसार तंत्र के जरिए वैज्ञानिक सलाह हर खेत तक पहुंचेगी, ताकि स्वस्थ मिट्टी और जागरूक किसान के दम पर आत्मनिर्भर बिहार का सपना सच हो सके।
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