अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : सीसीएल रजरप्पा कोयलांचल में विस्थापितों और स्थानीय रैयतों का सब्र अब जवाब देने लगा है। जिस जमीन पर कभी पुरखों के खेत-खलिहान और आशियाने हुआ करते थे, परियोजना के नाम पर उसे गंवाने के बाद अब लोगों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसी मुद्दे को लेकर रजरप्पा क्षेत्र के विस्थापित और स्थानीय डीओ धारक लामबंद हो गए हैं। गौतम चौधरी की अध्यक्षता में हुई एक अहम बैठक में विस्थापितों ने दो टूक ऐलान किया कि इलाके में बाहरी डीओ धारकों का कारोबार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्थानीय लोगों ने सर्वसम्मति से बाहरी कारोबारियों के पूर्ण बहिष्कार का निर्णय लिया है।
40 स्थानीय परिवारों की आजीविका पर संकट
बैठक में अपनी बात रखते हुए विस्थापितों ने दर्द बयां किया कि विस्थापन के बाद कोयले से जुड़ा यह काम ही उनके जीवन-यापन का एकमात्र सहारा बचा था। क्षेत्र के लगभग 40 स्थानीय डीओ धारक पूरी तरह इसी कारोबार पर निर्भर हैं और इनके जरिए दर्जनों परिवारों का चूल्हा जलता है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सुनियोजित तरीके से बाहरी डीओ धारकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस अनुचित प्रतिस्पर्धा के चलते स्थानीय रैयतों के सामने भुखमरी की नौबत आ रही है। कारोबारियों ने साफ कहा कि जिन्होंने अपनी जमीन देकर परियोजना को खड़ा कराया, आज उन्हीं को हाशिए पर धकेला जा रहा है।
कोयले की दर में 120 रुपये के उछाल से मिलीभगत की आशंका
विवाद की मुख्य वजह हाल ही में हुई स्टीम कोयले की बिडिंग बनी है। बैठक में मौजूद कारोबारियों ने बताया कि स्टीम कोयले का आधार मूल्य 3087 रुपये प्रति टन तय था, लेकिन बोली अचानक बढ़कर 3207 रुपये प्रति टन तक पहुंचा दी गई। प्रति टन 120 रुपये की इस सीधी बढ़ोतरी पर स्थानीय कारोबारियों ने कड़ा ऐतराज जताते हुए मिलीभगत का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम रूप से दरें बढ़ाकर स्थानीय छोटी फर्मों को बाहर करने की कोशिश की जा रही है। इस अस्वाभाविक बढ़ोतरी से एमएस खनन भारती कंस्ट्रक्शन, आशा इंटरप्राइजेज और एमएस एमडी हाकिम अंसारी जैसी स्थानीय फर्मों पर भारी आर्थिक मार पड़ी है।
मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
विस्थापितों के इस कड़े रुख के बाद रजरप्पा कोयलांचल में कारोबारी टकराव के आसार बढ़ गए हैं। बैठक में लखन चौधरी, जितेंद्र चौधरी, सदानंद भगत, डालचंद महतो, संजय महतो, दीपक साव, हजारी ओहदार, बसंत महतो, देवकी नंदन राव, विनोद महतो, टिकेंद्र महतो, जियाउल अंसारी, लखेंद्र चौधरी, वाहिद अंसारी, तपसील अंसारी, गौतम भगत और चितरंजन महतो समेत दर्जनों रैयत मौजूद थे। सभी ने एक सुर में कहा कि प्रबंधन और प्रशासन को स्थानीय लोगों के हितों की सुरक्षा पहले सुनिश्चित करनी होगी, अन्यथा विस्थापित सड़क पर उतरकर काम ठप कराने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
इसे भी पढ़ें : रांची में सजेगा CCL का दूसरा नेशनल पीआर कॉन्क्लेव, अपना हुनर दिखाने का खुला मैदान


