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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : सोमवार की रात घड़ी में 11 के करीब बज रहे थे। पतरातू की सड़कों पर सन्नाटा पसर चुका था और ठंडक के बीच मैक्स लाइफ केयर अस्पताल के आसपास की दुकानें बंद होने की कगार पर थीं। जयनगर के रहने वाले दो पक्के दोस्त महताब आलम और जानिसार आलम हमेशा की तरह एक बंद दुकान की सीढ़ियों के पास खड़े होकर आपस में हंसी-मजाक कर रहे थे। दोनों को जरा भी इल्म नहीं था कि चंद कदमों की दूरी पर मौत बारूद का रूप लेकर उनकी तरफ बढ़ रही है। अगले ही पल अंधेरे को चीरती हुई आग की चिंगारियां निकलीं और ठांय-ठांय की तेज आवाज से पूरा इलाका दहल उठा। किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला और दोनों दोस्त सीने और पेट पर हाथ रखे लहूलुहान होकर सड़क पर जा गिरे।
चीख-पुकार के बीच खौफ का मंजर
गोलियों की गूंज शांत होते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई। सड़क पर खून का फव्वारा छूट रहा था और दर्द से कराहते दोनों युवक मदद के लिए तड़प रहे थे। गोलियों की आवाज सुनकर आसपास के घरों के दरवाजे खटखटाए गए और कुछ ही मिनटों में स्थानीय लोग बदहवास होकर दौड़ पड़े। आनन-फानन में दोनों को पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां खून से सने कपड़े देखकर डॉक्टरों के भी हाथ-पांव फूल गए। दोनों की हालत बेहद नाजुक थी, नब्ज गिर रही थी और शरीर से भारी मात्रा में खून बह चुका था। प्राथमिक पट्टी बांधने के बाद डॉक्टरों ने बिना एक पल गंवाए उन्हें सीधे रांची रिम्स रेफर कर दिया। अस्पताल के गलियारे में पहुंचे परिजनों की चीखें रात के सन्नाटे को चीर रही थीं।

चोरों को भगाने का ड्रामा या भारी लापरवाही?
मामले की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस ने जो थ्योरी पेश की, उसने हर किसी को चौंका दिया। पुलिस का कहना था कि एनटीपीसी के स्टॉक यार्ड में कुछ चोर घुस आए थे और उन्हें डराकर भगाने के लिए यार्ड की सुरक्षा में तैनात लोगों ने हथियार से गोली चलाई थी। पुलिस के मुताबिक वही गोली किसी लोहे या दीवार से छिटककर बाहर खड़े महताब और जानिसार को जा लगी। लेकिन इस दलील ने इलाके में आक्रोश की आग भड़का दी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर कार्रवाई चोरों के खिलाफ थी, तो बंदूक का मुंह रिहायशी इलाके और सड़क की तरफ क्यों था? क्या हवा में फायरिंग करने का कोई नियम नहीं होता, या फिर सुरक्षा गार्डों ने बिना सोचे-समझे सीधी गोली दाग दी?
एक आरोपी जेल में, मगर खौफ के कई सवाल बाकी
घटना के बाद बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए पुलिस ने आनन-फानन में एक आरोपी को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। मगर पुलिस ने अब तक यह साफ नहीं किया है कि जेल भेजा गया शख्स कौन है, उसके पास हथियार का लाइसेंस था या नहीं, और क्या उसने बिना सोचे-समझे गोली चलाने का हुक्म किसी और के कहने पर दिया था। रिम्स के आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे दोनों युवकों के घरवाले इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। पतरातू की फिजाओं में अब भी उस रात का खौफ तैर रहा है और हर जुबान पर बस यही सवाल है कि अपनी ही चौखट के पास खड़े बेकसूरों की जान की हिफाजत का जिम्मा आखिर किसका है।
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